नीति आयोग के उपाध्यक्ष अरविंद पनगढ़िया इस्तीफा देने का मन बना चुके हैं। उन्होंने मंगलवार को खुलासा कि वह 31 अगस्त को यह पद छोड़कर अध्यापन के लिए कोलंबिया यूनिवर्सिटी लौट जाएंगे।
भारतीय अमेरिकी मूल के अर्थशास्त्री और कोलंबिया विश्वविद्यालय में भारतीय राजनीतिक अर्थशास्त्र के प्रोफेसर पनगढ़िया नीति आयोग के जनवरी, 2015 में पहले उपाध्यक्ष बने थे। उस समय योजना आयोग का समाप्त कर नीति आयोग बनाया गया था।
वह आरबीआई के पूर्व गवर्नर रघुराम राजन के बाद दूसरे ऐसे हाई प्रोफाइल शिक्षाविद अर्थशास्त्री हैं जो भारत का प्रतिष्ठित पद छोड़कर अमेरिका में अध्यापन से जुड़ने जा रहे हैं।
64 वर्षीय पनगढ़िया कोलंबिया यूनिवर्सिटी में भारतीय राजनीतिक अर्थशास्त्र के प्रोफेसर हैं और सरकार के थिंक टैंक में उनका कोई निश्चित कार्यकाल नहीं है।
भारतीय मूल के अमेरिकी नागरिक पनगढ़िया ने बताया, ‘यूनिवर्सिटी से अब मुझे अवकाश का और विस्तार नहीं मिल रहा है इसलिए 31 अगस्त को मुझे आयोग से इस्तीफा देना पड़ेगा। दो महीने पहले मैंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भी इस बारे में अपनी इच्छा बता दी थी। रिजर्व बैंक, वित्त मंत्रालय और प्रधानमंत्री कार्यालय के साथ मेरे हमेशा अच्छे संबंध रहे हैं।’
मार्च, 2012 में पनगढ़िया को पद्म भूषण सम्मान मिला था। यह देश का तीसरा सबसे बड़ा नागरिक सम्मान है।
क्या है नीति आयोग
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 15 अगस्त, 2014 को लालकिले से अपने संबोधन के दौरान योजना आयोग को समाप्त करके उसके स्थान पर नीति आयोग स्थापित करने की घोषणा की थी। नीति आयोग का पूरा नाम नेशनल इंस्टीट्यूट फॉर ट्रान्सफॉर्मिंग इंडिया है। इस संस्था को बड़े थिंक टैंक के तौर पर माना जाता है। इस संस्था में 8 सदस्य होते हैं। आठ सदस्यीय थिंक टैंक में एक अध्यक्ष और सात सदस्य होते हैं।