राहुल गांधी की टिप्पणी पर चर्चा की अनुमति देने के संदर्भ में राज्यसभा के सभापति जगदीप धनखड़ ने डॉ. बीआर आंबेडकर के संविधान सभा में दिए अंतिम भाषण का भी जिक्र किया।
धनखड़ ने कहा कि आंबेडकर ने कहा था, जो बात मुझे बहुत परेशान करती है, वह यह है कि न केवल भारत ने एक बार अपनी स्वतंत्रता खो दी है, बल्कि उसने इसे अपने ही कुछ लोगों के विश्वासघात के कारण खोया था। लेकिन, इतना तय है कि अगर पार्टियां देश के ऊपर पंथ को स्थान देती हैं तो हमारी स्वतंत्रता दूसरी बार खतरे में पड़ जाएगी और शायद हमेशा के लिए हम इसे गंवा देंगे। हम सभी को इससे सख्ती से बचना चाहिए। हमें अपने खून की आखिरी बूंद से अपनी आजादी की रक्षा करने के लिए दृढ़ संकल्प होना चाहिए।
हमारी संसद लोकतंत्र का गर्भगृह
राहुल गांधी के राज्यसभा सदस्य न होने के मल्लिकार्जुन खरगे के तर्क पर धनखड़ ने कहा, सदन के नेता पीयूष गोयल ने किसी का नाम नहीं लिया, बल्कि विपक्ष के एक वरिष्ठ नेता के विदेश में हमारी संसद को कलंकित करने वाली टिप्पणी का मुद्दा उठाया है। उसे गंभीर रूप से महाभियोग करार दिया। ऐसे में राज्यसभा की बहस या चर्चा कराने की क्षमता से जुड़ा व्यवस्था का प्रश्न हमारे लोकतंत्र के पवित्र मंच संसद से महत्वपूर्ण नहीं हो सकता।
धनखड़ ने कहा कि भारत दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र और अन्य सभी लोकतंत्रों की जननी है। दुनिया की आबादी का छठवां हिस्सा यहां रहता है। हमारी संसद लोकतंत्र का गर्भगृह है।
संसद की गरिमा धूमिल करने का प्रयास गलत
धनखड़ ने कहा कि सदन को हर उस व्यक्ति के आचरण पर चर्चा करने का अधिकार है, जिसके आचरण और हानिकारक वक्तव्यों से देश, संसद और उसकी गरिमा को गंभीर नुकसान होता हो। बतौर सांसद मिले विशेषाधिकारों की आड़ में लोकतंत्र के मंदिर की गरिमा को तार-तार करने की अनुमति नहीं दी जा सकती। बेतुके आरोपों के दम पर संसद की गरिमा को धूमिल करने का प्रयास, उसको लेकर गलत धारणा पेश करना गलत है। इसे स्वीकार नहीं किया जा सकता। सभापति ने कहा कि उक्त मामले में चर्चा कराने के लिए नेता सदन ने आवश्यक और प्रामाणिक दस्तावेज दिए हैं।
हर मुद्दा या राज्यसभा के दायरे में...
सभापति धनखड़ ने कहा कि इन विचारों को ध्यान में रखते हुए मुझे लगता है कि कोई मुद्दा या व्यक्ति राज्य सभा में चर्चा के दायरे से बाहर नहीं हो सकता है। यह विशेष रूप से सदन और सभापति के अधीन है। माननीय विपक्ष के नेता के रखे गए दो उदाहरण भी इस मुद्दे पर कोई असर नहीं डालते।