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इंदिरा और सुब्रमण्यम स्वामी भी हो चुके हैं बर्खास्त, माल्या का नंबर 15वां होगा

Thu, 28 Apr 2016 12:26 PM IST
टीम डिजिटल/अमर उजाला, नई दिल्ली
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राज्यसभा की एथिक्स कमेटी बैंकों से 9,000 करोड़ का लोन लेकर फरार विजय माल्या की सदस्यता खत्म करने की सिफारिश करने पर विचार कर रही है। माल्या का कार्यकाल जुलाई में समाप्त होने वाला है हालांकि सोमवार को एथिक्स कमेटी की बैठक में माल्या की सदस्यता खत्म करने के मुद्दे पर सहमति दिखी। कमेटी ने माल्या का पक्ष जानने के लिए उन्हें एक सप्ताह का समय दिया है। 
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माल्या अपना पक्ष नहीं रखते हैं तो उनकी सदस्यता समाप्त करने की सिफारिश की जा सकती है। अगर ऐसा होता है तो वे ऐसे 15वें सासंद होंगे जिन्हें सदस्यता खत्म करने की सिफारिश की गई। 

1951 से अब तक 14 सांसदों की सदस्यता खत्म की जा चुकी है, हालांकि उनमें से एक सदस्य की सदस्यता खत्म करने के फैसले को सदन ने एक ही साल बार प्रस्ताव लाकर निष्प्रभावी कर दिया था। वो सदस्य कोई और नहीं बल्‍कि कांग्रेस की दिग्गज नेता और देश की पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी थीं।
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राज्यसभा से बर्खास्त किए गए थे स्वामी

- फोटो : PTI
भारत के संसदीय इतिहास में 1951 में पहली बार किसी सदस्य की सदस्यता खत्म की गई थी। 25‌ सितंबर, 1951 को एचजी मुदगल को लोकसभा से बर्खास्त कर दिया गया था। 1950 में भारत नया-नया गणतंत्र बना था और वो पहली संसद थी। 

एचजी मुदगल पर आरोप लगा कि उन्होंने मुंबई के बुलियन मर्चेंट एसोसिएशन से रिश्वत ली है। उस वक्त के प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू मामले की पूरी जांच संसद से कराना चाहते थे। उन्होंने मामले की जांच के लिए संसद में एक एड हॉक कमेटी के गठन का प्रस्ताव पारित कराया। उस कमेटी ने मुद्गल को दोषी पाया था और उनकी सदस्यता रद्द कर दी। 

चंद दिनों पहले ही राज्यसभा में मनोनीत हुए बीजेपी के फायरब्रांड नेता सुब्रमण्यम स्वामी भी बर्खास्तगी की आंच में झुलस चुके हैं। उन्हें 15 नवंबर, 1976 को राज्यसभा से बर्खास्त किया गया था। उन पर देशविरोधी प्रोपेगंडे में शामिल होने, संसद और देश के महत्वपूर्ण सांस्‍थानों को बदनाम करने का आरोप लगा था। 10 सदस्यों की कमेटी ने उन आरोपों को सही पाया और उनकी सदस्यता खत्म करने की सिफारिश की थी। 
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पैसे लेकर सवाल पूछने के आरोप में बर्खास्त हुए थे 11 सांसद

18 नवंबर 1977 को इंदिरा गांधी की लोकसभा की सदस्यता समाप्त की गई थी। उन पर काम में बाधा डालने, कुछ अधिकारियों को धमकाने, शोषण करने और झूठे मुकदमे में फंसाने का आरोप लगा था। हालांकि दिसंबर, 19, 1978 को संसद ने प्रस्ताव पारित का उनकी सदस्यता खत्म करने के फैसले को निष्प्रभावी कर दिया था। 

दिसंबर, 2006 में संसद में पैसे लेकर सवाल पूछने के आरोप में 10 लोकसभा और एक राज्यसभा के सदस्य को बर्खास्त कर दिया गया था। ये सदस्य एक टीवी चैनल के स्टिंग में संसद में सवाल पूछने के एवज में कैश लेते दिखे थे। 

कांग्रेस नेता पवन कुमार बंसल के नेतृत्व में मामले की जांच के लिए एक कमेटी गठित की गई, जिसने आरोपों को सही पाया और उनकी सदस्यता रद्द करने की सिफ‌ारिश की।
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