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Dalit Card: दलित कार्ड से यूपी में कांग्रेस को कितना लाभ, भाजपा को मिल सकती है बड़ी चुनौती

अमित शर्मा
Updated Sun, 02 Oct 2022 11:25 PM IST

सार

यदि कांग्रेस का यह कार्ड सफलतापूर्वक चलता है तो इसका सीधा नुकसान भाजपा को हो सकता है जिसने मायावती की कमजोर राजनीतिक तैयारी का लाभ उठाते हुए दलित समुदाय को काफी हद तक अपने साथ जोड़ने में सफलता पाई है और इन मतदाताओं के सहारे 2014, 2017, 2019 और 2022 के चुनावों में शानदार सफलता पाई है।
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Congress appoints Brijlal Khabri as UP Congress President - फोटो : Agency (File Photo)


यदि कांग्रेस का यह कार्ड सफलतापूर्वक चलता है तो इसका सीधा नुकसान भाजपा को हो सकता है जिसने मायावती की कमजोर राजनीतिक तैयारी का लाभ उठाते हुए दलित समुदाय को काफी हद तक अपने साथ जोड़ने में सफलता पाई है और इन मतदाताओं के सहारे 2014, 2017, 2019 और 2022 के चुनावों में शानदार सफलता पाई है। यूपी के पिछले विधानसभा चुनाव में ही भाजपा ने जाटव समुदाय के 34 प्रतिशत मतदाताओं और कुल मिलाकर 47 प्रतिशत अनुसूचित जाति के मतदाताओं का वोट पाने का दावा किया था। दलित-महादलित समुदाय के मतदाताओं पर गहराती भाजपा की पकड़ के बीच क्या कांग्रेस उन्हें अपने साथ जोड़ पाएगी? 


कैसे मजबूत हुई दलितों के बीच पकड़

मोदी-शाह युग की शुरुआत के साथ ही भाजपा ने दलित और ओबीसी समुदायों को अपने साथ जोड़ने पर गहराई के साथ काम किया। उसने अनुसूचित समुदाय के आदर्श पुरुष संविधान निर्माता डॉ. भीमराव अम्बेडकर को सम्मान देने का कोई भी अवसर हाथ से जाने नहीं दिया। लेकिन भाजपा ने  दलित समुदाय को केवल प्रतीकात्मक प्रतिनिधित्व देने की बजाय उन्हें पार्टी संगठन और सरकार में भी महत्त्वपूर्ण जिम्मेदारियां दीं। पहले अनुसूचित समुदाय के रामनाथ कोविंद को राष्ट्रपति बनाकर  और अब जनजातीय समुदाय की द्रौपदी मुर्मू को देश के सर्वोच्च पद पर बिठाकर इन वर्गों के उत्थान की अपनी प्रतिबद्धता को दुहराया। इस समय भी केंद्र सरकार में अनुसूचित समुदाय से 12 मंत्री और 46 लोकसभा सांसद हैं। भाजपा के इन प्रयासों ने अनुसूचित समुदाय में उसकी पकड़ मजबूत की है। 


यूपी की योगी आदित्यनाथ सरकार में भी आठ मंत्री अनुसूचित समुदाय से हैं। भाजपा ने यूपी से पार्टी के कुल राज्यसभा सांसदों में छ: को अनुसूचित जाति से सांसद बनवाया है। अनुसूचित समुदाय में यह सन्देश गया है कि जहां आरक्षण की कोई संवैधानिक बाध्यता नहीं होती, वहां भी पार्टी ने अनुसूचित समुदाय को महत्त्व और भागीदारी दी है। यही कारण है कि उनका भरोसा भाजपा पर लगातार मजबूत हुआ है।   


