रेलवे स्टेशन पर चाय बेचने वाले देश के प्रधानमंत्री बने। फिर कच्चे घर में जन्मे रामनाथ कोविंद राष्ट्रपति चुने गए और अब मुप्पवरपु वेंकैया नायडू के रूप में उपराष्ट्रपति पद को एक ऐसे व्यक्ति सुशोभित करने चल रहे हैं, जो आपके-हमारे जैसे आम परिवार से आए हैं। एक खास परिवार या उसके प्रति समर्पित किसी व्यक्ति को ही इन पदों पर देखने के आदी देश के लिए यह एक नई बयार है। इसी बहाने नए उपराष्ट्रपति के व्यक्तित्व और कृतित्व पर एक नजर...
* एक जुलाई, 1949 को आंध्र प्रदेश के नेल्लोर जिले के एक साधारण किसान परिवार में जन्म। पिता का नाम रंगैया नायडू और मां का नाम रामानम्मा था।
* बचपन में एक दिन खेलते समय पास में चल रही राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की शाखा के प्रति आकर्षित होकर उससे जुड़े और ऐसे जुड़े कि पहली कतार के राष्ट्रीय नेता बनकर उभरे।
छात्र नेता के रूप में राजनीतिक जीवन की शुरुआत
* नेल्लोर के वी आर कॉलेज में छात्र नेता के रूप में राजनीति का ककहरा सीखा और उसकी स्टूडेंट यूनियन के अध्यक्ष चुने गए।
* नायडू ने 1973-74 में आंध्र यूनिवर्सिटी से मान्यता प्राप्त कॉलेजों की यूनियन के भी अध्यक्ष का पद संभाला।
* विशाखापत्तनम में कानून की डिग्री हासिल करने के दौरान ही वे जयप्रकाश नारायण के भ्रष्टाचार विरोधी संपूर्ण क्रांति अभियान से जुड़ गए लेकिन उनकी राजनीतिक शख्सियत 1975-77 के इमरजेंसी की आग में तपकर कुंदन बनी। अंडरग्राउंड रहकर इंदिरा गांधी की सरकार के खिलाफ दक्षिण भारत में एक मजबूत आवाज बनकर उभरे। आंध्र और तमिलनाडु के शिक्षा संस्थानों में सरकार विरोधी प्रचार का पूरा जिम्मा उनके कंधों पर ही था। बाद में उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया।
* 1977-80 तक आंध्र प्रदेश जनता पार्टी के अध्यक्ष रहे। 1978 में पहली बार राज्य विधानसभा के सदस्य चुने गए। वे 1985 तक इसके सदस्य रहे।
राष्ट्रीय फलक पर चमके
* अस्सी के दशक में वे पहली बार राष्ट्रीय राजनीतिक परिदृश्य में उभरे, इंदिरा गांधी ने आंध्र प्रदेश में एन टी रामाराव की सरकार को बर्खास्त कर दिया। इसके खिलाफ रामाराव के नेतृत्व में विपक्षी आंदोलन के राष्ट्रीय प्रवक्ता के रूप में नायडू को राष्ट्रीय ख्याति मिली। बाद में भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता के रूप में अपनी चुटीली टिप्पणियों के लिए जाने गए। पार्टी के सबसे अच्छे वक्ताओं में शामिल नायडू अपने इस गुण के कारण राष्ट्रीय नेतृत्व के करीब आए।
* साल 1980 में भारतीय जनता पार्टी का गठन हुआ तो वे उसकी युवा शाखा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बनाए गए। दक्षिण भारत में पार्टी की कमजोर स्थिति के बावजूद वे अनवरत इसके लिए काम करते रहे।
मजबूत हुई बुनियाद
* चार बार राज्यसभा सदस्य रहे नायडू पहली बार 1998 में कर्नाटक से चुने गए। 1999 में वाजपेयी सरकार में ग्रामीण विकास मंत्री बने।
* साल 1993-2000 तक वे पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव रहे और 2002 में पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष चुने गए। 2014 में सत्ता में आई मोदी सरकार में वे पहले दो साल तक संसदीय कार्यमंत्री रहे। इसके बाद शहरी विकास और सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय का काम संभाला। शहरी विकास मंत्री के रूप में उन्हें स्मार्ट सिटी परियोजना के लिए याद किया जाएगा।