वाइस एडमिरल हरि कुमार ने उम्मीद जताई कि निजी कंपनियों के दौड़ में शामिल होने से रक्षा विनिर्माण अधिक प्रतिस्पर्धी होगा। उन्होंने कहा कि रक्षा खरीदारी प्रक्रिया में जारी सुधारों के तहत ओईएम (मौलिक उपकरण विनिर्माताओं) को इस (छोटे हथियारों के) बाजार में प्रवेश के लिए भारतीय कंपनियों के साथ साझीदारी करने का अवसर दिया जाना चाहिए।
कुमार ने यहां छोटे हथियारों पर अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि हमारी मौजूदा एवं तत्काल जरूरतों को पूरा करने के लिए हम आयात कर रहे हैं, लेकिन इस क्षेत्र में आत्म-निर्भरता दीर्घकाल में देश की मूलभूत आवश्यकता है। यह आवश्यक है कि मूलभूत हथियारों का निर्माण यहां हो।
उन्होंने कहा कि छोटे हथियारों की सूची के आधुनिकीकरण के लिए डीआरडीओ (रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन) एक नई राइफल बना रहा है और एआरडीई (आयुध अनुसंधान और विकास प्रतिष्ठान) गोला बारूद बना रहा है। हमें उम्मीद है कि यह जल्द ही परीक्षण के लिए तैयार हो जाएगा।
उन्होंने कहा कि अग्रिम बलों के लिए राइफल की त्वरित खरीदारी के मामले में प्रगति हो रही है और साथ ही अमेठी में 6.7 लाख एके 203 राइफलों के निर्माण को लेकर रूस के साथ संयुक्त उपक्रम एक बड़ी बात है।
कुमार ने कहा कि हमें मूलभूत सैन्य क्षमता में आत्म निर्भरता हासिल करने की आवश्यकता है ताकि अग्रिम बलों को समकालीन हथियार मिल सकें। हमें हमारे माननीय प्रधानमंत्री की सोच के अनुसार ‘मेक इन इंडिया’ पहल के लिए ऐसा करने की आवश्यकता है।