अभिनेता-राजनेता और तमिलागा वेट्री कजगम (टीवीके) प्रमुख विजय ने रविवार को सत्तारूढ़ डीएमके पर तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि डीएमके विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) यानी मतदाता सूची के विशेष पुनरीक्षण को लेकर 'जनता को भ्रमित' कर रही है और इस मुद्दे का इस्तेमाल केवल चुनावी लाभ पाने के लिए कर रही है। विजय ने बयान जारी कर कहा कि डीएमके इस पूरे मसले पर 'धोखेबाजी भरा नाटक' कर रही है ताकि जनता का ध्यान अपनी सरकार पर लगे भ्रष्टाचार के आरोपों से हटाया जा सके। उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी इस मुद्दे पर जनता के अधिकारों की रक्षा के लिए विपक्षी दलों के साथ आने की पक्षधर है, लेकिन डीएमके का उद्देश्य ईमानदार नहीं है।
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डीएमके का भाजपा के साथ है अप्रत्यक्ष रिश्ता- विजय
उन्होंने सवाल उठाया, 'जब केरल विधानसभा ने एसआईआर के खिलाफ प्रस्ताव पास कर दिया, तो डीएमके ने तमिलनाडु विधानसभा में ऐसा क्यों नहीं किया?' विजय ने कहा कि जब उनकी पार्टी ने सबसे पहले एसआईआर का विरोध किया था, तब डीएमके सो रही थी। विजय ने यह भी आरोप लगाया कि डीएमके का भाजपा से अप्रत्यक्ष रिश्ता है, इसलिए उसने उस समय चुप्पी साध ली थी।
उन्होंने कहा, 'डीएमके अपने सहयोगी दलों को जिस तरह छलती है, उसी तरह जनता को भी धोखा देने की कोशिश कर रही है। लेकिन अब लोग इस नाटक को समझ चुके हैं।' टीवीके प्रमुख ने कहा कि उनकी पार्टी एसआईआर को लेकर लोगों में जागरूकता बढ़ाने के लिए सेमिनार और विशेष शिविर आयोजित करेगी।
विजय ने चुनाव आयोग की प्रक्रिया पर उठाया सवाल
विजय ने चिंता जताई कि बिहार में एसआईआर के दौरान लाखों मतदाताओं के नाम हटाने की शिकायतें आई थीं और मामला सुप्रीम कोर्ट में भी लंबित है। उन्होंने सवाल किया कि जब पहली चरण की गड़बड़ियों पर सफाई नहीं दी गई, तो दूसरी चरण की प्रक्रिया कैसे शुरू की जा सकती है?
उन्होंने कहा, 'तमिलनाडु में लगभग 6.36 करोड़ मतदाता हैं। इतनी बड़ी संख्या की जांच सिर्फ 30 दिनों में कैसे संभव है?' विजय ने यह भी कहा कि कई विपक्षी दलों ने अल्पसंख्यक वोटरों को निशाना बनाए जाने की आशंका जताई है, और ऐसी चिंताओं को दूर करने की कोई ठोस गारंटी नहीं दी गई है।
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असम में एसआईआर न होने पर जताया संदेह
विजय ने कहा कि जब असम को एसआईआर के दूसरे चरण से अलग रखा गया है और वहां अलग से मतदाता सूची संशोधन की योजना बनाई गई है, तो इससे संदेह और गहरा हो गया है। उन्होंने कहा कि यह भ्रम पैदा करने वाली एसआईआर प्रक्रिया छोड़ देनी चाहिए और मतदाता सूची में सुधार के लिए जो पुरानी और स्थायी प्रक्रिया है, उसी को जारी रखना चाहिए।