कांग्रेस की राष्ट्रीय अध्यक्ष सोनिया गांधी के दामाद राबर्ट वाड्रा की जिस जमीन पर बवाल मचा है। उसकी खरीदारी में एक नहीं बल्कि कई-कई खामी उजागार हुई हैं। ढींगरा आयोग को किसानों की ओर से दिए गये बयान में राजस्व रिकार्ड में भी गोलमाल का खुलासा किया गया है। सूत्रों की माने, तो पूर्व मुख्यमंत्री पर गाज गिर सकती है।
शिकोहपुर गांव के रहने वाले किसान बदलू ने अपनी जमीन लक्ष्य प्रापर्टी राजस्थान के रहने वाले लक्ष्य प्रापर्टी के मालिक को कौडियो के दाम में बेच दी थी। जिसका इंतकाल 14 फरवरी 2006 को हुआ है। ल्क्ष्य प्रापार्टी से यह जमीन पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा के करीबी माने जाने वाले व्यक्ति की ओंकारेश्वर प्रापर्टी के नाम पर खरीदी गई है।
राबर्ट वाड्रा ने वर्ष 2008 में यह जमीन स्काई लाईट हास्पिटलिटी के नाम खरीदीं। जो हुडा के मास्टर प्लान में सेक्टर-84 में आती है। टाउन एंड कंट्री प्लानिंग अधिकारी की ओर से उक्त जमीन पर लाइसेंस जारी करने के लिए पहले, तो नोटिफिकेशन कर सेक्टर की नेट प्लानिंग एरिया में जमीन छेड़छाड़ की गई है। लेकिन बाद में उसका लाइसेंस जारी कर दिया गया। तत्कालीन सरकार के इस खेल का फायदा अकेले वाड्रा की कंपनी को नहीं मिला है, बल्कि अन्य बिल्डरों को फाइल जमा करने का भी मौका मिल गया। प्रदेश सरकार ने इस जमीन का लाइसेंस दिया। जिसके बाद वाड्रा ने डीएलएफ को 58 करोड़ में यह जमीन बेच दी।