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फिल्मी कहानी से कम नहीं उज्मा की दर्द भरी दास्तां

Mon, 29 May 2017 11:05 AM IST
amarujala.com- written by: संजय मिश्र
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पाकिस्तान से बचकर लौंटी भारत की बेटी उज्मा की दास्तां किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं है। बचपन से मुसिबतों का पहाड झेलने वाली उज्मा के जीवन में कई अध्याय रहे हैं। दुश्मन देश के पाकिस्तानी लडके के साथ प्यार, बंदूक के नोंक पर हुई शादी, भारतीय दुतावास पहुंचने से लेकर कानूनी जंग जीतने के सफर में कई नाटकीय मोड रहे हैं। एक वक्त ऐसा भी था कि उज्मा को लगा कि वह अपने देश वापस नहीं लौट पाएगी।
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उज्मा अहमद ने जिस तारी अली को अपना दिल दिया वो ही उसकी जान लेने पर उतारू हो गया। लेकिन खैर हैं उस भगवान का जिसने उज्मा को न सिर्फ संकटों से उबारने में मदद किया। बल्कि पाकिस्तान से बचकर लौटने के बाद उज्मा को जिंदगी के मायने नजर आने लगे हैं। उज्मा के जीवन की कहानी कुछ इस कदर हो गई है कि जल्द ही कोई मुंबईया निर्देशक उसपर फिल्म बनाने की कोशिश करेगा। 

जानिए क्या है उज्मा की रियल स्टोरी
पैदा होने के वक्त मां को गंवा देने वाली उज्मा के सिर से बाप का साया भी उसके जन्म के एक साल बाद ही उठ गया। उसका लालन पालन गोद लेकर अन्य परिवार ने किया। बडा होने पर उज्मा की जब शादी हुई तो उसपर भी ट्रिपल तलाक का कहर बरपा। उसकी तीन वर्ष की बेटी होने पर पति ने उसे फोन पर ही तलाक दे दिया। बेटी थैलेसेमिया रोग से ग्रस्त है। तलाक के मामले के बाद उज्मा उदाश रहने लगी। उसके सामने जिंदगी के मायने ही नहीं रहे।
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दु:खी देख परिवार के लोगों को भी उसकी चिंता सताने लगी। परिवार ने उसे बेटी के लालन —पालन का भरोसा दिया। उज्मा के भाई ने उसको हिम्म्त दिलाया और बेटी का सारा खर्च खुद के उपर लेने का निर्णय किया। परिवार के लोगों ने भी उज्मा को अपना करियर संवारने को उत्तसाहित किया। करियर संवारने के लिए उज्मा ने मलेशिया जाने का निर्णय लिया। शायद उसे इस बात का आभास नहीं था कि मलेशिया से उसके जीवन का सबसे कठोर समय शुरू होने वाला है। 

उज्मा का मलेशिया जाना और पाकिस्तानी पर दिल आना कुछ यूं है दास्तां
मलेशिया में पढाई करने गई उज्मा अहमद को दुश्मन देश पाकिस्तान के एक लडके तारी अली में दिलचश्पी बढी। लडके ने अपने आप को कुंवारा बताते हुए उज्मा के सामने शादी की पेशकश की। लेकिन उज्मा ने अपनी असलियत तारी को बताते हुए कहा कि वह तलाकशुदा है। और थैलेसेमिया रोग से ग्रसित उसकी एक 3 साल की बेटी है। उज्मा का दिल जीतने के लिए तारी ने उज्मा को सच्चे प्यार का भरोसा दिलाते हुए कहा कि वह उसकी बेटी को न सिर्फ अपनाएगा बल्कि उसके इलाज का खर्च वहन करेगा। उसने कहा कि यह बिमारी लाईलाज नहीं है। मगर भारतीय संस्कृति से जुडी होने के वजह से उज्मा ने अपने परिवार वालों को अपने प्रेम की असलियत ब्यां की।

