भाजपा अध्यक्ष अमित शाह की पहली पसंद परिवहन मंत्री और प्रदेश अध्यक्ष विजय रुपानी गुजरात के मुख्यमंत्री होंगे। गुजरात सरकार के ही एक अन्य मंत्री नितिन पटेल को उपमुख्यमंत्री पद की जिम्मेदारी दी जाएगी। शुक्रवार को हुई विधायक दल की बैठक में रुपाणी के नेता चुने जाने के साथ ही हाल ही में मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देने वाली आनंदीबेन पटेल के उत्तराधिकार की गुत्थी सुलझ गई है। शनिवार को विजय रुपानी ने गवर्नर ओपी कोहली से मुलाकात की। उनके साथ दिनेश शर्मा, नितिन पटेल सहित कई नेता थे।
गुजरात भाजपा प्रभारी दिनेश शर्मा ने कहा कि विजय रुपानी रविवार को दोपहर 12.40 बजे सीएम पद की शपथ लेंगे।
वैश्य बिरादरी के रुपाणी को मुख्यमंत्री बनाए जाने से पहले से ही आंदोलनरत पटेल बिरादरी की नाराजगी और न बढ़ जाए, इस संभावना को कम करने के लिए इसी बिरादरी के नितिन पटेल को उपमुख्यमंत्री बनाए जाने की घोषणा की गई। विधायक दल की बैठक में पर्यवेक्षक के तौर पर केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी और पार्टी महासचिव सरोज पांडे के साथ खुद शाह भी उपस्थित थे।
गौरतलब है कि आनंदीबेन के रुपाणी के नाम पर सहमत न होने के कारण नितिन पटेल को मुख्यमंत्री बनाए जाने की चर्चा थी। राज्य में अब जल्द ही रुपाणी की जगह नए अध्यक्ष की घोषणा होगी। गुजरात में शुक्रवार को जो कुछ हुआ उससे न सिर्फ शाह की सियासी ताकत का अहसास हुआ, बल्कि यह भी साफ हो गया कि पीएम मोदी और शाह की जोड़ी लीक और फार्मूले की राजनीति नहीं करेगी।
दरअसल राज्य में बीते एक साल से भी अधिक समय से भड़के पटेल आरक्षण आंदोलन और ऊना में दलितों की पिटाई मामले के राष्ट्रीय स्तर पर छा जाने के बाद माना जा रहा था कि नया मुख्यमंत्री इन्हीं बिरादरियों से चुना जाएगा। मगर साल 2001 में मुख्यमंत्री पद पर जिस प्रकार लीक और पुराने फार्मूले को किनारे रख कर पटेल बिरादरी के केशुभाई पटेल की जगह नरेंद्र मोदी को सरकार की कमान दी गई, ठीक इसी प्रकार एक बार फिर से पटेल बिरादरी पर इस बार वैश्य बिरादरी को तरजीह दी गई।
गुरूवार को ही गुजरात पहुंचे शाह ने अपनी सियासी रणनीति से आनंदीबेन को करारी सियासी शिकस्त दी। शाह की पसंद रुपाणी को किसी भी सूरत में मुख्यमंत्री के रूप में स्वीकार करने को तैयार नहीं हो रही आनंदीबेन ने तब हार मानी जब उनके समर्थक करीब डेढ़ दर्जन विधायकों ने भी इस मामले में उनसे किनारा कर लिया।