चंदौली जिले के कटेसर गांव में जय गुरुदेव शाकाहार, सदाचार और मद्यनिषेध सत्संग के लिए देश भर से आए भक्तों के भंडारे के लिए बने भोजन को आयोजकों ने इधर-उधर उधर फेंक दिया। इसे खाने से कटेसर और डोमरी गांव के 26 मवेशियों की मौत हो गई और 19 पशुओं की हालत गंभीर है। प्रशासनिक निर्देश पर मवेशियों के शव गड्ढा खोद कर दफना दिए गए।
जय गुरुदेव समिति की ओर से 15 अक्तूबर से कटेसर में दो दिनी सत्संग का आयोजन किया गया। इसमें तीन से चार लाख भक्त पहुंचे थे। सत्संग स्थल पर भंडारे का भी आयोजन हुआ था। इस बीच 15 अक्तूबर को राजघाट पर भगदड़ में 25 लोगों की मौत हो गई और कई लोग जख्मी हो गए। इसके चलते समय से पहले ही भक्तों की रवानगी शुरू हो गई। इससे भंडारे का बड़े पैमाने पर बना भोजन बचने लगा। इने बाहर फेंक दिया गया।
डोमरी के पशुपालक मदनलाल शर्मा ने बताया कि भंडारे का फेंका गया भोजन खाने से मवेशी बीमार होने लगे और उनकी एक गाय की मौत हो गई। गांव के मुराहू यादव की एक भैंस मर गई, जबकि दूसरी बीमार है। दयाराम की एक गाय की मौत हुई, दो बीमार हैं। कटेसर के बृजमोहन की चार गाय और विष्णु नारायण यादव की दो गाय और दो भैंस मर गईं, जबकि पांच मवेशी बीमार है। चमचम यादव की तीन गाय मर गईं, दो भैंस बीमार हैं। रामचरण की भैंस मर गई, जबकि पांच पशु बीमार है। पशुपालकों ने बताया कि फेंका गया भोजन विषाक्त हो गया था। इसके खाने से पशुओं की मौत हुई है। सूचना मिलने पर प्रशासनिक अधिकारियों ने गड्ढा खोदवा कर मवेशियों को दफनाना शुरू कर दिया है।
वाराणसी के मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डा. वीबी सिंह ने बताया कि एक साथ बड़ी संख्या में पशुओं की मौत फूड प्वायजनिंग से होती है। खाना खराब होने पर लोग फेंक देते हैं। उसे खाने पर पशुओं के पेट में एसिडोसिस होता है। इससे पेट का पीएच लेवल बदल जाता है। पेट फूलने लगता है और फेफड़े पर असर पड़ता है। ऐसी स्थिति में पशुओं की मौत तक हो जाती है। इस प्रकार की समस्या होने पर पशुओं को तत्काल नींबू का पानी पिलाना चाहिए। इसके अलावा गैस्ट्रिना सीरप पशुओं को देने से राहत मिलती है।