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योगी आदित्यनाथ पर बनी फिल्म पर विवाद: क्यों बॉम्बे हाइकोर्ट पहुंच गया मामला, जनता से पहले जज क्यों देखेंगे?

स्पेशल डेस्क, अमर उजाला Published by: कीर्तिवर्धन मिश्र Updated Sat, 23 Aug 2025 08:37 PM IST

सार

यूपी के मुख्यमंत्री के जीवन पर बनी इस फिल्म का मामला बॉम्बे हाईकोर्ट तक पहुंच जाने के बाद कई सवाल उठने लगे हैं। मसलन- यह फिल्म है क्या, इसे कौन बना रहा है? फिल्म पर विवाद किस बात को लेकर उठा है? आखिर क्यों इसे जजों को दिखाया जाएगा? आइये जानते हैं...
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अजेय: द अनटोल्ड स्टोरी ऑफ अ योगी फिल्म पर विवाद। - फोटो : ANI
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के जीवन पर आधारित फिल्म 'अजेय: द अनटोल्ड स्टोरी ऑफ अ योगी' का मामला बॉम्बे उच्च न्यायालय पहुंच गया है। हाईकोर्ट ने कहा है कि फिल्म की रिलीज से पहले इसे जजों को दिखाया जाएगा। इसके बाद ही इस फिल्म की रिलीज से जुड़ा कोई आदेश पारित होगा। 

यूपी के मुख्यमंत्री के जीवन पर बनी इस फिल्म का मामला बॉम्बे हाईकोर्ट तक पहुंच जाने के बाद कई सवाल उठने लगे हैं। मसलन- यह फिल्म है क्या, इसे कौन बना रहा है? फिल्म पर विवाद किस बात को लेकर उठा है? आखिर क्यों इसे जजों को दिखाया जाएगा? आइये जानते हैं...
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अजेय: द अनटोल्ड स्टोरी ऑफ अ योगी फिल्म पर विवाद। - फोटो : ANI
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के जीवन पर आधारित फिल्म 'अजेय: द अनटोल्ड स्टोरी ऑफ अ योगी' का मामला बॉम्बे उच्च न्यायालय पहुंच गया है। हाईकोर्ट ने कहा है कि फिल्म की रिलीज से पहले इसे जजों को दिखाया जाएगा। इसके बाद ही इस फिल्म की रिलीज से जुड़ा कोई आदेश पारित होगा। 

यूपी के मुख्यमंत्री के जीवन पर बनी इस फिल्म का मामला बॉम्बे हाईकोर्ट तक पहुंच जाने के बाद कई सवाल उठने लगे हैं। मसलन- यह फिल्म है क्या, इसे कौन बना रहा है? फिल्म पर विवाद किस बात को लेकर उठा है? आखिर क्यों इसे जजों को दिखाया जाएगा? आइये जानते हैं...

पहले जानें- क्या सच में योगी के जीवन पर बन रही है फिल्म, कौन है निर्माता?
जिस फिल्म को योगी आदित्यनाथ के जीवन पर बनी बताया जा रहा है उसका नाम अजेय: द अनटोल्ड स्टोरी ऑफ अ योगी रखा गया है। इसकी निर्माता कंपनी सम्राट सिनेमैटिक्स इंडिया प्राइवेट लिमिटेड है। कंपनी का कहना है कि यह फिल्म शांतनु गुप्ता की योगी आदित्यनाथ के जीवनकाल पर लिखी गई जीवनी- द मॉन्क हू बिकेम चीफ मिनिस्टर: द डेविनिटिफ बायोग्राफी ऑफ योगी आदित्यनाथ पर आधारित है। इसे खुद उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री कार्यालय की तरफ से मान्यता दी गई थी। 

बॉम्बे हाईकोर्ट में इस मामले में अब तक क्या हुआ?

