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60 साल का संयोग रहा बरकरार, जो इस सीट से जीता चुनाव उसकी बनी उत्तराखंड में सरकार

Sat, 11 Mar 2017 05:00 PM IST
amarujala.com- written by: संदीप भट्ट
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उत्तराखंड में भी मोदी लहर का असर रहा और बीजेपी ने शानदार जीत के साथ बहुमत हासिल किया। राज्य में कांग्रेस की बुरी गत हुई है।  उत्तराखंड की गंगोत्री सीट ने इस बार भी संयोग बरकरार रखा। राज्य की  81121 मतदाताओं वाली गंगोत्री विधानसभा को चमत्कारिक सीट माना जाता है। ‌
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मिथक है कि जो भी प्रत्याशी इस सीट से चुनाव लड़ता है सत्ता उसी को मिलती है। गंगोत्री सीट से गोपाल सिंह रावत ने जीत दर्ज कर संयोग बरकरार रखा। उन्हें कुल 23838 वोट मिले। उन्होंने अपने निकट प्रतिद्वंदी कांग्रेस के विजय पाल सिंह सजवाण को करारी मात दी।

सजवाण को 15342 वोट मिले। वहीं इस सीट से तीसरे स्‍थान पर निर्दलीय सूरतराम नौटियाल रहे, उन्हें कुल 9152 वोट मिले। पिछले चुनाव के संयोग इस बार भी दोहराए गए और विजयी पार्टी भाजपा को पूर्ण बहुमत मिला। 
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हर पार्टी के लिए हर बार अहम रही ये सीट

यह सीट इस लिहाज से अहम है कि उत्तराखंड बनने के पहले से पिछले विधानसभा चुनाव तक संयोग रहा है कि इस सीट (गंगोत्री) से विजेता पार्टी की ही सरकार बनती रही है। राज्य गठन के बाद यहां अभी तक हुए चुनाव में दो बार कांग्रेस और एक बार भाजपा का दबदबा रहा है।

गंगोत्री विधानसभा सीट से नौ प्रत्याशी मैदान में थे। यूकेडी ने विष्णुपाल सिंह रावत, सीपीआई ने महावीर प्रसाद भट्ट, बसपा ने विजयपाल तंगानी, राष्ट्रीय जन सहाय दल ने
राजवीर परमार ने चुनाव लड़ा।

इसके अलावा तीन निर्दलीय प्रत्याशी सूरतराम नौटियाल, पूर्व पालिकाध्यक्ष भूपेंद्र सिंह चौहान, रतन लाल वर्मा मैदान में थे। तीसे नबंर पर रहे निर्दलीय प्रत्याशी 49 साल तक
भाजपा में रहे। पार्टी से टिकट न मिलने के बाद उन्होंने निर्दलीय चुनाव लड़ने का फैसला किया और हार का मुंह देखना पड़ा। 
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राज्य के चौथे विधानसभा चुनाव तक भी जारी रहा जीत का संयोग

2000 में उत्तराखंड राज्य गठन के बाद गंगोत्री विधानसभा सीट से पहली बार कांग्रेस के टिकट पर विजयपाल सिंह सजवाण विधानसभा पहुंचे थे। 2002 में राज्य में हुए पहले चुनाव में कांग्रेस के विजयपाल सजवाण कांग्रेस से जीत कर विधानसभा में पहुंचे और कांग्रेस की सरकार बनी।

इसके बाद 2007 के चुनाव में भाजपा के गोपाल सिंह रावत विधायक बने थे, तब भाजपा की सरकार प्रदेश में आई थी। 2012 के चुनाव में विजयपाल सजवाण फिर विधायक बने और राज्य में भी कांग्रेस की सरकार बनी। 

इसके बाद 2007 में भाजपा के गोपाल सिंह रावत जीते तो सरकार बनी भाजपा की। साल 2012 में दोबारा फिर कांग्रेस के विजयपाल के जीतने पर प्रदेश में फिर कांग्रेस की सरकार बनी। अब राज्य के चौथे विधानसभा चुनाव में भी यह संयोग बरकरार रहा।
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