केरल के कोट्टयम में रविवार को उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने कहा कि अगर समाज में सकारात्मक खबरों और उपलब्धियों को ठीक से नहीं दिखाया गया, तो युवा 'कॉकरोच' जैसे तत्वों का अनुसरण करने लगेंगे। यह टिप्पणी उन्होंने एक व्यंग्यात्मक सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'कॉकरोच जनता पार्टी' के संदर्भ में अप्रत्यक्ष रूप से कही।
उन्होंने कहा, रचनात्मक पत्रकारिता समाज को सही दिशा देने और लोगों का भरोसा मजबूत करने के लिए जरूरी है। उपराष्ट्रपति एक मलयालम अखबार के 140 साल पूरे होने के समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। समारोह को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा, सकारात्मक घटनाओं को मीडिया में ज्यादा जगह मिलनी चाहिए, ताकि युवाओं को सही जानकारी और अच्छे रोल मॉडल मिल सकें।
उन्होंने कहा, सकारात्मक गतिविधियों को अच्छे तरीके से दिखाना चाहिए। तभी युवाओं को सही जानकारी मिलेगी। नहीं तो वे रुचि खो देंगे और 'कॉकरोच' जैसे तत्वों के पीछे चल पड़ेंगे। उपराष्ट्रपति ने यह भी कहा कि वह अभिव्यक्ति की आजादी के खिलाफ नहीं हैं। हालांकि उन्होंने इस बात पर सवाल उठाया कि कई बार ऐसे मुद्दों को ज्यादा अहमियत दी जाती है, जो लंबे समय तक प्रासंगिक भी नहीं रहते।
उन्होंने परोक्ष रूप से उस सोशल मीडिया चर्चा का जिक्र किया, जो 'कॉकरोच जनता पार्टी' नाम के व्यंग्यात्मक प्लेटफॉर्म को लेकर चल रही है, जो हाल ही में युवाओं के बीच काफी वायरल हुआ है। उन्होंने कहा, अगर कोई चीज वास्तव में अच्छी है, तो लोग उसे एक हफ्ते, 10 दिन या एक महीने बाद भी याद रखते हैं और उसकी अहमियत समझते हैं।
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उन्होंने आगे कहा कि जो चीजें अचानक बहुत बड़ी दिखती हैं, वे अक्सर टिकाऊ नहीं होतीं। इस दौरान उन्होंने यह भी कहा कि अच्छे विचार और सकारात्मक संदेश समाज के हर हिस्से तक पहुंचने चाहिए और राष्ट्र निर्माण में मदद करनी चाहिए।
यह व्यंग्यात्मक प्लेटफॉर्म हाल ही में एक विवाद के बाद सामने आया, जिसमें भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत के कथित 'कॉकरोच' और 'परजीवी' वाले बयान को लेकर चर्चा हुई थी। बाद में मुख्य न्यायाधीश ने स्पष्ट किया कि उनके बयान को गलत तरीके से पेश किया गया था और उनका इशारा फर्जी और नकली डिग्री के जरिये कानून पेशे में आने वालों की ओर था।