राघव रेड्डी दो बार राष्ट्रीय अध्यक्ष रह चुके हैं। वह तीसरी बार इस पद के लिए मैदान में थे। विहिप का अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष काफी महत्वपूर्ण पद होता है। विहिप के संविधान के अनुसार इसका अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष ही संगठन के कार्यकारी अध्यक्ष, उपाध्यक्ष, तथा कई महासचिवों की नियुक्ति करता है। ऐसे में प्रवीण भाई तोगड़िया के विहिप के भीतर दिन लदने के पूरे संकेत हैं।
कौन हैं कोकजे
अवकाश प्राप्त न्यायाधीश विष्णु सदाशिव कोकजे 2003-2008 तक हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल थे। संघ और विहिप से पुराना नाता है। मूलत: इंदौर, मध्य प्रदेश के रहने वाले हैं। एलएलबी की डिग्री लेने के बाद कोकजे ने इंदौर में वकालत शुरू की था। वे जुलाई 1990 से अप्रैल 1994 तक म.प्र. हाईकोर्ट के और अप्रैल 1994 से सितंबर 2001 तक राजस्थान हाईकोर्ट के जज थे। इस तरह से कोकजे के अध्यक्ष बनने के बाद विहिप पर संघ का प्रभाव बढ़ गया है। इतना ही नहीं प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और केन्द्र में भाजपा की मौजूदा सरकार ने भी इससे राहत की सांस ली है।
क्यों था चुनाव जरूरी
कोकजे पहले भी विहिप के अध्यक्ष हो गए होते। संघ के अंदरुनी मामलों के जानकारों के अनुसार काफी समय से प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और प्रवीण भाई तोगड़िया के बीच दरार तल्ख होती जा रही थी। तोगड़िया इस मामले में किसी की नहीं सुन रहे थे। वहीं अगले साल लोकसभा चुनाव होना है। आक्रामक रुख से हिन्दुत्व को सधे अंदाज में बढ़ाने की रणनीति पर चलने वाले तोगड़िया की क्षमता से संघ और बाजपा के नेता वाकिफ थे। इसलिए संघ को प्रवीण भाई को कमजोर किया जाना जरूरी लग रहा था। इधर तोगड़िया जहां विहिप में चुनाव प्रक्रिया का विरोध कर रहे थे वहीं उन्होंने केन्द्र सरकार की नीतियों के खिलाफ भी हमला तेज कर दिया था। राम मंदिर को लेकर भी काफी तल्ख बयान दे रहे थे।