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वेतन बढोत्तरी की मांग करने वाले सांसदों को वरूण ने दिलाई गांधी, नेहरू की याद

Tue, 01 Aug 2017 11:49 PM IST
संजय मिश्र/ अमर उजाला, नई दिल्ली
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वरूण गांधी
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भाजपा सांसद वरूण गांधी ने वेतन बढोत्तरी की मांग करने वाले माननियों को राष्ट्रपिता महात्मा गांधी और देश के प्रथम प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू के नजीर की याद दिलाई है।
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सांसदों के वेतन निर्धारण के लिए लोकसभा अध्यक्ष से एक बाहरी निकाय बनाने की मांग करते हुए वरूण ने कहा है कि सांसदों का वेतन निर्धारित करने के लिए एक स्वतंत्र एवं बाहरी निकाय बनाना होगा। गरीब व्यक्तियों की आर्थिक स्थिति का हवाला देते हुए उन्होंने साथी सांसदों से आह्वान किया कि संसद की इस अवधि के लिए हमें अपने विशेषाधिकारों को छोड़ देना चाहिए।

संसद में बिना चर्चा के ही बिल पारित किए जाने के मामले पर भी गांधी ने चिंता जताई है। उनहोंने बिना चर्चा के सरकार के जरिए संसद से पारति कराए गए कराधान बिल पर भी सवाल उठाया है। वेतन बढोत्तरी की मांग करने वाले सांसदों को वरूण गांधी ने गरीब—किसान के दुर्दशा की याद दिलाई है। 
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गांधी ने सांसदों को दिलाई किसानों के दुर्दशा की यााद 
लोकसभा में शून्य काल के दौरान सांसदों के वेतन संबंधी मामला उठाते हुए गांधी ने किसानों की दुर्दशा का भी उललेख किया। उन्होंने कहा कि कुछ सप्ताह पूर्व तमिलनाडु के एक किसान ने अपने राज्य के किसानो की पीड़ा के खिलाफ अपना विरोध दर्ज कराने के लिए राष्ट्रिय राजधानी में खुद की जान लेने का प्रयास किया।

उन्‍होंने कहा कि जैसा कि हम जानते हैं कि अपनी बात मजबूती से रखने के लिए पिछले महीने इसी समूह के सदस्यों ने खुद का मूत्र पिया एवं उनके साथी किसानो जिन्होंने आत्महत्या की थी उनकी खोपड़ियो का प्रदर्शन भी किया। बावजूद उसके तमिलनाडू की विधानसभा ने 19 जुलाई को बेरहमी से असंवेदनशील अधिनियम के द्वारा अपने विधायको की तनख्वाह दोगुनी कर ली।

गांधी, नेहरू के त्याग का दिया भाजपा सांसद ने हवाला 
भाजपा एवं संघ बेशक दश की तमाम समस्याओं के लिए देश के प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू को कोसती रही है। लेकिन वेतन बढोत्तरी की मांग करने वाले सांसदों को आईना दिखाने के लिए सांसद वरूण गांधी ने महात्मा गांधी के कथनों का उल्लेख किया।

वरूण के अनुसार गांधी ने लिखा है कि, मेरी राय में सांसदों और विधायको द्वारा लिए जा रहे भत्ते उनके द्वारा राष्ट्र के लिए दी गयी सेवाओ के अनुपात में होना चाहिए।

इसके अलावा नेहरू कैबिनेट के फैसले का उल्लेख करते हुए वरूण ने कहा कि पंडित जवाहरलाल नेहरु के कैबिनेट की प्रथम बैठक में कैबिनेट के समस्त सदस्यों ने तात्कालिक समय में नागरिको की आर्थिक पीड़ा को देखते हुए 6 महीने तक तनख्वाह का लाभ न लेने का सामूहिक निर्णय लिया था।

इसके अलावा ओडिशा विधानसभा के सदस्य विश्वनाथ दास ने अपने लिए निर्धारित 45 रूपये प्रतिदिन के स्थान पर यह कहते हुए सिर्फ 25 रूपये प्रतिदिन लिए कि, उनको इससे ज्यादा की आवश्यकता नहीं है। वीआई मुनिस्वामी पिल्लई ने 1949 में किसानो की पीड़ा को मान्यता देने के लिए 5 रूपये प्रतिदिन की कटौती का प्रस्ताव विधानसभा में रखा था। जिसे तब की विधानसभा ने सर्वसम्मति से प्रस्ताव को पारित कर दिया था। 
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सांसदों का वेतन तय करने के लिए इंग्लैंड मॉडल की वकालत 

