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'खान-पान पर पाबंदी बर्दाश्त नहीं': राज्यपाल के शाकाहारी निर्देश पर भड़के वेणुगोपाल, कहा- संघ परिवार का एजेंडा

Fri, 23 Oct 2026 04:15 PM IST
अस्मिता त्रिपाठी पीटीआई, तिरुवनंतपुरम।

सार

केरलम के नए राज्यपाल ओम प्रकाश माथुर के लोक भवन की रसोई में मांसाहारी भोजन न बनाने के कथित निर्देश पर विवाद खड़ा हो गया है। कांग्रेस महासचिव के.सी. वेणुगोपाल ने इसे खान-पान की स्वतंत्रता पर हमला बताते हुए आरोप लगाया कि यह संघ परिवार के एजेंडे को आगे बढ़ाने का प्रयास है।
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 के.सी. वेणुगोपाल, कांग्रेस के महासचिव - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
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कांग्रेस के महासचिव के.सी. वेणुगोपाल ने केरलम के नए राज्यपाल ओम प्रकाश माथुर के एक कथित फैसले की कड़ी आलोचना की, जिसमें उन्होंने राजभवन की रसोई को पूरी तरह से शाकाहारी बनाने का निर्देश दिया है। वेणुगोपाल ने आरोप लगाया कि यह संघ परिवार की असंवैधानिक रुचियों को दिखाता है।
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क्या है पूरा मामला?
दरअसल, शुक्रवार को पदभार संभालने वाले माथुर ने निर्देश दिया है कि लोक भवन की रसोई में मांसाहारी व्यंजन न तो बनाए जाएं और न ही परोसे जाएं। ये खबरें गुरुवार को स्थानीय मीडिया में सामने आईं। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए, राज्यपाल कार्यालय के सूत्रों ने बताया कि माथुर पूरी तरह से शाकाहारी हैं। इसीलिए उन्होंने रसोई में मांसाहारी भोजन न बनाने का निर्देश दिया था। उन्होंने कहा कि कर्मचारियों की अपनी पसंद के भोजन पर कोई रोक-टोक नहीं थी।

वेणुगोपाल ने क्या कहा? 
शुक्रवार को माथुर के शपथ लेने के कुछ ही समय बाद, वेणुगोपाल ने एक बयान में आरोप लगाया 'राज्यपाल ने यह तय करके हद पार कर दी है कि रसोई में केवल शाकाहारी भोजन ही बनेगा। उन्होंने कहा कि केरल की खाद्य संस्कृति मिली-जुली है। तटीय राज्य होने के नाते यहां मछली की प्रचुरता है। उन्होंने आगे कहा कि राज्य के लोगों को शाकाहारी या मांसाहारी भोजन चुनने की पूरी आजादी है। उन्होंने कहा, 'केरल के लोगों की खान-पान की आदतों पर पाबंदी लगाने की कोशिश, या उन्हें यह बताने की कोशिश कि अब से उन्हें क्या खाना चाहिए, बिल्कुल भी स्वीकार्य नहीं है।'
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वेणुगोपाल ने क्या आरोप लगाया? 
उन्होंने आरोप लगाया कि संवैधानिक पद पर बैठे एक व्यक्ति, जिनका कर्तव्य लोगों के खान-पान और जीवनशैली चुनने के अधिकार की रक्षा करना है। वे दूसरों पर अपनी खान-पान की आदतें थोपने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि नए राज्यपाल अपने अधिकारों का इस्तेमाल व्यक्तिगत स्वतंत्रता को सीमित करने के लिए कर रहे हैं।

अलाप्पुझा लोकसभा सांसद ने आरोप लगाया, 'यह संघ परिवार के असंवैधानिक एजेंडे को आगे बढ़ाने का एक हिस्सा है। यह केरल में संघ परिवार के 'भगवा एजेंडे' को लागू करने की दिशा में पहला कदम है।' वेणुगोपाल ने कहा कि माथुर को अपनी शाकाहारी जीवनशैली अपनाने की पूरी छूट है, लेकिन यह स्वीकार्य नहीं है कि 'लोक भवन' की रसोई में, जहां केरल के कर्मचारी भी काम करते हैं, राज्यपाल की निजी पसंद के हिसाब से पाबंदियां थोपी जाएं।

लोक भवन का खाना कौन-कौन खाता है? 
सूत्रों के अनुसार, 'लोक भवन' की रसोई में बनने वाला खाना केवल राज्यपाल और उनके निजी स्टाफ के कुछ सदस्यों को ही परोसा जाता है। उन्होंने बताया कि बाकी कर्मचारी या तो घर से खाना लाते हैं या बाहर खाते हैं, और उनके खान-पान की पसंद पर कोई पाबंदी नहीं लगाई गई है। उन्होंने यह भी बताया कि इससे पहले के कुछ राज्यपालों के कार्यकाल में 'लोक भवन' की रसोई में मछली और मांस से बने व्यंजन बनाने की अनुमति थी।

शुक्रवार को 'लोक भवन' में आयोजित एक समारोह में माथुर ने केरल के 29वें राज्यपाल के रूप में शपथ ली। केरल उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश सौमेन सेन ने उन्हें पद की शपथ दिलाई। माथुर ने राजेंद्र विश्वनाथ अर्लेकर की जगह ली है, जिन्हें अब तमिलनाडु का राज्यपाल नियुक्त किया गया है।
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