आम परिवार की तरह उज्मा के परिवार वालों ने भी उसे सलाह दी की तारी के मोह को छोड दे। देश में ही कोई लडका देख के शादी कर लो। लेकिन उज्मा ने तारी पर भरोसा करते हुए परिवार वालों को कहा कि वे उसे एकबार तारी के घर—परिवार को देखकर लौटने का मौंका दें। उसने परिवारवालों से पाकिस्तान जाने की अनुमति मांगी। उसके बाद शादी का निर्णय परिवार पर लेने की बात कही। खैर उज्मा की जीद के आगे परिवार के लोगों ने भी उसे पाकिस्तान जाने की अनुमति दे दी। और यहीं से शुरू होती है भारत की बेटी उज्मा के जीवन की असल परिक्षा।

उज्मा को मिला पाकिस्तान का वीजा 

उज्मा को मिला पाकिस्तान का वीजा 
घरवाले उज्मा के पाकिस्तान जाने पर इसलिए तैयार हुए की उन्हें यकिन था कि तनातनी के माहौल में उज्मा को पाक का वीजा ही नहीं मिलेगा। मगर उज्मा एक दिन वीजा लेकर पहुंची तो घरवालों के पास उसे पाक भेजने के सिवाय कोई चारा नहीं था। परिवार ने तमाम हिदायतों के साथ उज्मा को पाक रवाना किया। उज्मा ने वाघा बार्डर से दुश्मन के देश में प्रवेश किया। जहां सरहद के उस पार उज्मा का प्रेमी तारी अली उसे लेने पहुंचा था। पाक स्थित भारतीय उच्चायोग को उज्मा ने बताया कि बार्डर पर तारी उसे लेने पहुंचा था। तारी से मिलने के बाद उज्मा ने फोन कर भारत में अपने घरवालों को कुशलता का संदेश दिया। उसके बाद वह तारी के साथ आगे के सफर पर चल पडी। 

यहीं से शुरू होती है मौत के कुंए में उज्मा के सफर की शुरूआत
उज्मा ने खुद पाक को मौत का कुंआ करार देते हुए कहा है कि पाकिस्तान जाना आसान है लेकिन लौटना मुश्किल। भारतीय उच्चायोग को उज्मा ने जो अपनी दास्तां बताई है उसके अनुसार गाडी में बैठने के बाद तारी ने उज्मा को नींद की गोली खिला दी। जब उज्मा की नींद खुली तो उसके सारे अरमान धरे के धरे रह गए। जिस पाकिस्तान और प्रेमी की उसने कल्पना की थी वह कल्पना डरावनी शक्ल में बदल गई। उज्मा ने देखा की पाकिस्तान का यह इलाका मैदानी नहीं है। और अपने आप को कुंवारा करार देने वाले तारी के घर चार बीबीयां और उनसे बच्चे हैं।

बदला नजर आया तारी
उज्मा ने पाया कि जो तारी उसे मलेशिया में मिला था वह पूरी तरहा बदला हुआ है। उसके घर में जगह—जगह बंदूकें और औजार टंगे थे। खुद तारी भी कमर में बंदूक ताने रहता था। तारी की वास्तविकता जानने के बाद उज्मा ने देश लौटने का निर्णय लिया। मगर तारी ने उसे इंकार करते हुए बंदूक की नोंक पर शादी को विवश किया। काजी बुलाकर तारी और उसके परिवार वालों ने उज्मा का निकाह तारी से जबरन कराया। उसके बाद उसके साथ प्रताडना का दौर शुरू हो गया। 

तारी के लालच ने उज्मा को पहुंचाया भारतीय दूतावास

विदेश मंत्रालय सूत्रों के अनुसार उज्मा ने तारी के लालची स्वभाव को भांप कर उसके चुंगल ने निकलने का प्लान तैयार किया। उसने तारी से कहा कि इस्लामाबाद स्थित भारतीय दूतावास में उसके भैय्या—भाभी काम करते हैं। यदि वह उनके पास मिलने ले चले तो उनसे कुछ रूपए लेकर वह उसे दे देगी। तारी उज्मा के इस लालच में फंस गया। और यहीं से भारत की बेटी के बचने की राह निकल पडी। तारी अली रूपयों की लालच में उज्मा को लेकर इस्लामाबाद स्थित भारतीय दूतावास पहुंचा। यहां से उज्मा के जीवन में भारतीय दूतावास का रोल शुरू हुआ। 

