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UP Elections 2022: प्रियंका गांधी की नैया पार लगाएगी कांग्रेस नेताओं की ये टोली, मध्यप्रदेश के नेताओं को भी मिली इस टीम में जगह

सार

गांधी परिवार के विश्वासपात्र नेताओं में से एक कमलनाथ का उत्तर प्रदेश से पुराना नाता है। कमलनाथ का जन्म कानपुर में हुआ था, तो उनके दादा बरेली की तहसील आंवला के निवासी बताए जाते हैं। कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष अरुण यादव उत्तर प्रदेश में जातिगत समीकरणों को साधने में कांग्रेस के पास ओबीसी नेताओं की कमी को दूर कर सकते हैं।
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प्रियंका गांधी वाड्रा। - फोटो : amar ujala
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विस्तार
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उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों के लिए कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा ने एक चुनावी टीम तैयार की है। इसमें राजस्थान, छत्तीसगढ़ के अलावा अन्य राज्यों के अनुभवी नेताओं को शामिल किया गया है। इस टीम में मध्यप्रदेश के कद्दावर नेताओं को भी जगह दी गई है। एक तरफ जहां सीएम भूपेश बघेल और अशोक गहलोत यूपी में कांग्रेस की जमीन को मजबूत करने में पहले से जुटे हुए हैं। वहीं, अब मध्यप्रदेश के पूर्व सीएम कमलनाथ, दिग्विजय सिंह समेत अन्य दिग्गज नेता भी प्रियंका के साथ कंधे से कंधा मिलाकर चलने के लिए मैदान में उतर गए हैं।

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गांधी परिवार के विश्वासपात्र नेताओं में से एक कमलनाथ का उत्तर प्रदेश से पुराना नाता है। कमलनाथ का जन्म कानपुर में हुआ था, तो उनके दादा बरेली की तहसील आंवला के निवासी बताए जाते हैं। उन्होंने कोलकाता जाने से पहले अपना मकान गांव को दान कर दिया था। जैसे जैसे चुनाव नजदीक आ रहा हैं वैसे वैसे कमलनाथ की सक्रियता भी यूपी में बढ़ती जा रही है। मंगलवार को पूर्व केंद्रीय मंत्री ने कांग्रेस के नेताओं और कार्यकर्ताओं को चुनाव में जीत के लिए एक बूथ बीस यूथ का मंत्र भी दिया। 

कार्यक्रम में उन्होंने कहा कि हमने अपनी राजनीति उत्तर प्रदेश से शुरू की थी। तब भाजपा का जन्म भी नहीं हुआ था। 1980 में भाजपा का जन्म हुआ। तब इनके पास बूथ पर एक आदमी भी नहीं था। आज उत्तर प्रदेश में कांग्रेस प्रियंका गांधी के नेतृत्व में खड़ी हो गई है। पूर्व सीएम कमलनाथ के अलावा कांग्रेस पार्टी के कद्दावर नेता और राज्यसभा सांसद दिग्विजय सिंह भी सियासी मैदान में उतरने के लिए तैयार है। सिंह लंबे समय तक उत्तर प्रदेश के पार्टी प्रभारी रहे हैं। वह प्रदेश की कई सामाजिक, शैक्षणिक संस्थाओं से भी जुड़े हुए हैं। अपने विवादित बयानों के चलते वह उत्तर प्रदेश में भी खासे चर्चा में रहते हैं। धार्मिक आधार पर मतों का ध्रुवीकरण होता है तो कांग्रेस को दिग्विजय सिंह की छवि का लाभ भी मिल सकता है।
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यादव और पटेल भी मैदान में
कांग्रेस पार्टी में फिलहाल केंद्र से लेकर प्रदेश स्तर तक ओबीसी चेहरों की कमी है। ऐसे में पूर्व केंद्रीय मंत्री और मध्य प्रदेश कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष अरुण यादव उत्तर प्रदेश में जातिगत समीकरणों को साधने में कांग्रेस के पास ओबीसी नेताओं की कमी को दूर कर सकते हैं। वे सोनिया और राहुल गांधी के करीबी माने जाते हैं। वहीं, इंदौर की देपालपुर विधानसभा सीट से विधायक रहे सत्यनारायण पटेल कांग्रेस के राष्ट्रीय सचिव हैं। उन्हें हाल ही में उत्तर प्रदेश का सह प्रभारी नियुक्त किया गया है। वर्तमान में पटेल प्रियंका गांधी के साथ लगातार उत्तर प्रदेश में सक्रिय हैं। पार्टी सूत्रों के मुताबिक उनकी यह सक्रियता चुनाव प्रचार के दौरान भी बनी रहेगी।

कांग्रेस की राजनीति को करीब से समझने वाले वरिष्ठ पत्रकार रशीद किदवई ने अमर उजाला को बताया कि जब किसी राज्य में चुनाव होता है तो दूसरे राज्य के नेता अपने दल के प्रचार के लिए वहां जाते ही हैं। उत्तर प्रदेश राज्य की सीमा मध्यप्रदेश से जुड़ी हुई है। कांग्रेस पार्टी ने मध्यप्रदेश के नेताओं के जातिगत समीकरण को ध्यान में रखते हुए उन्हें चुनाव प्रचार में लगाया है। ताकि वे पिछड़े, ओबीसी, राजपूत वोटर्स में सेंध लगा सकें। इन नेताओं के प्रचार से कांग्रेस को कितना लाभ होगा ये तो चुनाव परिणाम ही बताएंगे। 

दूसरे राज्य के नेताओं को इस काम में इसलिए लगाया जाता है कि उनके पास चुनाव में प्रचार से लेकर संगठन में काम करने का अनुभव होता है। क्योंकि कांग्रेस पार्टी का संगठन यूपी में बहुत कमजोर है। इसलिए पार्टी पड़ोसी राज्यों से कमलनाथ और दिग्विजय सिंह जैसे बड़े नेताओं को चुनाव में जिम्मेदारी दे रही है ताकि ये लोग कार्यकर्ताओं के बीच जाकर संगठन को मजबूत कर सकें जिसका फायदा चुनाव में मिल सके।

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