लोकसभा में सोमवार को वंदे मातरम के 150 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में राष्ट्रीय गीत पर एक दिवसीय विशेष चर्चा आयोजित की गई। सदन के प्रारंभ में स्पीकर ओम बिरला ने वंदे मातरम को भारत की आत्मा, एकता, संस्कृति और अदम्य शक्ति का जीवंत प्रतिबिंब बताया। ओम बिरला ने कहा कि बंकिमचंद्र चट्टोपाध्याय द्वारा रचित यह गीत आज भी हर भारतीय के हृदय में गहराई से बसता है। उन्होंने कहा इसके हर शब्द में भारत की प्रकृति, मातृत्व, सौंदर्य और शक्ति की अद्वितीय एकता झलकती है।
नए भारत की पीढ़ियों तक पहुंचानी होगी इसकी प्रेरक ऊर्जा- ओम बिरला
स्पीकर ओम बिरला ने याद दिलाया कि स्वतंत्रता संग्राम के दौरान वंदे मातरम ने करोड़ों भारतीयों में आजादी का सपना जगाया और असंख्य क्रांतिकारियों ने फांसी और अत्याचारों का सामना करते हुए भी इस गीत को अपना संबल बनाया। सदन में मेज थपथपाकर सदस्यों ने इस ऐतिहासिक चर्चा का स्वागत किया। ओम बिरला ने कहा कि यह बहस सिर्फ एक औपचारिक चर्चा नहीं, बल्कि देश की सांस्कृतिक स्मृति और राष्ट्रभावना को जागृत करने का अवसर है।
उन्होंने कहा मुझे विश्वास है कि सांसदों के विचार इस चर्चा को सत्र का ऐतिहासिक अध्याय बनाएंगे और वंदे मातरम की ऊर्जा नई पीढ़ी तक और अधिक प्रभाव के साथ पहुंचेगी। सदन में नेताओं ने इस गीत की ऐतिहासिक यात्रा, स्वतंत्रता संग्राम में इसकी भूमिका और आधुनिक भारत के लिए इसके संदेश पर अपने विचार रखे।
'नेहरू और कांग्रेस के नाम का बार-बार जिक्र किया'
लोकसभा में राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम के 150 साल पूरे होने के अवसर पर चर्चा हुई। इस चर्चा के दौरान, सदन में कांग्रेस के डिप्टी लीडर गौरव गोगोई ने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री की यह आदत है कि जब भी वह किसी मुद्दे पर बोलते हैं तो भारत के पहले प्रधानमंत्री नेहरू और कांग्रेस का जिक्र करते रहते हैं। उन्होंने कहा, 'ऑपरेशन सिंदूर पर बहस के दौरान उन्होंने नेहरू का नाम 14 बार और कांग्रेस का नाम 50 बार लिया। जब संविधान की 75वीं सालगिरह पर चर्चा हुई, तो नेहरू का नाम 10 बार और कांग्रेस का नाम 26 बार लिया गया।'