बाबा जयगुरुदेव की गद्दी एवं अरबों की संपत्ति की ललक में दो खेमों में बंटे उत्तराधिकारियों में शक्ति प्रदर्शन शुरू हो गया है। इसका केंद्र काशी ही होगी। पंकज बाबा के दो दिवसीय महामानव संगम की शाकाहार-सदाचार यात्रा में भगदड़ से 25 भक्तों की मौत से जहां कोहराम मच गया है, वहीं दूसरी तरफ गुरुदेव के दूसरे उत्तराधिकारी उमाकांत तिवारी ने भी वाराणसी जिले में अपनी ताकत दिखाने का ऐलान कर दिया है। 23 अक्तूबर को आजमगढ़ रोड पर स्थित चोलापुर ब्लाक के अल्लोपुर में उनका सत्संग होगा।
अल्लोपुर गांव में जयगुरुदेव के उत्तराधिकारी उमाकांत तिवारी के 23 अक्टूबर को होने वाले सत्संग को लेकर अनुयायियों का का जमावड़ा लगना शुरू हो गया है। गांव के किसानों की लगभग 20 बीघा से अधिक जमीन आयोजन के लिए ले ली गई है। इस सत्संग में भी लाखों अनुयायियों की भीड़ होने की उम्मीद है। फिलहाल रविवार से गांव के राम जानकी मंदिर प्रांगण में उमाकांत तिवारी महाराज के शिष्यों के जुटने का सिलसिला शुरू हो गया। सुबह-शाम ‘जय गुरुदेव का कहना है, शाकाहारी रहना है’ के नारे लगने शुरू हो गए हैं। बाबा के शिष्य गोपाल दीक्षित ने इस आयोजन में 4000 लोगों के मौजूद होने का हवाला देकर उपजिलाधिकारी सदर से अनुमति लेने के लिए आवेदन किया है।
कौन हैं उमाकांत तिवारी
बाबा उमाकांत तिवारी के शिष्य श्रीगोपाल दीक्षित के अनुसार बाबा जयगुरुदेव महाराज ने अपने जीवन काल में ही 16 मई सन 2007 को बाबा उमाकांत तिवारी को अपना उत्तराधिकारी घोषित कर दिया था। बाद में पंकज यादव ने बखेड़ा खड़ा कर दिया। इससे दुखी होकर बाबा उमाकांत तिवारी जय गुरुदेव की तेरही के दिन 30 मई, 2012 को ही आश्रम छोड़कर उन्नाव चले गए थे। वहां मक्सी रोड पर अपना डेरा बसाया तथा धर्म प्रचारक बने। आज पंकज यादव की तरह बाबा उमाकांत तिवारी के भी शिष्यों की देश भर में अच्छी तादाद है।