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Vice President Election : सेना में अधिकारी होते जगदीप धनखड़, जानें कैसा था छोटे गांव से उपराष्ट्रपति तक का सफर

Sun, 07 Aug 2022 06:41 AM IST
योगेश साहू अमर उजाला रिसर्च डेस्क, नई दिल्ली।

सार

Vice President Election: संसद के दोनों सदनों का संचालन अब राजस्थान के हाथ में है। कोटा के सांसद ओम बिरला साल 2019 से लोकसभा स्पीकर का जिम्मा संभाल रहे हैं। अब बतौर उपराष्ट्रपति उच्च सदन के संचालन का जिम्मा धनखड़ के पास होगा।
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जगदीप धनखड़। - फोटो : Amar Ujala
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विस्तार
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Vice President Election: अगर सबकुछ ठीक रहता तो जगदीप धनखड़ सेना के अधिकारी होते या भारतीय प्रशासनिक सेवा के वरिष्ठ अधिकारी। राजनेता बनने का कभी सपना नहीं देखा क्योंकि राजनीति में उनकी दिलचस्पी नहीं थी। भारतीय प्रशासनिक सेवा पर वकालत को तरजीह दी। मगर राजनीतिज्ञ बनना और उपराष्ट्रपति के पड़ाव तक पहुंचना शायद उनके भाग्य में बदा था। इसलिए जमी जमाई वकालत की प्रैक्टिस के बीच अनमने ढंग से राजनीति की ओर कदम बढ़ाने वाले राजस्थान के छोटे से गांव किठाना के धनखड़ सांसद, विधायक, राज्यपाल के बाद आखिरकार देश के 14वें उपराष्ट्रपति निर्वाचित हो गए।

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जगदीप धनखड़ की ख्वाहिशें पूरी होतीं तो वे सेना या भारतीय प्रशासनिक सेवा के वरिष्ठ अधिकारी होते। राजनीति में उनकी दिलचस्पी नहीं थी। वैसे बाद में प्रशासनिक सेवा पर वकालत को तरजीह दी। मगर उपराष्ट्रपति पद तक पहुंचना उनके भाग्य में था। इसलिए जमी जमाई वकालत की प्रैक्टिस के बीच अनमने ढंग से राजनीति में आए और राजस्थान के छोटे से गांव किठाना के धनखड़ सांसद, विधायक, राज्यपाल के बाद आखिरकार 14वें उपराष्ट्रपति निर्वाचित हो गए।

धनखड़ मेधावी थे। अंग्रेजी, गणित के साथ संस्कृत में गजब की पकड़ शुरुआत में ही बनी। सैनिक स्कूल में 5वीं से 12वीं तक के अध्ययन के दौरान उन्होंने लिखने, पढ़ने और खेलने में नाम कमाया। सांगा हाउस के बेस्ट कैडेट बने और स्कूल को ट्रॉफियां दिलाईं। लिखने की ऐसी अदभुत कला कि उनका अंग्रेजी में लिखा लेख आज भी उस सैनिक स्कूल में सुरक्षित रखा है।
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यारों के यार और बेबाक
धनखड़ को यारों का यार माना जाता है। जाट आंदोलन से लेकर प. बंगाल के राज्यपाल तक बेबाकी उनके व्यक्तित्व का सबसे अहम हिस्सा रही है। कानून की जानकारी और जाटाें में गहरी पैठ के सहारे उन्होंने राजनीति की सीढ़ियां चढ़नी शुरू कीं। उनके इन्हीं गुणों के कारण भाजपा ने उपराष्ट्रपति पद के उम्मीदवार के लिए उनका चयन किया।

देवीलाल लाए राजनीति में
साल 1989 में झुंझुनू से जनता दल के सांसद के तौर पर राजनीति में शुरुआत। हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री देवीलाल को उन्हें सियासत में लाने का श्रेय। दो साल बाद कांग्रेस के टिकट पर किशनगढ़ से विधायक बने। दस साल बाद भाजपा का दामन थामा।

जेटली और संघ ने दिया नया मुकाम
कानून की गहरी जानकारी के कारण भाजपा नेता अरुण जेटली के करीबी बने। संघ की नजर में तब आए जब पर्दे के पीछे से धनखड़ की कानूनी मदद से स्वामी असीमानंद मक्का मस्जिद, मालेगांव व अजमेर दरगाह धमाका मामले में बरी हुए।

बेटे की मौत का सदमा
विधायक रहते धनखड़ साल 1994 में बेटे दीपक की ब्रेन हैमरेज से मौत से बुरी तरह टूट गए थे। हालांकि बाद में सदमे से उबरते हुए उन्होंने परिवार को संभाला। फिलहाल इकलौती बेटी कामना उनके साथ हैं।

वकालत और सियासत दोनों में चमके
धनखड़ ने वकालत को अपना पहला कॅरिअर बनाया। अपनी मेधा के कारण राजस्थान हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में अलग पहचान बनाई। हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के प्रेसिडेंट भी बने। राजनीति में अपने प्रदेश राजस्थान में जाट बिरादरी को आरक्षण दिलाने में लंबा संघर्ष कर लोकप्रियता हासिल की।

वेंकैया के मुकाबले बड़ी जीत
  • 2017 में हुए उपराष्ट्रपति चुनाव में वेंकैया नायडू को 516 यानी कुल वैध मतों के 67.89 फीसदी वोट मिले थे। प्रतिद्वंद्वी गोपालकृष्ण गांधी ने 32.11% यानी 244 मत हासिल किए थे।
  • पिछले उपराष्ट्रपति चुनाव में 785 में से 771 यानी 98.22 फीसदी वोट पड़े थे।
कामयाबी की उड़ान
  • राजस्थान के झुंझुनू जिले के किठाना गांव में 18 मई,1951 को जन्म। सैनिक स्कूल, चित्तौड़गढ़ में पढ़ाई।
  • सुप्रीम कोर्ट में वकील के तौर पर प्रैक्टिस किया।
  • तीन साल अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थता न्यायालय के सदस्य रहे।
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राजनीति में प्रवेश
  • 1989 में राजस्थान के झुंझुनू से लोकसभा चुनाव जीते।
  • प्रधानमंत्री चंद्रशेखर के कार्यकाल में राज्यमंत्री बने।
  • 1993 में कांग्रेस से विधायक। 2008 में भाजपा में शामिल।
  • राजस्थान ओलंपिक संघ व राजस्थान टेनिस संघ के अध्यक्ष भी रहे।
  • 2019 में पश्चिम बंगाल के राज्यपाल के तौर पर नियुक्त।
राजस्थान के हवाले संसद
संसद के दोनों सदनों का संचालन अब राजस्थान के हाथ में है। कोटा के सांसद ओम बिरला साल 2019 से लोकसभा स्पीकर का जिम्मा संभाल रहे हैं। अब बतौर उपराष्ट्रपति उच्च सदन के संचालन का जिम्मा धनखड़ के पास होगा।
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