फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

उपराष्ट्रपति: पार्टी विचारधारा के लिए समर्पित नेता को उम्मीदवार बना सकती है भाजपा, धनखड़ के अनुभव से मिली सीख

Fri, 25 Jul 2025 03:01 PM IST
नितिन गौतम न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

उपराष्ट्रपति पद के चुनाव के लिए चुनाव आयोग ने तैयारियां शुरू कर दी हैं। वहीं भाजपा और उसके सहयोगी दल भी संभावित उम्मीदवार के नाम पर मंथन शुरू करेंगे। ऐसा दावा किया जा रहा है कि जगदीप धनखड़ के कार्यकाल से सीख लेते हुए भाजपा इस बार ऐसे उम्मीदवार के नाम पर विचार कर सकती है, जो पार्टी विचारधारा के लिए समर्पित रहा हो। 
विज्ञापन
जगदीप धनखड़, पूर्व उपराष्ट्रपति - फोटो : X / @VPIndia
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

चुनाव आयोग द्वारा अगले उपराष्ट्रपति के चुनाव के लिए रिटर्निंग अफसर की नियुक्ति कर दी गई है। वहीं भाजपा नेतृत्व गठबंधन ने भी इस अहम संवैधानिक पद के लिए अपने उम्मीदवार के चयन पर मंथन शुरू करने वाला है। ऐसे संकेत हैं कि विपक्ष भी इस दौड़ में शामिल हो सकता है। हालांकि लोकसभा और राज्यसभा के सदस्यों वाले निर्वाचक मंडल में, सत्ताधारी राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) के पास स्पष्ट बहुमत है। वर्तमान में संसद के कुल 782 सांसदों में से एनडीए के पास 425 सांसद हैं। ऐसे में एनडीए उम्मीदवार की जीत तय मानी जा रही है। 
विज्ञापन


पार्टी विचारधारा के लिए समर्पित नेता के नाम पर हो सकता है विचार
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, भाजपा और उसके सहयोगियों ने अभी संभावित उम्मीदवार के नाम पर विचार-विमर्श शुरू नहीं किया है, लेकिन एक मजबूत राय है कि भाजपा नेतृत्व इस बार प्रयोग पर ध्यान देने की बजाय संगठनात्मक मजबूती और पार्टी विचारधारा को प्राथमिकता देगा। खासकर जगदीप धनखड़ के मामले से सीख लेते हुए भाजपा इस बार अपने अनुभवी नेताओं के नाम पर विचार कर सकती है। उपराष्ट्रपति पद सहयोगी पार्टियों के पास जाने की संभावना बेहद कम है और आगामी विधानसभा चुनाव को देखते हुए भाजपा अपने ही किसी नेता को उपराष्ट्रपति बनाना चाहेगी।

धनखड़ के अनुभव से मिली सीख
1991 में जनता दल के सांसद के रूप में अपना राजनीतिक जीवन शुरू करने वाले जगदीप धनखड़ बाद में कांग्रेस में शामिल हो गए। इसके बाद उनकी निष्ठा भाजपा के लिए हो गई। सुप्रीम कोर्ट में एक वरिष्ठ अधिवक्ता के रूप में धनखड़ ने भाजपा नेतृत्व का ध्यान आकर्षित किया, जिसके कारण उन्हें 2019 में पश्चिम बंगाल का राज्यपाल नियुक्त किया गया। बंगाल राज्यपाल रहते हुए धनखड़ और ममता बनर्जी की सरकार में कई बार टकराव की स्थिति बनी और धनखड़ ने अपनी आक्रामक कार्यशैली से कई बार ममता सरकार को असहज किया। साल 2022 में जगदीप धनखड़ को उपराष्ट्रपति नियुक्त किया गया। हालांकि उपराष्ट्रपति के रूप में धनखड़ की मुखरता और अपरंपरागत शैली सरकार को शायद रास नहीं आई। 21 जुलाई को जस्टिस यशवंत वर्मा को हटाने के लिए विपक्ष द्वारा प्रायोजित प्रस्ताव को स्वीकार करने के उनके फैसले से सत्तारूढ़ गठबंधन ने निराशा जताई। इसके कुछ ही घंटों बाद उन्होंने इस्तीफा दे दिया। धनखड़ के कार्यकाल से सीख लेते हुए ही भाजपा इस बार ऐसे उम्मीदवार की तलाश कर रही है, जो पार्टी की विचारधारा के लिए समर्पित हो और उसे प्रशासनिक अनुभव भी हो। 
विज्ञापन


ये भी पढ़ें- Congress: 'संघ और भाजपा जहर जैसे...', कांग्रेस के ओबीसी न्याय महासम्मेलन में बोले कांग्रेस अध्यक्ष खरगे
विज्ञापन


हरिवंश के नाम की भी चर्चा
बिहार विधानसभा चुनाव को देखते हुए उपसभापति हरिवंश के नाम की भी चर्चा है। साथ ही अपने पांच साल के कार्यकाल में हरिवंश ने सरकार का विश्वास भी अर्जित किया है। ऐसे में उन्हें भी संभावित उम्मीदवार के रूप में देखा जा रहा है। चुनाव आयोग ने शुक्रवार को एक बयान में कहा कि उसने न्याय मंत्रालय के परामर्श से और राज्यसभा के उपसभापति की सहमति से, मोदी को 2025 के उपराष्ट्रपति चुनाव के लिए पीसी मोदी को निर्वाचन अधिकारी नियुक्त किया है। चुनाव आयोग ने राज्यसभा सचिवालय की संयुक्त सचिव गरिमा जैन और राज्यसभा सचिवालय के निदेशक विजय कुमार को चुनाव के दौरान सहायक निर्वाचन अधिकारी भी नियुक्त किया है।

विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें