वेटिकन ने फ्रांसिस्कन क्लैरिस्ट कांग्ग्रेशंस (एफसीसी) के फैसले के खिलाफ केरल की नन की याचिका खारिज कर दी है। एफसीसी नियमों से उलट अपनी जीवनशैली के बारे में संतोषजनक जवाब नहीं देने पर नन को कांग्ग्रेशन से बाहर कर दिया गया था।
अलुवा स्थित एफसीसी ने पांच अगस्त को सिस्टर लुसी कलापुरा को निष्कासित कर दिया था। इस मामले को लेकर एफसीसी के प्रमुख अन्न जोसेफ की तरफ से इस संबंध में पत्र जारी किया गया था।
सिस्टर लुसी पर पुस्तकों और गीतों को प्रकाशित करना और उससे लाभ प्राप्त करना, कार खरीदना और ड्राइविंग करना और दुष्कर्म के आरोपित जालंधर डायोसिस के पूर्व बिशप के खिलाफ प्रदर्शन में भाग लेने समेत कई आरोप लगाए थे। सिस्टर लुसी ने इनमें से कई आरोपों को नकार दिया था।
रोमन कैथोलिक चर्च के अधीन आने वाले कांग्ग्रेशन ने कहा था कि नन को उनके कार्यों के लिए पहले ही चेतावनी दी गई थी, लेकिन उन्होंने इसके लिए आवश्यक पश्चाताप नहीं वय्क्त किया।
चर्च के सूत्रों से इस बात की जानकारी मिली है कि वेटिकन ने नन की याचिका खारिज कर दी। उन्हें अपील करने के लिए एक और मौका दिया जाएगा। अगर वह अपील भी खारिज हो जाती है तो उन्हें कांग्ग्रेशन से अलग होना पड़ेगा।