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उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री पद को लेकर जल्द हट सकते हैं सस्पेंस के बादल

Thu, 16 Mar 2017 02:53 PM IST
शशिधर पाठक/नई दिल्ली
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राजनाथ सिंह, अमित शाह, नरेंद्र मोदी
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उत्तराखंड के मुख्यमंत्री का नाम तय हो चुका है। पार्टी के शीर्ष नेतृत्व ने त्रिवेन्द्र रावत और प्रकाश पंत के दो नाम तय किए हैं। इनमें से किसी एक का राज्य का मुख्यमंत्री बनना तय है। 15 मार्च को देर रात त्रिवेन्द्र रावत ने भाजपा अध्यक्ष अमित शाह से भेंट की थी। वह 16 मार्च को पीएम और गृहमंत्री राजनाथ सिंह से भी मिलेंगे। सूत्र बताते हैं कि पार्टी इस बारे में कोई भी औपचारिक घोषणा उत्तर प्रदेश के सीएम के नाम पर एक राय होने के बाद करना चाहती है।
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उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री के नाम की घोषणा को लेकर असमंजस की स्थिति बरकरार है। भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने राज्य में प्रचंड बहुमत मिलने के बाद केन्द्रीय गृहमंत्री से चर्चा की थी। बुधवार 15 मार्च को प्रदेश भाजपा अध्यक्ष केशव प्रसाद मौर्य ने भी प्रधानमंत्री से मुलाकात की। मुलाकात का दौर आज भी जारी रहेगा। सूत्र बताते हैं कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और गृहमंत्री राजनाथ सिंह की भी चर्चा हुई है। बृहस्पतिवार को भाजपा के वरिष्ठ नेता और केन्द्रीय मंत्री वेंकैया नायडू, भूपेन्द्र यादव भी शीर्ष नेताओं से मिलकर आगे की दशा-दिशा पर चर्चा करेंगे। इस चर्चा के बाद ही उत्तर प्रदेश में भाजपा नेताओं के बतौर पर्यवेक्षक जाने, विधायक दल की बैठक आदि को लेकर कुछ तय हो सकेगा।

फिलवक्त पार्टी पूरे राज्य में 18 मार्च को विजय जश्न मनाने की तैयारी कर रही है। इस क्रम में 17 मार्च को केंकैया नायडू, भूपेन्द्र यादव समेत अन्य नेताओं के लखनऊ जाने का कार्यक्रम है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और भाजपा अध्यक्ष भी लखनऊ जाकर इसमें शामिल हो सकते हैं। इसके लिए राज्य में सुरक्षा के बाबत व्यापक प्रबंध किए जा रहे हैं। इसके लिए राज्य के मुख्य सचिव, गृह सचिव, प्रदेश पुलिस महानिदेशक को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए जा चुके हैं। 
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कहां फंस रहा है पेंच ?

राजनाथ सिंह, मनोज सिन्हा, केशव प्रसाद मौर्य
तीन नाम प्रमुखता से
फिलहाल राज्य में मुख्यमंत्री पद के लिए तीन नाम काफी प्रमुखता से हैं। इनमें केन्द्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह सबसे आगे हैं। इसके बाद केन्द्रीय दूर संचार मंत्री(स्वतंत्र प्रभार) मनोज सिन्हा और भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष केशव प्रसाद मौर्य का नाम शामिल है। प्रशासनिक समझ, कामकाज और सबको साधने में मनोज सिन्हा काफी निपुण हैं। वहीं केशव प्रसाद मौर्य ने भाजपा प्रदेश अध्यक्ष बनने के बाद खुद की सांगठनिक क्षमता को साबित किया है। हालांकि केशव प्रसाद के खिलाफ दर्ज मुकदमें एक फांस भी बने हैं। तीन नामों के अलावा कुछ और नाम भी रेस में शामिल हैं।

कहां फंस रहा है पेंच ?
केन्द्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह अनुभव, रानीतिक समझ, प्रशासनिक क्षमता के मामले में सभी संभावित नामों पर भारी है। उनका नाम मुख्यमंत्री पद के दावेदारों में प्रमुखता से चल रहा है, लेकिन राजनाथ सिंह केन्द्रीय राजनीति में अपनी वरिष्ठता को बनाये रखना चाहते हैं। इसलिए संघ प्रमुख मोहन भागवत की तरफ से मिलने वाले संकेत के बाद ही वह किसी निर्णायक स्थिति में होंगे।

