हत्या और बलात्कार जैसे गंभीर अपराधों के मामले में उत्तर प्रदेश देश में अव्वल है। वर्ष 2015 में यूपी में हुए ऐसे जघन्य अपराधों की संख्या दूसरे राज्यों की तुलना में कहीं ज्यादा है। इतना ही नहीं, वर्ष 2015 में दलितों के खिलाफ अत्याचार के सबसे ज्यादा 8358 मामले भी उत्तर प्रदेश में ही दर्ज किए गए हैं। नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो द्वारा जारी आंकड़ों में यह तथ्य उजागर हुए हैं। वर्ष 2014 की तुलना में वर्ष 2015 में देश भर में गंभीर अपराधों की घटनाओं में करीब 5 फीसदी की कमी आई है। लेकिन दुर्भाग्यपूर्ण रूप से आंकड़ा अब भी बेहद ज्यादा है।
आंकड़ों के मुताबिक वर्ष 2015 में यूपी में हत्या के सबसे ज्यादा 4732 मामले दर्ज किए गए। इसके बाद बिहार में 3178, महाराष्ट्र में 2509, मध्य प्रदेश में 2339, पश्चिम बंगाल में 2096 मामले दर्ज किए गए। महिलाओं के खिलाफ अपराधों के मामले में यूपी सबसे आगे रहा। यहां ऐसे 35527 मामले दर्ज किए गए। इसके बाद पश्चिम बंगाल में 33218 और महाराष्ट्र में 31126 मामले दर्ज किए गए। मध्य प्रदेश में 28165 मामले दर्ज हुए। इससे साफ है कि यूपी में महिलाओं के खिलाफ रोजाना औसतन 97 अपराध हो रहे हैं। महिलाओं के खिलाफ अपराधों में पूर्वोत्तर के राज्यों स्थिति बेहतर है। नगालैंड में 90, मिजोरम में 158, मणिपुर में सिर्फ 266 मामले सामने आए।
वहीं, पिछले साल देश भर में बलात्कार के 34,651 मामले दर्ज किए गए। राज्यों में मध्य प्रदेश और केंद्र शासित प्रदेशों में दिल्ली इस सूची में शीर्ष पर है। मध्य प्रदेश में बलात्कार के 4,391, उत्तर प्रदेश में 3,025 मामले दर्ज हुए। पंजाब में 2,164, हिमाचल प्रदेश में 733 मामले दर्ज किए गए। वहीं, केंद्र शासित प्रदेशों में बलात्कार की सर्वाधिक घटना, 2,199 मामले, दिल्ली में दर्ज किए गए।
दलितों के खिलाफ अपराध में यूपी के बाद क्रमश: राजस्थान और बिहार
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दलितों के खिलाफ अपराध में यूपी के बाद क्रमश: राजस्थान 6998 और बिहार 6438 हैं। आंकड़ों के मुताबिक देश भर में ऐसे मामलों में 4.4 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई है। 2014 में यह संख्या 47, 064 थी, जबकि पिछले वर्ष यह संख्या 45,003 रही। केंद्र शासित प्रदेशों में सबसे ज्यादा ऐसे मामले राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में 54 मामले दर्ज किए गए।
ज्यादातर मामलों में करीबियों ने किया रेप
राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) आंकड़ों के मुताबिक बलात्कार के कुल मामले में से 33,098 मामले ऐसे थे जिनमें अपराधी पीड़िता से पहले से परिचित थे। बलात्कार पीड़ितों की आयु छह वर्ष से कम से लेकर 60 साल से अधिक थी। देश भर में महिलाओं के खिलाफ 3.27 लाख अपराध सामने आए जिनमें से 1.30 लाख यौन अपराध थे। यौन अपराधों में 1.27 लाख राज्यों में और 9,445 केंद्र शासित प्रदेशों में अंजाम दिए गए। यौन अपराधों में बलात्कार, बलात्कार के प्रयास, शील भंग करने के उद्देश्य से महिलाओं पर किए गए हमले आदि शामिल हैं।
दिल्ली सबसे असुरक्षित शहर
आंकड़ों के मुताबिक दिल्ली सबसे असुरक्षित शहर है। यहां अपराध दर देश के औसत से अधिक है। महाराष्ट्र और दिल्ली ही दो ऐसी जगह हैं, जहां रेप की घटनाओं में कमी नहीं आई है। जबकि लड़कियों का पीछा करने के मामले भी महाराष्ट्र में 1399 और दिल्ली में 1124 दर्ज हुए। वहीं, देश में महिलाओं के खिलाफ अपराध 3.1 फीसदी घटे।
लखनऊ-आगरा में सबसे ज्यादा हुए अपराध
अपराध
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यूपी में ज्यादा भड़के किसान
सांप्रदायिक हिंसा की घटनाओं में तो 2014 की तुलना में 2015 में कमी आई है, लेकिन किसान के आंदोलन के दौरान हुई हिंसा की घटनाएं बढ़ी हैं। 2015 में ऐसी 2638 घटनाएं दर्ज हुईं। इस मामले में भी यूपी नंबर वन है। छात्रों की हिंसा की घटनाएं भी हुई हैं। इनमें 3600 लोगों की गिरफ्तारी हुई । जो 2014 की तुलना में दोगुनी है।
पिछले साल 8210 करोड़ रुपये कीमत के सामान चोरी
सुनने में अटपटा लगे, लेकिन वर्ष 2015 में देशभर में छोटी-बड़ी कुल 8210 करोड़ रुपये कीमत के सामन की चोरी हुई। जिसमें से महज 1350 करोड़ रुपये ही बरामद किए जा सके। वर्ष 2015 में कुल चोरी का पचास फीसदी 4533 करोड़ अकेले महाराष्ट्र से चोरी हुई। जबकि बरामदगी केवल 5 फीसदी ही हुई। वहीं दिल्ली में 719 करोड़ रुपये की चोरी हुई, लेकिन पुलिस महज 125 करोड़ ही बरामद कर पाई। नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो के मुताबिक देश में चोरी की वारदात में 2014 के मुकाबले 9.3 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है।
लखनऊ-आगरा में सबसे ज्यादा हुए अपराध
देश के 53 बड़े शहरों में होने वाले जघन्य अपराधों के आंकड़ों में एनसीआरबी ने उत्तर प्रदेश के जिन सात शहरों को शामिल किया है, उनमें लखनऊ और आगरा में सबसे अधिक अपराध हुए। प्रदेश में 2015 में लखनऊ में सबसे अधिक 118 नागरिकों की हत्याएं हुईं। 2014 में यहां 109 हत्याएं हुई थीं। वहीं 92 हत्याओं के साथ मेरठ दूसरे और 74 हत्याओं के साथ आगरा तीसरे नंबर पर रहा। देश के स्तर पर सबसे अधिक 490 हत्याएं राजधानी दिल्ली में हुईं।