उज्मा ने बताई दूतावास अधिकारियों को अपनी आपबीती
विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने अमर उजाला को बताया कि अपनी पत्रकार वार्ता में उज्मा ने जिस भैय्या—भाभी का जिक्र किया है। दरअसल वे उसके अपने भैय्या—भाभी नहीं बल्कि भारतीय दूतावास में कार्य करने वाला एक जोडा है। जिसने तारी अली को गच्चा देने के लिए उज्मा के भैय्या—भाभी का रोल अदा किया। सुषमा के अनुसार अली को भैय्या—भाभी से शगून के रूप में गिफ्ट और कैश दिलाने के नाम पर उज्मा ने उसे भारतीय दूतावास तक लाने का प्रलोभन दिया था। उसे जब लग गया था कि अली लालची है तब उसने यह नाटक रचा। 

उज्मा के दूतावास पहुंचते ही शुरू हुई भारत की बेटी को बचाने की कवायद 
भैय्या—भाभी को बुलाने के नाम पर उज्मा ने तारी को दूतावास के बाहर इंतजार करने को कहा। भारतीय नागरिक होने के नाते उज्मा को दूतावास में घुसने की अनुमति मिल गई। वहां पहुंचते ही उज्मा ने भारतीय उप उच्चायुक्त जेपी सिंह को सारी वाकया बताते हुए भैय्या—भाभी के रूप में किसी जोडे को तारी से मिलने भेजने को कहा। भैय्या—भाभी के रूप में जब दूतावास के दो अधिकारी तारी अली को व्यस्त रखने में कामयाब रहे, इतने में उज्मा ने जेपी सिंह को अपनी पूरी कहानी ब्यां करते हुए पासपोर्ट और समर्थन के अन्य कागजात उनके सामने पेश किए। उज्मा की दास्तां सुनकर भारतीय दूतावास सक्रिय हो गया। दिल्ली में विदेश मंत्री सुषमा स्वराज को फोन लगाया गया,लेकिन वह बैठकों में व्यस्त थीं इसलिए भारतीय दूतावास की उनसे बात नहीं हो सकी। जेपी सिंह ने स्वयं निर्णय लेते हुए उज्मा को भारतीय दूतावास में ही रात को ठहराने का निर्णय लिया। उज्मा ने भी रात भैय्या—भाभी के साथ गुजारने की मंशा जताई। रात को वह भैय्या—भाभी के साथ ही ठहरी और यहीं से शुरू होती है विदेश मंत्री सुषमा स्वराज के कुशलता की परिक्षा। 

सुषमा ने कैसे दिया मिशन उज्मा को अंजाम 
अगली इस्लामाबाद स्थित भारतीय दूतावास के जरिए सारी जानकारी विदेश मंत्री सुषमा स्वराज को दी गई। सुषमा ने सावधानी बरतते हुए तुंरत ही अधिकारियों को उज्मा की हकीकत और राष्ट्रीयता का प्रमाण जांचने का निर्देश दिया। आनन—फानन में उज्मा के न सिर्फ पासपोर्ट की सत्यता जांची गई बल्कि भारत में उसके परिजनों की भी तहकीकात कर ली गई। इधर विदेश मंत्री स्वराज ने मामले में व्यक्तिगत रूची लेते हुए उज्मा के भाई को सच्चाई जानने के लिए अपने घर बुलाया। उज्मा का भाई दिल्ली में सुषमा के घर आकर उनसे मिला। उज्मा की सच्चाई का पता लगाने के बाद सुषमा ने उसके भाई को बहन की पूरी व्यथा बताई। जब विदेश मंत्री पूरी तरह से संतुष्ट हो गई कि उज्मा भारतीय नागरिक है,उन्होंने इस्लामाबाद स्थित भारतीय दूतावास को निर्देश देना शुरू कर दिया। 

भारत की बेटी को बचाने कैसे खुद मैदान में डटी सुषमा 

चंद महिनों पहले हुए किडनी प्रत्यारोपण की वजह से सुषमा पर डाक्टरी पाबंदी है। बावजूद उसके भारतीय बेटी को बचाने वे तत्परता से मैदान में डट गई। जब उन्हें हर तरह से विश्वास हो गया कि उज्मा भारतीय है तो उन्होंने इस्लामाबाद स्थित भारतीय उच्चायोग को निर्देश दिया कि चाहे उज्मा को दो या तीन साल उच्चायोग परिसर में रखना पडे। मगर उसे दूतावास से बाहर किसी हाल में नहीं जाने देना है। उन्होंने उज्मा से खुद बात कर उसे साहस दिलाया कि वह भारत की बेटी है। पूरी सरकार और देश के नागरिक उसके साथ हैं। सुषमा ने उज्मा की सुरक्षा सुनिश्चित करने के साथ दूतावास अधिकारियों को कानूनी लडाई के लिए भी दिशा—निर्देश दिए।