किसने किया था दलितों का उत्थान: संजय निर्मल 

भाजपा अनुसूचित जाति मोर्चा के राष्ट्रीय महामंत्री और उत्तर प्रदेश प्रभारी संजय निर्मल ने अमर उजाला से कहा कि आज दलित समुदाय की आर्थिक-सामजिक स्थिति इस बात की प्रमाण है कि अब तक की सरकारों ने दलितों के उत्थान के लिए कोई काम नहीं किया। कांग्रेस ने गरीबी हटाओं का नारा जरूर दिया, लेकिन दलित समुदाय की गरीबी जहां की तहां रह गई। यूपी के दलितों ने बड़ी उम्मीद से मायावती को मुख्यमंत्री बनाया, लेकिन चार-चार बार मुख्यमंत्री बनने के बाद भी उन्होंने दलितों के विकास केलिए कोई काम नहीं किया। उलटे उन्होंने दलित आंदोलन को केवल अपने परिवार के लिए संपत्ति इकट्ठा करने का साधन बना लिया। इससे अनुसूचित जाति समुदाय में घोर निराशा रही। 


दलितों का उत्थान जरूरी क्यों?

संजय निर्मल ने दावा किया कि भाजपा का आदर्श राष्ट्र को मजबूत बनाना है। पार्टी को यह बात मालूम है कि देश के दलितों को मजबूत किए बिना देश कभी मजबूत नहीं बन सकता। यही कारण है कि उसके संगठन, सरकार, भाजपा शासित केंद्र-राज्यों के विभिन्न कार्यक्रमों और योजनाओं में दलितों का हित सबसे आगे हैं। केंद्र की पेंशन योजना, राशन योजना, उज्ज्वला योजना, आवास योजना का सबसे ज्यादा लाभ इसी वर्ग को मिल रहा है। 


उन्होंने कहा कि आज दलित समुदाय यह देख रहा है कि केंद्र सरकार उसके उत्थान के लिए लगातार मेहनत कर रही है, जबकि कांग्रेस और बसपा ने उसके नाम पर अब तक केवल खानापूर्ति करने का ही काम किया था। भाजपा नेता ने दावा किया कि यही कारण है कि अब दलितों का भरोसा भाजपा से कोई डिगा नहीं सकता और आने वाले समय में दलितों का भाजपा को समर्थन बढ़ता रहेगा। उनका मानना है कि केवल दलित समुदाय के व्यक्ति को संगठन का अध्यक्ष बना देने से कांग्रेस को दलित समुदाय का समर्थन नहीं मिलने वाला है।   
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अपनी जड़ों की ओर लौटेंगे दलित: ऋतु चौधरी 

वहीं, कांग्रेस नेता तो यही दावा कर रही हैं कि अब दलित चारों ओर से निराश हो चुके हैं। वे अब दुबारा कांग्रेस की ओर लौटेंगे क्योंकि उनके उत्थान के लिए केवल कांग्रेस ने ही उनके विकास के लिए काम किया है। दलित महिला राष्ट्रीय कांग्रेस की अध्यक्ष ऋतु चौधरी ने अमर उजाला से बातचीत में दावा किया कि वर्तमान सरकार दलितों के उत्थान का दावा तो जरूर करती है, लेकिन इसी सरकार के अन्दर दलितों के ऊपर लगातार हमले हो रहे हैं, लेकिन सरकार उन्हें रोकने की कोई कोशिश करने में नाकाम रही है।


ऋतु चौधरी ने कहा कि भाजपा यूपी में दलितों का समर्थन पाने का दावा करती है, लेकिन इसी यूपी के हाथरस और प्रयागराज में दलित बेटियों को जिंदा जला दिया जाता है तो उसके अपराधियों को सजा देने की बजाय अपराधियों को बचाने का काम किया जाता है। उन्होंने कहा कि दलित महिलाएं आज पहले से कहीं ज्यादा असुरक्षित हैं। उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने केवल बाबू जगजीवन राम को ही सम्मान देने का काम नहीं किया था, बल्कि उनकी बेटी मीरा कुमार और केआर नारायणन को पूरा सम्मान दिया।


कांग्रेस नेता ने दावा किया कि कांग्रेस ने ही आरक्षण देकर दलितों का जीवन स्तर उठाने का काम किया जबकि केंद्र सरकार समय-समय पर दलितों को उनके इस अधिकार से वंचित करने की कोशिश करती रहती है। उन्होंने दावा किया कि अब दलित अपनी जड़ों की ओर लौटेंगे और दलित-मुस्लिम-महिला के अपने आधार वोट के सहारे कांग्रेस भी उत्तर प्रदेश में मजबूत होगी।

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