विद्या ने वकालत की पढ़ाई बंगलूरू से पूरी की है। पहली बार सांसदी लड़ रहीं विद्या ने साफ कर दिया है कि उनका पूरा फोकस पढ़े लिखे युवाओं के लिए रोजगार, किसानों के लिए जल की उपलब्धता जैसे स्थानीय मुद्दों पर होगा।
पिता वीरप्पन को मानती हैं प्रेरणा
विद्या अपने पिता वीरप्पन को प्रेरणा मानती हैं। उनका कहना है कि उनके पिता को कितना भी दुर्दांत अपराधी माना जाए, लेकिन उनके साथ रहे लोग उनके बारे में जो भी बताते हैं, उसे सुनकर उनका जीवन प्रेरणा देता है। वह जब भी मुश्किल में होती हैं तो पिता के जीवन की उन्हीं बातों को याद करती हैं और समाधान खोज लेती हैं। विद्या ने अपनी उतार-चढ़ाव भरी परवरिश में चुनौतियों का सामना करना सीखा। मुश्किल दौर के बीच उन्होंने पढ़ाई को अहमियत दी और कुछ बनने की महत्वाकांक्षा रखी। उन्होंने जितना संभव हो उतना पढ़ने का प्रयास किया और वकालत की।
राजनीतिक समीकरण भी बेजोड़
विद्या के छोटे सियासी सफर में राजनीतिक समीकरण बेजोड़ रहा। विद्या ने भाजपा से राजनीति की शुरुआत की। उन्हें सार्वजनिक रूप से वीरप्पन की ओर से क्षमादान की वकालत करने वाली पट्टाली मक्कल काची पार्टी (पीएमकेपी) का भी समर्थन है। अब वह तमिल आंदोलन के दौरान बनी एनकेटी ने टिकट दिया है। विद्या ने अपनी मां की आपत्तियों के बावजूद ईसाई दलित व्यक्ति से अंतर्जातीय शादी की है।