टीएमसी सांसद डेरेक ओ'ब्रॉयन ने कहा, हम मार्गरेट अल्वा का पूरा सम्मान करते हैं, लेकिन जिस तरह से उनका चुनाव हुआ हम उसके खिलाफ हैं। ब्रॉयन ने कहा, टीएमसी को कांग्रेस अपने बराबर का साझीदार मानकर कोई फैसला ले।
विपक्ष की ओर से उपराष्ट्रपति पद के लिए मार्गरेट अल्वा की उम्मीदवारी की घोषणा के बाद तृणमूल कांग्रेस ने खुद को मतदान से अलग कर लिया। इसके बाद से विपक्षी एकता में फूट के चर्चे हैं। हालांकि, अब टीएमसी ने खुद इस राज से पर्दा उठाया है कि आखिर, वह मतदान में हिस्सा क्यों नहीं लेने जा रही है।
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पार्टी के सांसद डेरेक ओ'ब्रॉयन ने कहा, हम मार्गरेट अल्वा का पूरा सम्मान करते हैं, लेकिन जिस तरह से उनका चुनाव हुआ हम उसके खिलाफ हैं। ब्रॉयन ने कहा, टीएमसी को कांग्रेस अपने बराबर का साझीदार मानकर कोई फैसला ले।
प्रेसवार्ता से 20 मिनट पहले दी गई सूचना
टीएमसी सांसद ने कहा, विपक्ष की ओर से उपराष्ट्रपति पद की उम्मीदवारी पर प्रेसवार्ता से महज 20 मिनट पहले उन्हें बताया गया कि मार्गरेट अल्वा विपक्ष की ओर से उम्मीदवार होंगी। ब्रॉयन ने कहा, देश की सबसे पुरानी पार्टी के चुनाव सहयोगियों में राजद, राकांपा, शिवसेना, द्रमुक और माकपा जैसी पार्टियां हैं। हम सभी समान विचारधारा वाली पार्टी हैं, जिनका उद्देश्य भाजपा को हराना है। हालांकि, टीएमसी कांग्रेस की चुनाव सहयोगी पार्टी नहीं है। इसलिए टीएमसी को एक समान भागीदार के रूप में देखा जाना चाहिए।
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ममता और धनखड़ के बीच हुआ गुप्त समझौता
मतदान से अलग रहने के टीएमसी के निर्णय के बाद कई तरह के सवाल भी खड़े होने लगे हैं। राकांपा प्रमुख शरद पवार का कहना है कि मार्गरेट अल्वा के नाम की घोषणा के समय ममता बनर्जी वहां पर मौजूद नहीं थीं, तो कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी ने कहा कि भाजपा के उम्मीदवार जगदीप धनखड़ और ममता बनर्जी के बीच एक गुप्त समझौते हुआ है।
अल्वा ने जताई फैसले पर हैरानी
विपक्ष की उप-राष्ट्रपति पद की उम्मीदवार मार्गरेट अल्वा ने तृणमूल कांग्रेस के फैसले को निराशाजनक बताया। उन्होंने कहा कि अभी समय अहंकार या क्रोध का नहीं है। अल्वा की प्रतिक्रिया टीएमसी द्वारा आगामी उप-राष्ट्रपति चुनाव से दूर रहने की घोषणा के एक दिन बाद आई। अल्वा ने कहा कि टीएमसी का उप-राष्ट्रपति चुनाव में मतदान से दूर रहने का निर्णय निराशाजनक है। यह अहंकार या गुस्से का समय नहीं है। यह साहस, नेतृत्व और एकता का समय है। मेरा मानना है कि साहस की प्रतीक ममता बनर्जी विपक्ष के साथ खड़ी रहेंगी।