पार्टी सूत्रों का कहना है कि 2019 में आम चुनाव होना है। 2017 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में भाजपा और उसके सहयोगी दलों को 325 सीटों का प्रचंड बहुमत मिला है। ऐसे में पार्टी अगड़ी, पिछड़ी, दलित जातियों का संतुलन बनाए रखना चाहती है। इसे केन्द्र में रखकर राज्य में मुख्यमंत्री और उप मुख्यमंत्री बनाने पर विचार चल रहा है। माना जा रहा है कि राजनाथ सिंह ऐसी किसी स्थिति में भी मुख्यमंत्री पद पर जाने से संकोच कर सकते हैं।

पहले भी राजनाथ ने किया मना

राजनाथ सिंह
पहले भी राजनाथ ने किया मना
पार्टी का शीर्ष नेतृत्व चाहता था कि उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव राजनाथ सिंह को मुख्य चेहरा घोषित करके रखा जाए। बताते हैं चुनाव प्रचार अभियान शुरू होने के पहले और बाद में उनका मंतव्य जानने की कोशिश हुई, लेकिन राजनाथ सिंह ने इसे मामने में संकोच किया था। एक वरिष्ठ केन्द्रीय मंत्री का कहना है कि संघ को तब भी राजनाथ सिंह को उत्तर प्रदेश का चेहरा घोषित करके चुनाव लडऩे में कोई आपत्ति नहीं थी। मौजूदा समय में राजनाथ सिंह की पर्दे से पीछे रहकर आलोचना करने वाला खेमा इसको काफी हवा दे रहा है।

घात-प्रतिघात भी
राजनाथ सिंह का नाम चर्चा में आने के बाद गोरखपुर से गाजियाबाद तक उनके समर्थक जितना उत्साहित हैं, उतना ही विरोधी भी सक्रिय हैं। भाजपा का एक धड़ा राजनाथ सिंह को मुख्यमंत्री बनाने की दशा में अपनी तमाम तरह की आशंकाओं को आगे बढ़ाने में जुट गया है। हालांकि इस बारे में कोई भी अंतिम निर्णय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, भाजपा अध्यक्ष अमित शाह और संघ को लेना है। माना जा रहा है कि  प्रधानमंत्री मोदी भाजपा अध्यक्ष अमित शाह, ओम माथुर सुनील बंसल समेत अन्य शीर्ष नेताओं से राय-मशिविरा करके 16 मार्च को कोई निर्णय ले सकते हैं। 

तमाम विधायक दिल्ली में
उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के तमाम विधायक अभी दिल्ली में जमे हैं। बृहस्पतिवार शाम से विधायकों के लखनऊ और देहरादून जाने की प्रक्रिया तेज होगी। त्रिवेन्द्र रावत भी दिल्ली में ही हैं और आज उनका गृहमंत्री राजनाथ सिंह से भी मिलने का कार्यक्रम है। दिल्ली विधायक जहां शीर्ष नेताओं से मिलकर विधानसभा में मिली जीत के लिए उनका आभार व्यक्त कर रहे हैं, वहीं अधिकांश अपने राज्य के मुख्यमंत्री की जानकारी लेने के लिए भी उत्सुक हैं ।
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पारखी नेता हैं राजनाथ

rajnath singh - फोटो : अमर उजाला
पारखी नेता हैं राजनाथ
राजनाथ का राजनीतिक जीवन समर्थकों और विरोधियों से भरा रहा है। उत्तर प्रदेश के शिक्षा मंत्री के तौर पर सख्त नकल विरोधी कानून के चलते वह खासा चर्चा में आए थे। इसके बाद विधानसभा का चुनाव भी हारे थे, लेकिन कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। आज भी पार्टी के भीतर उनके विरोधियों की कमी नहीं है तो दूसरे दलों के नेताओं के बीच वह ठीक-ठाक पकड़ रखते हैं। केएन गोविदाचार्य कहा करते थे कि राजनाथ सिंह भाषा, शैली, राजनीति में निपुण हैं ही, वह समय के भी अच्छे पारखी हैं।

माना जा रहा है कि समय के रुख को परख कर राजनाथ सिंह अपनी आदत के अनुरुप चल रहे हैं। करियर के इस पड़ाव पर वह कोई जोखिम नहीं मोल लेना चाहते। उन्हें पता है कि महाराष्ट्र के चुनाव नतीजे आने के बाद केन्द्रीय भूतल परिवहन मंत्री नितिन गड़करी को लेकर संघ का क्या रुख था और अंत में कौन से नतीजे सामने आए। उन्हें इसका पूरा अंदाजा है कि राजनीति कैसे चीजें शुरू होती हैं और इसका अंत विपरीत दिशा में जाकर होता है। इसलिए काफी फूंक-फूंककर कदम रख रहे हैं। यही वजह है कि बुधवार को संसद भवन परिसर में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री पद को लेकर मीडिया का सवाल आते ही उन्होंने इसे सख्त अंदाज में खारिज कर दिया।
 
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