राज्यसभा इंटर्नशिप कार्यक्रम-चरण 7 के उद्घाटन सत्र में उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर ने हमारी मानसिकता को बड़े पैमाने पर बदल दिया है। हम पहले से कहीं अधिक राष्ट्रवादी हैं। उन्होंने नेत्र रोग विशेषज्ञ एम एल राजा को एक साल के लिए डॉ एस राधाकृष्णन चेयर के लिए नामित किया।
उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने राष्ट्रीय सुरक्षा पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि हमें एकजुट होने की जरूरत है। साथ ही राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए स्वदेशी ताकत भी जरूरी है। उन्होंने एक बार फिर ऑपरेशन सिंदूर की तारीफ की।
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उपराष्ट्रपति एन्क्लेव में राज्यसभा इंटर्नशिप कार्यक्रम-चरण 7 के उद्घाटन सत्र में उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर ने हमारी मानसिकता को बड़े पैमाने पर बदल दिया है। हम पहले से कहीं अधिक राष्ट्रवादी हैं। यह हमारे शांति के संदेश और आतंकवाद के प्रति हमारी पूर्ण असहिष्णुता को बढ़ावा देने के लिए विदेश गए प्रतिनिधिमंडलों में सभी राजनीतिक परिदृश्यों की भागीदारी में परिलक्षित होता है।
उन्होंने कहा कह हाल की घटनाओं को देखते हुए हमारे पास एकजुट रहने और मजबूत होने के अलावा कोई विकल्प नहीं है। राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए हमें स्वदेशी ताकत की आवश्यकता है। युद्ध को ताकत की स्थिति में टाला जाना चाहिए। शांति तब सुरक्षित होती है जब आप युद्ध के लिए हमेशा तैयार रहते हैं और इसलिए ताकत तकनीकी कौशल, पारंपरिक हथियारों के अलावा लोगों से भी आती है।
नेत्र रोग विशेषज्ञ एमएल राजा को एस राधाकृष्णन चेयर के लिए नामित किया
उपराष्ट्रपति और राज्यसभा के सभापति जगदीप धनखड़ ने मंगलवार को नेत्र रोग विशेषज्ञ एम एल राजा को एक साल के लिए डॉ एस राधाकृष्णन चेयर के लिए नामित किया। डॉ. एस राधाकृष्णन चेयर की स्थापना 2009 में राज्य सभा द्वारा भारत में संसदीय लोकतंत्र के विभिन्न पहलुओं पर अनुसंधान को बढ़ावा देने के लिए हुई थी। इस चेयर की शुरुआत प्रथम उपराष्ट्रपति के नाम पर हुई। जो बाद में राष्ट्रपति बने। धनखड़ के कार्यकाल के दौरान इसे क्रियाशील बनाया गया था।
उपराष्ट्रपति ने कहा कि राजा एक नेत्र रोग विशेषज्ञ, पुरालेख विशेषज्ञ, पुरातत्वविद् और इतिहासकार के रूप में असाधारण बहु-विषयक विशेषज्ञता लेकर आए हैं। वे वर्तमान में अविनाश (एकेडमी ऑन वाइब्रेंट नेशनल आर्ट्स एंड साइंटिफिक हेरिटेज) और रिच (रिसर्च इंस्टीट्यूट ऑफ क्रोनोलॉजी एंड हिस्ट्री) के निदेशक के रूप में कार्यरत हैं। उनके पास चिकित्सा, पुरातत्व, पुरालेखशास्त्र और इतिहास में योग्यताएं हैं।