और कांग्रेस के जीत का जश्न फीका हो गया। पिछले चार सालों से एक जीत का बाट जोह रही कांग्रेस अभी पूरी तरह से जीत का जश्न मना भी नहीं पाई थी कि उसके लिए बुरी खबर आ गई है। 1984 दंगा मामले में दिल्ली उच्च न्यायालय ने कांग्रेस नेता को दोषी माना है और उम्र कैद की सजा सुनाई है। वहीं दूसरी ओर कांग्रेस पार्टी के दिग्गज नेता अपनी पिछले चार सालों से लगातार चली आ रही हार के बाद तीन राज्यों में मिली जीत का जश्न मनाने की शुरुआत राजस्थान से कर रहे थे।
राजस्थान जयपुर के अलबर्ट हाउस में उस समय देश के दिग्गज नेता एकत्रित थे। अशोक गहलोत का शपथ ग्रहण समारोह चल रहा था कि तभी दिल्ली उच्च न्यायालय ने सिख दंगा मामले में अपना फैसला सुनाया और कांग्रेस के जश्न को फीका कर दिया।
जिस समय सज्जन कुमार के खिलाफ अदालत फैसला सुना रही थी उसी समय अशोक गहलोत और राजस्थान में मिली अप्रत्य़ाशित जीत में शामिल होने कांग्रेस पार्टी के दिग्गज नेता एक दूसरे को बधाई दे रहे थे। पिछले 37 सालों से चले आ रहे सिख दंगों के मामले में कांग्रेस का दिग्गज नेता सज्जन कुमार दोषी करार दिया जा रहा था। अभी पार्टी पर जश्न का पूरी तरह से खुमार भी नहीं चढ़ पाया था कि दिल्ली की अदालत के द्वारा सुनाए गए फैसले ने उसे पूरी तरह से निराशा में बदल दिया।
सोमवार यानी 17 दिसंबर, कांग्रेस पार्टी के जश्न मनाने का दिन है। पिछले साढ़े चार सालों से देशभर के चुनावों हार, हार और हार का सामना कर रही कांग्रेस पार्टी ने भाजपा के गढ़ में सफलता हासिल की है और मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान में भाजपा पार्टी को पछाड़कर जबरदस्त जीत दर्ज की है। तीनों राज्यों में आज कांग्रेस के मुख्यमंत्री का शपथ ग्रहण समारोह का आयोजन किया जा रहा है जिसमें देशभर के दिग्गज नेता शामिल हो रहे हैं।
अशोक गहलोत के शपथ ग्रहण समारोह के बाद, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में शाम में शपथ ग्रहण समारोह होना है। मध्यप्रदेश में कमलनाथ और छत्तीसगढ़ में भूपेश बघेल मुख्यमंत्री पद की शपथ लेंगे। बता दें कि आज मध्यप्रदेश में कमलनाथ मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने जा रहे हैं उनपर भाजपा के नेता तेजिंदर पाल सिंह बग्गा ने कमलनाथ पर आरोप लगाते हुए कहा था कमलनाथ ही वह शख्स थे जिन्होंने साल 1984 में सिख दंगों के दौरान गुरुद्वारा रकाबगंज में आग लगाई थी। उन्होंने ट्वीट कर लिखा था कि कांग्रेस सिख विरोधी पार्टी है।
1984 सिख दंगों में दिल्ली छावनी के राजनगर पालम इलाके में एक नवंबर 1984 को पांच सिखों की हत्या से जुड़े मामले में अदालती फैसले के खिलाफ सात अपीलों पर हाईकोर्ट ने अपना फैसला सुनाते हुए सज्जन कुमार को उम्रकैद की सजा सुनाई है। सज्जन कुमार को 31 दिसंबर तक आत्मसमर्पण करना होगा। इससे पहले निचली अदालत ने उन्हें रिहा कर दिया था। इसके साथ ही दिल्ली हाईकोर्ट ने अन्य दो दोषियों की सजा 3 साल से बढ़ाकर 10 साल कर दी है।
सज्जन कुमार को दोषी करार देते हुए दिल्ली हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि "1947 की गर्मियों में विभाजन के दौरान बहुत सारे लोगों का कत्लेआम किया गया था। उसके ठीक 37 साल बाद दिल्ली फिर वैसी ही त्रासदी का गवाह बनी। आरोपी को राजनीतिक लाभ मिला और वह ट्रायल से बचता रहा।"