दिन में तीन दफे करती थी दूतावास अधिकारी से बातचीत
विदेश मंत्री से निर्देश पाने के बाद अगले दिन दूतावास के अधिकारियों ने पाक के विदेश ​मंत्रालय और आंतरिक सुरक्षा विभाग से संपर्क किया। मामले में उन्हें पाक के दोनों विभागों से सकारात्मक संकेत मिले। लेकिन अंतराष्ट्रीय कोर्ट में कुलदीप जाधव का मामला चले जाने से मामले में नया मोड आ गया। इस बीच भारतीय दूतावास कर्मियों को भनक लगी की तारी अली कोर्ट में रूख करने की तैयारी कर रहा है। सुषमा ने दूतावास अधिकारियों को त्वरित निर्देश दिया कि वे अली से पहले कोर्ट में अपनी अपील दाखिल करें। उज्मा के पक्ष की ओर से 12 मई को न्यायालय में मामला दाखिल कर दिया गया। जबकि अली की ओर से मामला 13 मई को कोर्ट में आया। 

ऐसा भी वक्त था जब भारत की बेटी ने सकुशल बचने की आस छोड दी 
उज्मा मामले में ऐसा भी वक्त आया जब भारत की इस बेटी ने सकुशल देश लौटने की आस छोड दी थी। मगर उसक वक्त भी सुषमा स्वराज ने उससे बात कर उसे मनोवैज्ञनिक रूप से बल प्रदान किया। दरअसल उज्मा के दूतावास से बाहर न निकलने के बाद तारी अली हंगामा काटने लगा था। कई बार उसने अपने बंदूकधारी गूर्गे भारतीय दूतावास के सामने भेजे। और स्थानिय मीडिया में मामले को हवा देने लगा। उसने भारतीय दूतावास के खिलाफ प्राथमिकी भी दर्ज करा दी की दूतावास ने उसकी पत्नि को कैद कर रखा है। इन हालातों को देख उज्मा को लगने लगा कि वह अब बचकर भारत नहीं लौट पाएगी। उसने दूतावास के अधिकारी जेपी सिंह से कहा कि यदि मैं बाहर जाउंगी तो आप मुझे जहर की पूडीया दे दिजिएगा। मैं उसे खाकर बाहर मर जाउंगी। मगर जीते जी तारी अली सरीखे पाकिस्तानी दरिदें के साथ वापस नहीं जाएगी।

जेपी सिंह ने यह बात सुषमा स्वराज को बताई। सुषमा ने उज्मा से बात कर उसे ढाढस बंधाया। और उसका दिल बहलाने के लिए महिला कर्मियों के साथ वीजा विभाग में कुछ काम करके कामकाज में व्यस्त रहने को कहा। ताकि उसका मानसिक तनाव कम हो सके। सुषमा दिन में दो से तीन बार उज्मा और भारतीय दूतावास अधिकारियों के संपर्क में रहते हुए निर्देश देती रहीं। इधर भारत में भी सुषमा ने उज्मा के भाई को विश्वास में रखते हुए उसे सारी कार्रवाई से समय—समय पर अवगत कराया। जब मामला इस्लामाबाद उच्च न्यायालय में सुनवाई को लिए लिस्ट हुआ तो दूतावास ही उज्मा के प्रतिनिधि के रूप में कोर्ट में प्रस्तुत हुआ। जब कोर्ट ने उज्मा को प्रस्तुत करने की बात की तो सावधानी बरतते हुए उज्मा दूतावास के वाहन और उसके सुरक्षा कर्मियों के देखरेख में ही कोर्ट पहुंची। पूरी सुनवाई के बाद इस्लामाबाद हाईकोर्ट ने उज्मा को भारत भेजने का फरमान दिया। यही नहीं कोर्ट ने पाक के आतंरिक सुरक्षा विभाग को फरमान जारी किया कि उज्मा के भारत वापस जाने के लिए वह बाघा बार्डर तक उसकी सुरक्षा सुनिश्चित करे।
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सुषमा की थी पल—पल नजर 

