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पाइरेटेड फिल्में खरीदना या बेचना अपराध है, देखना नहींः हाई कोर्ट

Mon, 05 Sep 2016 12:24 PM IST
टीम डिजिटल/अमर उजाला, नई दिल्ली
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पाइरेटेड फिल्म
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क्या पाइरेटेड फिल्मों के दौरान आने वाली चेतावनी 'यह दंडनीय अपराध है' से आप चिंतिंत हैं? डरने की बात नहीं है,  बॉम्बे हाई कोर्ट ने कहा है कि महज पाइरेटेड फिल्म देखना कॉपीराइट एक्ट के तहत दंडनीय अपराध नहीं है।  
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एक अहम टिप्पणी के दौरान जस्टिस गौतम पटेल ने कहा, 'पाइरेटेड फिल्में देखना अपराध नहीं है, हालांकि कॉपीराइट कॉन्टेंट का डिस्ट्रिब्यूशन, उसका सार्वजनिक प्रदर्शन या बिना अनुमति के उसे बेचना या खरीदना जरूर अपराध है।' कोर्ट ने इंटरनेट सेवा प्रदाताओं से कहा है कि वह उस चेतावनी संदेश में भी बदलाव करें जो  ब्लॉक यूआरएल तक पहुंचने की कोशिश के  दौरान यूजर को दिखाया जाता है। इस चेतावनी संदेश को और अधिक स्पष्ट बनाने के लिए कहा गया है।
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क्या है मामला

पाइरेटेड फिल्म
गौरतलब है कि ब्लॉक यूआरएल को खोलने की कोशिश के दौरान एरर मेसेज में यह संदेश दिखता है- 'इस फिल्म को देखना, डाउनलोड करना, प्रदर्शित करना या उसकी कॉपी बनाना दंडनीय अपराध है।' कोर्ट ने यह टिप्पणी 30 अगस्त को की।  

बॉम्बे हाई कोर्ट फिल्म 'ढिशुम' के निर्माताओं की तरफ से ऑनलाइन पाइरेसी के खिलाफ दायर याचिका पर सुनवाई कर रहा था। इससे पहले कोर्ट ने इंटरनेट सेवा प्रदाताओं को कई यूआरएल को ब्लॉक करने का निर्देश दिया था।  वहीं,  इंटरनेट सर्विस प्रोवाइडर्स ने कहा है कि सॉफ्टवेयर लिमिटेशन की वजह से बड़े एरर मेसेज दिखाना कठिन है। 
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