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उत्तरकाशी टनल हादसा: ट्रेड यूनियन ने जताई नाराजगी, कहा- श्रमिकों की सुरक्षा को लेकर सरकार का रवैया संवेदनहीन

Thu, 23 Nov 2023 03:05 AM IST
यशोधन शर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

ट्रेड यूनियनों ने आगे कहा कि सुरंग के अंदर उत्पन्न होने वाली जहरीली गैसों के बारे में एक विशेषज्ञ द्वारा गंभीर चिंता जताई गई है। इसमें कहा गया है कि मजदूरों ने शिकायत की कि पहले की दुर्घटनाओं में से एक के बाद लगाए गए ह्यूम पाइप को भी सुरंग में काम पूरा होने से पहले ही हटा दिया गया था। 
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उत्तरकाशी टनल हादसा - फोटो : amar ujala
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विस्तार
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केंद्रीय ट्रेड यूनियनों ने उत्तरकाशी में सिल्कयारा सुरंग ढहने और श्रमिकों की सुरक्षा में लापरवाही को लेकर नाराजगी जाहिर की है और कहा है कि यह घटना श्रमिकों की व्यावसायिक सुरक्षा और स्वास्थ्य के प्रति सरकार के संवेदनहीन रवैये को उजागर करती है।

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ग्यारह ट्रेड यूनियनों और सेक्टोरल फेडरेशनों द्वारा जारी एक संयुक्त बयान में कहा गया है, 'केंद्रीय ट्रेड यूनियनों और सेक्टोरल फेडरेशनों/एसोसिएशनों का मंच उत्तराकाशी, उत्तराखंड में सिल्क्यारा सुरंग ढहने की जिम्मेदारी लेने में अधिकारियों की विफलता पर अपना दुख व्यक्त करता है।'

उन्होंने कहा, 'भूविज्ञानी और विशेषज्ञ यह कहते हुए आगे आए हैं कि भारत में सुरंग निर्माण में शामिल कंपनियां और एजेंसियां लागत में कटौती और अधिकतम मुनाफा कमाने के लिए सुरक्षा चिंताओं और उनके द्वारा सुझाए गए उपायों को नजरअंदाज कर देती हैं! न्यू ऑस्ट्रियाई टनलिंग विधि के सिद्धांतों, जो एक निर्माण विधि और एक डिजाइन दर्शन दोनों हैं, का भी सही अर्थों में पालन नहीं किया जाता है।
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ट्रेड यूनियनों ने आगे कहा कि सुरंग के अंदर उत्पन्न होने वाली जहरीली गैसों के बारे में एक विशेषज्ञ द्वारा गंभीर चिंता जताई गई है। इसमें कहा गया है कि मजदूरों ने शिकायत की कि पहले की दुर्घटनाओं में से एक के बाद लगाए गए ह्यूम पाइप को भी सुरंग में काम पूरा होने से पहले ही हटा दिया गया था। 



वहीं कार्यस्थलों पर दुर्घटनाएं श्रमिकों की कार्यस्थल सुरक्षा के संबंध में कानूनों की कमजोरियों को उजागर करती हैं। साथ ही जो भी मौजूदा मानदंड हैं उनमें ढिलाई और उल्लंघन हर घटना के साथ उजागर होते हैं। ताजा सिल्क्यारा सुरंग ढहने की घटना, ऐसी दुर्घटनाओं की श्रृंखला में केवल एक है।

फिलहाल, खामियों की जांच करने और बचाव अभियान में तेजी लाने की यूनियन ने मांग की। साथ ही सरकार स्वास्थ्य और सुरक्षा के बारे में आईएलओ सम्मेलनों की पुष्टि करे, जिन्हें 2022 में एक सत्र में संयुक्त राष्ट्र एजेंसी द्वारा काम पर अधिकारों के मौलिक सिद्धांतों के तहत लाया गया है।

ट्रेड यूनियनों का कहना है कि ओएसएच पर इसे वापस लिया जाना चाहिए और कानूनों के संहिताकरण पर श्रमिकों की चिंताओं को दूर करने के लिए आईएलसी को जल्द से जल्द आयोजित किया जाना चाहिए।
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