हैदराबाद के एक निजी स्कूल की शिक्षिता पर आरोप लगा है कि उसने दूसरी कक्षा के एक हिंदू छात्र को इस्लामी आयत याद करने का होमवर्क दिया। वीएचपी ने स्कूल प्रबंधन पर कार्रवाई की मांग की है। पढ़िए रिपोर्ट-
विश्व हिंदू परिषद (वीएचपी) ने गुरुवार को हैदराबाद के एक निजी स्कूल के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। संगठन का आरोप है कि दूसरी कक्षा में पढ़ने वाले हिंदू समुदाय के छात्र को एक शिक्षिका ने इस्लामी आयत याद करने के लिए कहा। वीएचपी ने इसे बच्चों का योजनाबद्ध तरीके से 'सॉफ्ट कन्वर्जन' (धीरे-धीरे धर्मांतरण) करने का मामला बताया।
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विवाद तब शुरू हुआ, जब हैदराबाद के एक निजी स्कूल में दूसरी कक्षा के छात्र के माता-पिता ने आरोप लगाया कि उनके छह साल के बेटे को गृहकार्य के रूप में एक इस्लामी आयत याद करने के लिए कहा गया।
वीएचपी प्रमुख ने सोशल मीडिया पर क्या कहा?
वीएचपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता विनोद बंसल ने कहा कि स्कूल धार्मिक शिक्षा थोपने की जगह नहीं हैं। उन्होंने संबंधित स्कूल प्रबंधन के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की।
उन्होंने एक सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा कि स्कूल ज्ञान के मंदिर हैं, धार्मिक शिक्षा, कलमा या ऐसे किसी एजेंडे को थोपने के केंद्र नहीं।
उन्होंने कहा कि भाग्यनगर (हैदराबाद) में दूसरी कक्षा के एक मासूम छात्र को कलमा सिखाने की घटना बच्चों के सांविधानिक अधिकारों और माता-पिता की आस्था पर सीधा हमला है।
बंसल ने कहा कि दोषी स्कूल प्रबंधन के खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।
'सॉफ्ट कन्वर्जन' का लगाया आरोप
बंसल ने सवाल किया, कोई शिक्षिका और स्कूल हिंदू छात्र को कलमा और फातिहा पढ़ने का निर्देश कैसे दे सकते हैं?
उन्होंने आरोप लगाया कि जब माता-पिता ने इस मुद्दे को उठाया, तो स्कूल ने उनकी शिकायतों पर ध्यान नहीं दिया। उन्होंने कहा कि छात्र के माता-पिता स्कूल पहुंचे और अधिकारियों से जवाब मांगा। माता-पिता स्कूल प्रबंधन के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। बंसल ने दावा किया, यह हमारे बच्चों का योजनाबद्ध तरीके से सॉफ्ट कन्वर्जन करने का स्पष्ट मामला है।
एक शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया है कि हैदराबाद के सईदाबाद स्थित एक निजी शिक्षण संस्थान 'सक्सेस द जूनियर कॉलेज' छात्रों को इस्लामी धार्मिक पाठ और प्रार्थनाएं अनिवार्य गृहकार्य के रूप में दे रहा है।
एनएचआरसी ने राज्य सरकार को जारी किया नोटिस
इस मामले का राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) ने स्वतः संज्ञान लिया है। आयोग के सदस्य प्रियांक कानूनगो की अध्यक्षता वाली पीठ ने राज्य सरकार को नोटिस जारी किया है।