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Veterans Day 2025: इस स्पेशल-डे पर कुछ ऐसे मिले पूर्व सैनिक, जयपुर के इस मिलिट्री स्टेशन का ऐसा था नजारा

सार

 Veterans Day 2025:  'वेटरन्स डे 2025' सेलिब्रेशन के मौके पर सैकड़ों की संख्या में पूर्व सैनिकों प्रेरणा स्थल पहुंचे और अपने दिवंगत हुए साथियों को याद किया। इसके बाद सभी ने एक-दूसरे से मिलकर अपने सुख-दुख साझा किए।
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'वेटरन्स डे 2025' सेलिब्रेशन - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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राजस्थान की राजधानी जयपुर के मिलिट्री स्टेशन का नजारा मंगलवार को आम दिनों से बेहद अलग था। सुबह के माहौल में भले ही हल्की ठंडक थी,लेकिन वहां मौजूद सैकड़ों पूर्व सैनिकों में गर्मजोशी दिखाई दे रही थी। हर कोई अपने पुराने साथी से मिलकर खुश था। मौका केवल मकर संक्राति का नहीं बल्कि 'वेटरन्स डे 2025' सेलिब्रेशन का था। सैकड़ों की संख्या में जुटे पूर्व सैनिकों ने पहले प्रेरणा स्थल पहुंच अपने दिवंगत हुए साथियों को याद किया। इसके बाद सभी ने एक-दूसरे से मिलकर अपने सुख-दुख साझा किए। कार्यक्रम में मौजूद पूर्व सैनिकों का कहना था कि, इस आयोजन के जरिए हमें अपने पुराने साथियों से मिलने का मौका मिलता है। जिससे हमारी सेना में काम करने की यादें फिर से ताजा हो जाती है। आज हम भले ही रिटायर्ड हो गए हैं,लेकिन देश सेवा के लिए इरादे अभी भी मजबूत हैं।  
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दरअसल, 14 जनवरी 1953 को भारतीय सेना के पहले कमांडर-इन-चीफ, फील्ड मार्शल के.एम.करिअप्पा,ओबीई, सैन्य सेवा से सेवानिवृत्त हुए थे। उन्ही की याद में 2017 से यह दिन वेटरन्स डे के रूप में मनाया जाता है। इसी सिलसिले में मंगलवार को सप्त शक्ति कमांड द्वारा जयपुर के मिलिट्री स्टेशन में 'वेटरन्स डे 2025' आयोजन किया गया। कार्यक्रम में राजस्थान के राज्यपाल हरिभाऊ किसनराव बागड़े, लेफ्टिनेंट जनरल मनजिंदर सिंह, आर्मी कमांडर, सप्त शक्ति कमांड के अलावा वरिष्ठ सैन्य अधिकारी, सैनिक, पूर्व सैनिक और वीर नारियां शामिल हुई।  

 

भूतपूर्व सैनिक दिवस - फोटो : अमर उजाला
सप्त शक्ति ऑडिटोरियम में हुए कार्यक्रम को संबोधित करते हुए प्रदेश के राज्यपाल हरिभाऊ किसनराव बागड़े ने कहा,आज मुझे खुशी है कि मैं आप लोगों के बीच हूं। मकर संक्रांति के पर्व पर मुझे आप लोगों के बीच आने का अवसर मिला। ये मेरे लिए बेहद ही प्रसन्नता की बात है। मैं अपने सभी पूर्व सैनिकों का आभारी हूं। जिन्होंने देश की सेवा में अपना अमूल्य योगदान दिया है। हमारे पूर्व सैनिकों ने वर्ष 1947, 1965, 1971 और 1999 के युद्धों में बड़े ही साहस का प्रदर्शन किया। इसके अलावा देश में आपातकालीन परिस्थितियों में भी उनका भरपूर योगदान रहा है। राजस्थान वीरों की भूमि है। इस प्रदेश के वीर सैनिकों का देश की सेवा में अहम योगदान है।

सप्त शक्ति कमांड के आर्मी कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल मनजिंदर सिंह ने समारोह को संबोधित करते हुए कहा, राष्ट्र निर्माण में वेटरन्स और वीर नारियों की महत्वपूर्ण भूमिका है। आज ये शिक्षा, उद्योग, संचार और समाज के समग्र विकास में अपना बहुमूल्य योगदान दे रहे है। आज का ये दिन हमें अपने वेटरन्स को श्रद्धांजलि देने और उनके बलिदानों को याद करने का अवसर प्रदान करता है।

उन्होंने कहा, सप्त शक्ति कमांड ने 'ज्ञान शक्ति थिंक टैंक' की स्थापना की है। इसके जरिए हम पूर्व सैनिकों के अनुभव और विशेषज्ञता का लाभ डिफेंस,उद्योग सेक्टर समेत अन्य क्षेत्रों में ले रहे है। ताकि हम इन क्षेत्रों में तेजी से प्रगति कर सकें। आज कई पूर्व सैनिक सेवानिवृत्ति के बाद योग, शिक्षा, संचार, स्वास्थ्य समेत कई क्षेत्रों में अपना महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं। इसका फायदा समाज के सभी लोगों को मिल रहा है। इसलिए हम उन्हें इस विशेष मौको पर सम्मानित भी करते है।

उन्होंने आगे कहा,सप्त शक्ति कमांड ने पूर्व सैनिकों और वीर नारियों के कल्याण के लिए कई पहल शुरू की है। इसमें रोजगार मेले, ईएसएम रैलियां और स्पर्श आउटरीच जैसे कार्यक्रम शामिल है। हमारी सतत मिलाप टीमें पूर्व सैनिकों और वीर नारियों से लगातार जुड़ी हुई है। यह टीम अभी तक सैकड़ों पूर्व सैनिकों की समस्याओं का समाधान कर चुकी है। वर्तमान में दक्षिण पश्चिम कमान में चौदह सैनिक सहायता केंद्र कार्यरत हैं। ये सभी केंद्र फोन, इंटरनेट, एसएमएस के माध्यम से पूर्व सैनिकों से जुड़े हुए हैं। इन केंद्रों ने बीते दो महीनों में 90 प्रतिशत समस्याओं का समाधान किया है। पूर्व सैनिक कैंटीन,ईसीएचएस पॉलीक्लिनिक और पेशेंट ट्रांजिट सुविधा की स्थापना जैसे प्रयास भी पूर्व सैनिकों और वीर नारियों को सुविधा प्रदान करने के लिए किए गए है।

 
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भूतपूर्व सैनिक दिवस - फोटो : अमर उजाला
जानें क्यों मनाया जाता है भूतपूर्व सैनिक दिवस
भारतीय सशस्त्र सेनाओं के प्रथम कमांडर-इन-चीफ फील्ड मार्शल केएम करिअप्पा के भारतीय सेना में उल्लेखनीय योगदान को याद करने के लिए हर वर्ष 14 जनवरी को सशस्त्र सेना के भूतपूर्व सैनिक दिवस मनाया जाता है। वह 1953 में इसी दिन सेवानिवृत्त हुए थे। यह दिवस पहली बार 2017 में मनाया गया था और तब से हर साल पूर्व सैनिकों के सम्मान में इस तरह के संवादात्मक कार्यक्रमों का आयोजन कर उन्हें याद किया जाता है।
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