कोर्ट के कार्यवाही के बीच भी सुषमा की उज्मा मामले में पल—पल नजर थी। वह उज्मा को जल्द से जल्द भारत की सीमा में प्रवेश कराना चाहती थी। किंतु उच्चायोग के अधिकारियों ने बताया कि कोर्ट के आदेश की प्रमाणित कॉपी दोपहर 2:30 मिनट पर मिलेगी। तब तक बाघा बार्डर का दरवाजा 3:30 बजे बंद हो जाता है। इसलिए मुश्किल होगा निकल पाना। अधिकारियों ने एक और रात उज्मा को भारतीय दूतावास में ही रखने का निर्णय लिया।

उज्मा के साथ जेपी सिंह खुद मई 24 को दूतावास की गाडी में सवार होकर सुबह 2:30 पर ही बाघा बार्डर के लिए रवाना हुए। वे उज्मा को लेकर प्रात: 7:30 बजे ही बाघा बार्डर पहुंच गए। लेकिन यहां एक और समस्या उत्पन्न हुई। सीमा पर दरवाजा सुबह 9:30 पर खुलता है। जेपी सिंह ने अपने डिप्लोमेट कार्ड का हवाला दिया। मगर पाक अधिकारियों ने कहा कि उज्मा का पासपोर्ट सामान्य है। सिंह ने समस्या की जानकारी विदेश मंत्री को दी। सुषमा ने उन्हें निर्देश दिया कि वे एक और नई समस्या नहीं चाहती हैं। इसलिए वह उज्मा को अपनी गाडी में रखकर ही बार्डर का दरवाजा खुलने का इंतजार करें। जिसके बाद दूतावास की कार दो घंटे तक सीमा पर दरवाजा खुलने का इंतजार करती रही। 

उज्मा के भारत में प्रवेश करते ही सुषमा ने ट्विट के जरिद दी देश को खुशी 
जैसे ही भारत की बेटी ने अपनी धरती पर प्रवेश किया सुषमा ने फोटो ट्विट कर देश को उज्मा के स्वदेश वापसी की जानकारी दी।  अमृतसर से दोपहर 2:30 की जहाज से उज्मा दिल्ली पहुंची। 

एयर पोर्ट से उज्मा सीधे पहुंची सुषमा के घर 
देश में वापस आने की खुशी उज्मा को इतनी थी कि अगले दिन वह सीधे विदेश मंत्री सुषमा स्वराज से मिलने उनके घर पहुंची। जब वह सुषमा से मिली तो उसने सीधे उनका पैर छूआ। सुषमा उसे उठाने की कोशिश कर ही रही थी कि उज्मा ने सुषमा को बाहों में भर लिया। इस भावविभोर करने वाले पल में उज्मा ने कहा कि वह एक गोद ली हुई बेटी है। मगर सरकार ने यह अहसास करा दिया है कि वह भारत की बेटी है। विदेश मंत्री के सफल प्रयासों का शुक्रिया अदा करते हुए उज्मा ने कहा कि मैं यहां भारत पहुंची हुं तो सुषमा मैडम के वजह से हुं। पूरे प्रकरण में उन्होंने मुझ पर नजर रखी।

उन्होंने मुझे हिन्दूस्तान की बेटी कहा, मेरे पास ब्यां करने को शब्द नहीं हैं। लेकिन उज्मा के साथ सुषमा के भावविभोर पल को देख उनके परिवार के सदस्य उनपर ताने मार रहे हैं, पूरे 5 माह के परिश्रम पर पानी फेर दिया। डाक्टरों ने सुषमा को इंफेक्सन से बचने की सलाह देते हुए विशेष माहौल में रहने को कहा है। 10 जून तक उन्हें किसी से छूने तक की मनाही है। क्योंकि कीडनी प्रत्यारोपण के बाद विशेष सावधानी बरतनी पडती है। मगर सुषमा का मानना है कि ऐसे भावनात्मक मामलों में भगवान भी रक्षा करते हैं।
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