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Op Sindoor: 'अगर हमारा नेटवर्क सिस्टम मजबूत नहीं होता तो हम इतने सफल नहीं होते', वायुसेना उप-प्रमुख का बयान

Tue, 11 Nov 2025 03:40 PM IST
नितिन गौतम न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

एयर मार्शल तिवारी ने कहा कि 'ऑपरेशन सिंदूर ने दिखाया कि अगर हम सही तरीके से एकीकृत कमांड नेटवर्क से जुड़े हैं और हमारे पास फैसले लेने के लिए सही उपकरण हैं तो एक असरदार ऑपरेशन कैसे किया जा सकता है'।
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वायुसेना उप-प्रमुख एयर मार्शल नर्मदेश्वर तिवारी - फोटो : एक्स/IAF
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विस्तार
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भारतीय वायुसेना के एक शीर्ष अधिकारी ने कहा है कि ऑपरेशन सिंदूर ने दिखाया कि एक असरदार ऑपरेशन कैसे किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि अगर हमारा एकीकृत कमांड नेटवर्क सिस्टम अच्छा और मजबूत नहीं होता तो ऑपरेशन सिंदूर के दौरान हमें उतनी सफलता नहीं मिल पाती, जितनी हमें अब मिली।  
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'देश का एकीकृत नेटवर्क सिस्टम काफी विकसित हुआ'
एक रक्षा सम्मेलन के दौरान अपने संबोधन में भारतीय वायुसेना के वाइस चीफ ऑफ स्टाफ एयर मार्शल नर्मदेश्वर तिवारी ने कहा कि देश का मिलिट्री इंटीग्रेटेड नेटवर्क सिस्टम पिछले 20 वर्षों में काफी विकसित हुआ है, और इससे दुश्मनों को जवाब देने और पूरे देश की निगरानी करने की क्षमता बेहतर हुई है। उन्होंने ऑपरेशन सिंदूर में भारतीय वायु सेना के इंटीग्रेटेड एयर कमांड एंड कंट्रोल सिस्टम (IACCS) जैसे एयर डिफेंस सिस्टम की भूमिका को सराहा।

पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत ने 7 मई की सुबह मिलिट्री ऑपरेशन शुरू किया और पाकिस्तान और पाकिस्तान-अधिकृत कश्मीर (PoK) में कई आतंकी ठिकानों को निशाना बनाकर तबाह कर दिया। इसे ऑपरेशन सिंदूर नाम दिया गया। पाकिस्तान ने भी भारत के खिलाफ हमले शुरू किए। हालांकि भारत ने अपने मजबूत एयर डिफेंस सिस्टम से पाकिस्तान को हर हमले को नाकाम कर दिया। इस सैन्य टकराव के बाद 10 मई को दोनों देशों के बीच संघर्ष विराम हो गया। 
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मजबूत नेटवर्क से सफल हुआ ऑपरेशन सिंदूर
एयर मार्शल तिवारी ने कहा कि 'ऑपरेशन सिंदूर ने दिखाया कि अगर हम सही तरीके से एकीकृत कमांड नेटवर्क से जुड़े हैं और हमारे पास फैसले लेने के लिए सही उपकरण हैं तो एक असरदार ऑपरेशन कैसे किया जा सकता है'। उन्होंने कहा, 'मैं यह रिकॉर्ड पर कह सकता हूं कि अगर एक अच्छा और मजबूत नेटवर्क नहीं होता, तो हम इतने सफल नहीं होते, जितने अभी हुए।'

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'संघर्ष के नतीजे तय करने में अब भूगोल नहीं, तकनीक की अहम भूमिका'
सीडीएस अनिल चौहान ने अपने एक बयान में कहा कि 'युद्ध सिर्फ जीतने के बारे में होता है। युद्ध में कोई रनर-अप नहीं होता। किसी भी तरह के संघर्ष में बहुत कुछ दांव पर होता है और देशों का भविष्य या देशों का अस्तित्व ही इस पर निर्भर करता है। युद्ध में जीत मूल रूप से रणनीति पर निर्भर करती है। अगर अतीत को देखें, तो रणनीति ज्यादातर भूगोल के आधार पर बनती थी, पुराने समय में, जमीन की बनावट रणनीति को प्रभावित करती थी और रणनीति भी भूगोल को ध्यान में रखकर बनाई जाती थी। भूगोल ने लड़ाइयों, अभियानों और टकरावों के नतीजे तय करने में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और जो कमांडर भूगोल को समझते थे, वे हमेशा इसका इस्तेमाल अपने फायदे के लिए कर पाते थे। लेकिन धीरे-धीरे, तकनीक का तत्व हावी होता जा रहा है और अब तकनीक, भूगोल पर भारी पड़ रही है।'

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