विदेश मंत्रालय की एक वरिष्ठ अधिकारी ने मंगलवार को कहा कि भारत की ‘हिंद-प्रशांत महासागरीय पहल’ में वियतनाम एक अहम साझीदार है। यह पहल क्षेत्र में समृद्धि, स्थिरता, शांति और बढ़ावा देने के साझा हितों और आदर्शों पर आधारित है। उन्होंने वियतनाम को देश के ‘एक्ट ईस्ट’ नीति का अहम स्तंभ भी बताया।
विदेश मंत्रालय की सचिव (पूर्व) रीवा गांगुली दास का यह बयान भारत की तरफ से 10 देशों के आसियान संगठन के अहम सदस्यों के साथ समुद्री सुरक्षा समझौतों को मजबूत बनाने के के प्रयासों के बीच आया है। यह कोशिश हिंद्र-प्रशांत क्षेत्र में चीन की बढ़ती हठधर्मिता को ध्यान में रखकर शुरू की गई है।
दास ने भारत-वियतनाम बिजनेस फोरम की वर्चुअल बैठक में कहा, हमारी व्यापक रणनीतिक साझीदारी आज राजनीतिक सहभागिता से लेकर आर्थिक और विकास साझेदारी, रक्षा और सुरक्षा सहयोग, ऊर्जा सहयोग, सांस्कृतिक आदान-प्रदान और लोगों से संपर्क के लिए व्यापक सहयोग प्रदान करती है।
उन्होंने कहा, भारत और वियतनाम क ेबीच आपसी विश्वास, साख और बहुत सारे वैश्विक व क्षेत्रीय मुद्दों पर रणनीतिक झुकाव पर आधारित ऐतिहासिक दोस्ताना रिश्ते हैं। उन्होंने कहा, हमारा द्विपक्षीय व्यापार का टर्नओवर अब भी हमारे आर्थिक विकास के अनुरूप नहीं है। ऐसे में हमें अपनी पूरी क्षमता हासिल करने के लिए व्यापार संबंध को व्यापक बनाने और बढ़ाने की आवश्यकता है।
बता दें कि हिंद-प्रशांत सागरीय पहल (आईपीओआई) भारत के समर्थन वाला फ्रेमवर्क है, जिसका मकसद इस क्षेत्र में सुरक्षित समुद्री डोमेन तैयार करना है। इस कांसेप्ट को उस समय चर्चा मिली थी, जब जापान ने आईपीओआई को जोड़ने वाले स्तंभ की तरफ पहले ही इस पहल से लीड पार्टनर के तौर पर जुड़ने की हामी भर ली थी।
आसियान (दक्षिणपूर्वी एशियाई देशों के संगठन) के अहम देश वियतनाम का दक्षिणी चीन सागर में चीन के साथ सीमा विवाद चल रहा है। भारत के दक्षिणी चीन सागर में वियतनामी सीमा के अंदर तेल निकाले की परियोजनाएं हैं, जिस पर चीन आपत्ति जता चुका है। चीन पूरे दक्षिण चीन सागर पर अपना अधिकार जमाता है। यह क्षेत्र हाइड्रोकार्बन का बड़ा भंडार है, जबकि वियतनाम, फिलीपिंग व ब्रुसेल भी इस क्षेत्र पर अपना दावा करते हुए हैं।
278 भारतीय प्रोजेक्ट चल रहे हैं वियतनाम में
जून में भारत की तरफ से 278 वियतनाम में 278 परियोजनाआए चल रही थीं, इनमे 887 मिलियन (88.7 करोड़ रुपये) का निवेश किया गया है। यह पैसा एग्रो-प्रोसेसिंग, चीनी, चाय, कॉफी निर्माण और एग्रो कैमिकल्स, आईटी और ऑटो उत्पादों में लगाया गया है। वियतनाम की तरफ से भी भारत में 2.85 करोड़ रुपये निवेशित किए गए हैं, जिनका इस्तेमाल दवाइयों, आईटी, रसायनों और निर्माण उत्पादों में किया गया है।