जीएसटी के मुद्दे पर बुधवार को सदन में चर्चा हुई। इस दौरान कांग्रेस ने बीजेपी पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि इसे लागू करने में सात-आठ साल की देरी हुई। इससे 12 लाख करोड़ रुपए का नुकसान हुआ। कांग्रेस ने सवाल किया कि इसकी भरपाई कौन करेगा?
कांग्रेस सदस्य वीरप्पा मोइली ने कहा कि मोदी सरकार इसे क्रांतिकारी कर सुधार पहल बता रही है। लेकिन विधेयकों के प्रावधानों से स्पष्ट रूप से संकेत जाते हैं कि यह एक छोटा सा कदम है। उन्होंने कहा, यह प्रौद्योगिकी के लिए दुखद होगा, इसके प्रावधान बेहद आघातकारी होंगे।
मोइली ने कहा, यूपीए सरकार जब जीएसटी विधेयक को लाई थी तो इस समय सत्ता में आसीन लोगों ने इसका विरोध किया था। इस बीच 7-8 साल गुजर गए। इससे देश का हर साल का 1.5 लाख रुपए का नुकसान हो गया। इससे 12 लाख करोड़ रुपए कुल नुकसान हुआ। इसकी भरपाई कौन करेगा?
उन्होंने कहा कि जीएसटी पर जो प्रावधान प्रस्तावित हैं, वह इसकी मूल भावना के विपरीत हैं। कई तरह के कर, उपकर और सरचार्ज के कारण एक राष्ट्र, एक कर की अवधारणा मिथक ही है। साथ ही वस्तुओं की अंतर राज्य आवाजाही, लालफीताशाही को बढ़ावा देने वाले हैं। घाटा उठाने वाले राज्यों को पर्याप्त मुआवज देने का प्रावधान नहीं किया गया है।
मोइली ने कहा, रियल एस्टेट को भी जीएसटी के दायरे में लाने का सुझाव आया था। यहां काफी कालाधन लगा हुआ है। लेकिन सरकार ने इसे नजरअंदाज कर दिया। क्या इस पर किसी लॉबी का दबवा है?