भाजपा सांसद वरुण गांधी - फोटो : amar ujala
सांसदों के जरिए बार—बार वेतन बढाने को लेकर उठने वाली मांग के निदान के लिए भाजपा सांसद ने इंग्लैंड के मॉडल को अपनाने की वकालत की है। उन्‍होंने कहा कि यूनाइटेड किंगडम की संसद, जिससे हमारी संसद का मॉडल तैयार किया गया है।

सांसदों के वेतन मामलों को लेकर वहां एक स्वतंत्र प्राधिकरण है। गैर सदस्यों को लेकर बना यह निकाय समय-समय पर सरकार को सांसदों के वेतन और पेंशन के लिए सलाह देता है। सांसदों का वेतन तय करते समय यह संस्था लाभार्थी सांसदों और जनता के हित दोनों का ख्याल रखते हुए सरकार के सामर्थ्य की भी जांच करता है। ऐसी संस्था हमारे देश में नहीं है।

उन्होंने कहा कि राजकोष से अपने स्वयं के लिए वेतन बढोत्तरी की मांग लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है। वरूण ने कहा कि पिछले एक दशक में यूनाइटेड किंगडम के १३ प्रतिशत की तुलना में हमने अपने सांसदों के वेतन 400 प्रतिशत बढ़ाये हैं। 

वेतन के मुकाबले नहीं बढा सांसदों का काम 
वरूण गांधी ने सांसदों की असंगत वेतन बढोत्तरी का मामला सामने रखते हुए कहा कि वेतन के मुकाबले सांसदों का काम नहीं बढा है। पिछले एक दशक में सांसदों के वेतन में 400 प्रतिशत की बढोत्तरी तो की है। मगर काम में रूचि घटी है। मात्र 50% बिल संसदीय समितियों से जांच के बाद पारित किए गए हैं।

बिल पारित करने की हड़बड़ी नीति के बजाय राजनीति के लिए प्राथमिकता दिखाती है। आलम यह है कि 41% बिल सदन में चर्चा के बिना ही पारित किये गये।

सांसदों के वेतन बढोत्तरी के खिलाफ नजर आए वरूण 
सांसदों के वेतन बढोत्तरी के खिलाफ आवाज बुलंद करते हुए वरूण गांधी ने कहा है कि कुछ लोग कहते हैं कि सांसदों का वेतन निजी क्षेत्र की अनुरूपता में होना चाहिए।

मगर इस तर्क को खारिज करते हुए भाजपा सांसद ने कहा कि निजी क्षेत्र में काम करते हैं वे प्राथमिक रूप से स्वयं के हित के लिए कार्यरत होते हैं। हम लोग देश सेवा के लिए कार्यरत होते हैं, यह हमारे सपनो का भारत बनाने का एक मिशन है, इन दो उद्देश्यों की तुलना करना  सार्वजनिक जीवन के प्रति प्रतिबद्धता को गलत तरीके से समझना है। 

सांसदों को नहीं करनी चाहिए खुद का वेतन बढाने की मांग 
वरूण गांधी ने कहा हे कि सांसदों को खुद से वेतन बढोत्तरी की मांग नहीं करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि सांसदों के वेतन से संबं​धित मामलों को बार-बार उठाया जाता है, यह मुझे सदन की नैतिक परिधि के बारे में चिंतित करता है पिछले एक साल में करीब 18,000 किसानों ने आत्महत्या की है। हमारा ध्यान कहाँ है?

संसद सत्र का कामकाज ही नहीं समितियां की बैठकों का भी चलन कम हुआ है। वर्ष 1952 में सदन की 123 बैठकों से 2016 में हम 75 बैठकों तक नीचे आ गये हैं। 2016 के शीतकालीन सत्र की तरह अन्य सत्रों में 16% की कमी का सामना किया गया। जोकि शर्मनाक है। 
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