देश के अगले उपराष्ट्रपति के प्रबल उमीदवार वेंकैया नायडू ने अपने बेटे की कार डीलरशिप और तेलंगाना सरकार से जुड़े सौदे में भ्रष्टाचार के आरोपों का खंडन किया। नायडू ने कांग्रेस के सभी आरोपों को पूरी तरह से गलत और राजनीति से प्रेरित बताया। इससे पहले कांग्रेस के वरिष्ठ नेता जयराम रमेश ने नायडू की ईमानदारी पर सवालिया निशान लगाते हुए बीजेपी से उनके जवाब मांगे थे। इनमें नायडू की बेटी के स्वर्ण भारती ट्रस्ट और बेटे की कंपनी को अतिरिक्त लाभ पहुंचाने के साथ नायडू पर गरीबों की जमीन हड़पने के आरोप लगाए थे। नायडू ने कहा कि कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने जो मुद्दे उठाए हैं उसका जवाब इसके पहले भी दिया जा चुका है।
कांग्रेस ने कहा कि देश की सबसे छोटी राज्य की सरकार ने पुलिस के लिए वाहन खरीदने का ऑर्डर दिया था जिसकी किमत 2014 में 270 करोड़ रुपये थी। जिनमें से कुछ कारें हर्ष टोयोटा से खरीदी गईं, जो कि श्री नायडू के बेटे के पास थीं। वहीं अन्य कारें तेलंगाना के मुख्यमंत्री के चंद्रशेखर राव के बेटे के स्वामित्व वाली डीलरशिप द्वारा खरीदी गई थी। विपक्षी दल ने कहा डीलरशिप के लिए बोली लगाने की प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया। लेकिन वेंकैया नायडू ने कहा कि यह सौदा सीधे राज्य सरकार और टोयोटा के बीच हुई थी।
कांग्रेस ने यह भी दावा किया कि तेलंगाना में नायडू की बेटी द्वारा संचालित स्वर्ण भारत ट्रस्ट को विकास शुल्क के भुगतान में हैदराबाद नगर निगम के अधिकारियों द्वारा 2.2 करोड़ की छूट दी गई। इस पर नायडू ने कहा कि जब यह मुद्दा मीडिया ने उठाया था तब तेलंगाना सरकार ने अपने 23 जुलाई, 2017 के प्रत्युत्तर में साफ किया कि एसबीटी पहला और अंतिम नहीं है जिसे इस तरह की छूट दी गई। ग्रेटर हैदराबाद नगर निगम के विशेष आयुक्त नवीन मित्तल ने छूट की बात से इनकार नहीं किया। उन्होनें कहा कि कम से कम ऐसे 17 ट्रस्ट हैं जिनकी योग्यता पर विचार करने के बाद केस-टू-केस के आधार पर छूट दी गई है।
वेंकैया नायडू ने सभी आरोपों का खंडन करते हुए कहा कि यह साफ है कि इन मुद्दों का जिक्र उपराष्ट्रपति चुनाव से कुछ दिन पहले किया गया है, जो राजनीतिक मंशा को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि यह कांग्रेस पार्टी की नाउम्मीदी और राजनीतिक दिवालिएपन की भावना का स्पष्ट सबूत है।