विश्व हिंदू परिषद ने दुर्गा पूजा को लेकर कुछ सुझाव दिए हैं। संगठन ने कहा है कि विषयों के नाम पर देवी दुर्गा की प्रतिमाओं का स्वरूप नहीं बदला जाना चाहिए। वीएचपी ने पूजा आयोजकों से पारंपरिक रीति-रिवाजों का पालन करने की अपील की है। संगठन का कहना है कि 10 दिनों के इस उत्सव में धार्मिक पवित्रता बनी रहनी चाहिए।
पंडाल के भीतर मांसाहारी भोजन पर रोक की मांग
वीएचपी ने सामुदायिक पूजा समितियों से एक और अपील की है। संगठन ने कहा कि पंडाल के भीतर मांसाहारी भोजन पर सख्त रोक होनी चाहिए। हालांकि, पंडाल के बाहर या उसके आसपास मांसाहारी भोजन के ठेले लगाने पर संगठन ने कोई आपत्ति नहीं जताई है।
पांच खास बातें
- दुर्गा प्रतिमाओं का स्वरूप शास्त्रीय वर्णन के अनुसार रखने की अपील।
- अधूरी प्रतिमाओं की तस्वीरें लेने से बचने को कहा गया।
- पंडालों के भीतर मांसाहारी भोजन पर रोक की मांग की गई।
- परंपरा के अनुसार पूजा करने वाली समितियों को विशेष गैर-नकद सम्मान मिलेगा।
- कोलकाता और आसपास दुर्गोत्सव मंच से दस हजार से ज्यादा पूजा समितियां जुड़ी हैं।
आयोजकों और पुरोहितों के साथ बैठक
वीएचपी ने बुधवार को साल्ट लेक स्थित पूर्वी क्षेत्रीय सांस्कृतिक केंद्र में बैठक की। इसमें बड़े पूजा आयोजक और पुरोहित शामिल हुए। संगठन के राज्य पदाधिकारी स्वरूप चटर्जी ने कहा कि दुर्गा पूजा की धार्मिक गरिमा बनी रहनी चाहिए। उन्होंने कहा कि पूजा सनातनी परंपराओं के अनुसार होनी चाहिए।
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पुराने विषयों पर भी उठाए सवाल
वीएचपी ने पिछली कुछ दुर्गा पूजाओं के विषयों की आलोचना भी की। संगठन ने कहा कि कुछ जगह देवी की प्रतिमा को विधवा के रूप में दिखाया गया। कुछ प्रतिमाओं का स्वरूप भी बदला गया। पंडालों की सजावट में जूते और टूटे शीशों के इस्तेमाल पर भी आपत्ति जताई गई। वीएचपी ने कहा कि देवी दुर्गा और असुर का स्वरूप शास्त्रीय वर्णन के अनुसार होना चाहिए।
आयोजकों ने कहा, सुझावों पर करेंगे विचार
दुर्गोत्सव मंच के पदाधिकारी अंजन उकिल ने कहा कि ज्यादातर पूजा समितियां पहले से ही सही धार्मिक विधियों का पालन करती हैं। उन्होंने कहा कि वीएचपी के सुझावों को मंच की बैठक में रखा जाएगा। इसके बाद उन पर विचार किया जाएगा।