राज्यसभा सदन पटल पर विभिन्न पेपर रखने के नोटिस के बावजूद मंत्रियों की लगातार अनुपस्थिति पर सभापति एम वेंकैया नायडू ने फटकार लगाई है। उन्होंने मंत्रियों से मिलकर अपनी अनुपस्थिति की व्याख्या देने को कहा है।
सोमवार को सदन में रक्षामंत्री राजनाथ सिंह और केंद्रीय पर्यावरण, जलवायु और सूचना एवं प्रसारण मंत्री प्रकाश जावडेकर को सूचीपत्र सदन पटल पर रखना था। लेकिन उनकी अनुपस्थिति में उनके राज्यमंत्री श्रीपाद यसु नायक और बाबुल सुप्रीयों ने पेपर पटल पर रखे। इस पर सभापति एम वेकेंया नायडू ने गहरी नाराजगी जताई और कहा नोटिस के बाद मंत्रियों की अनुपस्थिति स्वीकार्य नहीं है।
उन्होंने मंत्रियों से व्यक्तिगत रूप से मिलकर अनुपस्थिति पर सफाई देने के लिए कहा है। उन्होंने कहा कि भले ही मंत्रियों को उन आवेदनों को स्थगित करने का पूरा अधिकार है। जिसके लिए उन्होंने नोटिस दिया था। लेकिन उनकी गैर मौजूदगी में उन आइटमों पर आगे बढने को बढ़ावा नहीं दिया जा सकता।
इससे पहले बृहस्तपतिवार और शुक्रवार को भी विपक्ष ने सभापति से चर्चा के दौरान मंत्रियों की अनुपस्थिति की शिकायत दर्ज कराई थी। इसके बाद सोमवार को फिर से 12 पेपर सदन पटल पर रखने के लिए केंद्रीय मंत्री राजनाथ सिंह, प्रकाश जावड़ेकर, मुख्तार अब्बास नकवी, प्रहलाद जोशी, किरण रिजुजु, मनसुख मांडविया, अर्जुनराम मेघवाल, जनरल सेवानिवृत वी.के सिंह, रतनलाल कटारिया, वी मुरलीधरन से लेकर प्रतापचंद्र सांरगी तक ने सूचीबद्ध कराया था।
लेकिन पेपर पटल पर रखने के लिए कुछ मंत्री गैरहाजिर रहे। मंत्रियों ने इसके लिए सभापति से अनुमति ली थी या नहीं इसका पता नहीं चल रहा। लेकिन सदन में मंत्रियों की अनुपस्थिति पर सभापति का क्षोभ छलक पड़ा। उन्होंने कहा सदन के भीतर पेपर रखने के आवेदन के बाद मंत्रियों की अनुपस्थिति स्वीकार्य नहीं है।
राज्यसभा में सुबह सदन की कार्यवाही के लिए सदन की बैठक की शुरुआत केसाथ ही मंत्रियों को नाम के साथ सदन पटल पर पेपर रखने के लिए पुकार हुई। तब रक्षामंत्री राजनाथ सिंह की जगह श्रीपाद येसो नाइक ने पेपर सदन पटल पर टेबल किए। पर्यावरण मंत्रालय के सूचीबद्ध पेपर को पर्यावरण राज्यमंत्री बाबुल सुप्रीयों ने पटल पर रखा ।
शीतकालीन सत्र में राज्यसभा में सांसद भले ही रिकॉर्ड काम करने में सफल रहे हों लेकिन सभापति ने पिछले सप्ताह संसदीय स्थायी समिति की बैठकों में भी कम उपस्थिति पर सदस्यों की खिंचाई की थी। सिंतबर में समितियों के पुर्नगठन के बाद से अब तक केवल 41 बैठकों में पिछले सप्ताह 14 सदस्यों ने ही भाग लिया था। इस तरह से प्रश्नकाल के दौरान भी तारांकित प्रश्नों को सूचीबद्ध किया था। लेकिन सांसद मौके पर नदारद पाए गए। इस पर भी सभापति ने सदस्यों को इसकी पुनरावृति न करने का अल्टीमेटम भी दिया था।