कर्नाटक सरकार के मंदिर बिल को लेकर विश्व हिंदू परिषद ने राज्यपाल थावरचंद गहलोत से अहम मांग की है। विहिप ने कहा कि वह इस मामले में हस्तक्षेप करें। साथ ही राज्य में हिंदू मंदिरों के प्रशासन के लिए एक नई व्यवस्था लाएं। यह कदम कर्नाटक हाईकोर्ट द्वारा कर्नाटक हिंदू धार्मिक संस्थान और धर्मार्थ बंदोबस्ती अधिनियम, 1997 और इसके संशोधनों को असांविधानिक करार दिए जाने के बाद उठाया गया है।
विहिप ने कहा कि उच्च न्यायालय ने कर्नाटक में सरकारी नियंत्रण वाले मंदिरों पर लागू होने वाले अधिनियम और उसके संशोधनों को असांविधानिक घोषित किया है। जबकि सर्वोच्च न्यायालय ने कहा है कि अधिनियम लागू है। इसलिए अब तक मंदिरों का प्रशासन उसी अधिनियम के तहत संचालित हो रहा है।
विहिप ने बताया कि मामला अभी भी सर्वोच्च न्यायालय में लंबित है, लेकिन यह अनिश्चित स्थिति लंबे समय तक जारी नहीं रह सकती। विहिप ने राज्यपाल को दिए ज्ञापन में कर्नाटक मंदिर योजना का प्रस्ताव रखा है।
विहिप ने कहा कि इसलिए कर्नाटक में हिंदू मंदिरों के प्रशासन के लिए एक नई और सांविधानिक प्रणाली की आवश्यकता है। इसे सुगम बनाने के लिए कर्नाटक मंदिर योजना इस पत्र के साथ संलग्न है। इसे प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष लोकतांत्रिक ढांचे के भीतर बनाया गया है। यह योजना सांविधानिक प्रावधानों के अनुरूप है।
संस्था ने कहा, "यह संविधान के अनुच्छेद 14 के अनुसार संपूर्ण हिंदू समाज की धार्मिक एवं धर्मार्थ संस्थाओं पर लागू है। यह संविधान के अनुच्छेद 25 एवं 26 के अनुरूप है। यह योजना हाईकोर्ट द्वारा उठाई गई अनेक आपत्तियों पर विचार करके और सुप्रीम कोर्ट की ओर से पूर्व में दिए गए निर्णयों के अनुरूप उनका समाधान करके तैयार की गई है।
विहिप ने राज्यपाल से कहा कि कर्नाटक मंदिर योजना सार्वभौमिक रूप से स्वीकार्य है। जो प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष चुनावों के माध्यम से लोकतांत्रिक आधार पर मंदिर प्रशासन के लिए समितियों का गठन करती है। विहिप ने राज्यपाल से आग्रह किया कि उचित कानून और नियम बनाए जाएं और राज्य में इस योजना को लागू किया जाए।
क्या है कर्नाटक मंदिर बिल
कर्नाटक हिंदू धार्मिक संस्थान एवं धर्मार्थ निधि (संशोधन) बिल को कर्नाटक विधानसभा ने 6 मार्च, 2024 को पारित किया था और 16 मई, 2025 को राज्यपाल के पास फिर से प्रस्तुत किया गया। यह बिल कम आय वाले मंदिरों में सेवारत पुजारियों को लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से बनाया गया है।
धार्मिक एंडोमेंट मंत्री रामलिंगा रेड्डी ने बताया कि राज्य में 3,000 सी-ग्रेड मंदिर हैं, जहां से धार्मिक परिषद को कोई धन नहीं मिलता। बी-ग्रेड मंदिरों (5 लाख से 25 लाख आय) से 5 प्रतिशत और 25 लाख से अधिक आय वाले मंदिरों से 10 प्रतिशत धनराशि परिषद को दी जाती है।
नए प्रावधानों के तहत, 10 लाख तक आय वाले मंदिरों को अब परिषद को धन नहीं देना होगा। 10 लाख से एक करोड़ तक आय वाले मंदिरों से 5 प्रतिशत और एक करोड़ से अधिक आय वाले मंदिरों से 10 प्रतिशत धनराशि ली जाएगी। यह राशि धार्मिक परिषद को दी जाएगी, जिससे राज्य के 40,000 से 50,000 पुजारियों को सहायता प्रदान की जाएगी। अब बिल को राष्ट्रपति की मंजूरी का इंतजार है।