16 जुलाई: फिल्म की निर्माता कंपनी सम्राट सिनेमैटिक्स ने कोर्ट में दायर याचिका में सेंसर बोर्ड की तरफ से फिल्म के टीजर, ट्रेलर, इसके प्रमोशनल गाने और पूरी फिल्म में देरी को बेवजह और अस्पष्ट करार दिया है। इस मामले में जस्टिस रवति मोहिते-डेरे और नीला के. गोखले की बेंच ने 16 जुलाई को सुनवाई में मौखिक टिप्पणी में कहा था कि सीबीएफसी कानून के तहत निश्चित समय में फिल्म का प्रमाणन करे।

इसके अगले ही दिन सीबीएफसी ने हाईकोर्ट में आवेदन देकर कहा था कि फिल्म पर फैसला अगले दो दिन में लिया जाएगा। इसके बाद कोर्ट ने निर्माताओं की रिट याचिका पर सुनवाई को खत्म कर दिया। फिल्म की रिलीज की तारीख भी 1 अगस्त तय हो गई थी। 

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21 जुलाई: सीबीएफसी ने निर्माताओं के फिल्म प्रमाणन के आवेदन को रद्द करने की जानकारी दी। इसके चलते निर्माता एक बार फिर बॉम्बे हाईकोर्ट पहुंचे। 

1 अगस्त: हाईकोर्ट ने कहा कि सीबीएफसी ने 21 जुलाई का अपना फैसला बिना फिल्म देखे ही दे दिया। कोर्ट ने पाया कि सीबीएफसी ने यह निर्णय इसलिए ले लिया क्योंकि यह एक संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति (उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री) पर आधारित है और क्योंकि यूपी के सूचना एवं जनसंपर्क विभाग ने इस पर आपत्ति जताई है। इस पर सीबीएफसी ने कोर्ट से कहा कि वह फिल्म देखने के बाद इसके प्रमाणन पर फैसला करेगा। 

6 अगस्त: सीबीएफसी ने अपने आदेश में कहा कि वह फिल्म का प्रमाणन नहीं करेगा, क्योंकि फिल्म प्रमाणन और सार्वजनिक चित्रण के लिए तय दिशा-निर्देशों का उल्लंघन करती है। सीबीएफसी के मुताबिक, फिल्म ने समाज के प्रति जिम्मेदारी और संवेदनशीलता बनाए रखने के नियमों का उल्लंघन किया है। बोर्ड ने आरोप लगाया कि फिल्म के दृश्य और शब्द नस्लीय, धार्मिक और अन्य समूहों के लिए अवमानना वाले हैं और यह कुछ लोगों और लोगों के समूह की मानहानि करते हैं।

फिल्म निर्माताओं ने इसके बाद कहा कि वह प्रमाणन बोर्ड की रिवाइजिंग कमेटी में आवेदन करेंगे। हाईकोर्ट ने कहा कि अगर सीबीएफसी फिल्म की किसी सामग्री या डायलॉग को आपत्तिजनक पाता है तो वह याचिकाकर्ताओं को इसकी जानकारी दे। निर्माताओं को भी आदेश दिया गया कि वे फिल्म के किसी हिस्से को हटाना चाहते हैं या इसमें संशोधन करना चाहते हैं तो इसके बारे में बोर्ड को बताएं।

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इसके बाद केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड ने 29 आपत्तियां उठाईं, लेकिन इनमें से आठ को वापस ले लिया। बोर्ड ने फिल्म के शीर्षक को भी भड़काऊ बताया और कुछ डायलॉग्स पर सवाल उठाए। 

17 अगस्त: सीबीएफसी के रिवाइजिंग पैनल ने निर्माताओं के आवेदन को खारिज कर दिया।

21 अगस्त: गुरुवार को सीबीएफसी ने हाईकोर्ट में कहा कि फिल्म निर्माताओं की याचिका पर सुनवाई नहीं हो सकती। बोर्ड ने कहा कि निर्माता रिवाइजिंग कमेटी के आदेश को भी सिनेमैटोग्राफ एक्ट के तहत चुनौती दे सकते हैं। 

निर्माताओं ने अपनी दलील में कहा कि रिवाइजिंग कमेटी का आदेश निर्माता के मौलिक अधिकारों का हनन है और सीबीएफसी ने मनमाने तरीके से फिल्म को रिलीज करने से पहले एक निजी व्यक्ति (सीएम आदित्यनाथ) की तरफ से अनापत्ति पत्र (एनओसी) दिए जाने की मांग रख दी। निर्माताओं ने कहा कि बोर्ड निजी लोगों के मौलिक अधिकारों का रखवाला नहीं है।

इस पर कोर्ट ने कहा कि निर्माता सीबीएफसी के फैसले के खिलाफ अपील दायर कर सकते हैं, लेकिन पहले यह देखना होगा कि निर्माताओं की मौजूदा रिट याचिका पर सुनवाई जारी रह सकती है या नहीं। कोर्ट ने सीबीएफसी को फटकार लगाते हुए कहा कि वह प्राकृतिक न्याय के सिद्धांत का पालन करने में असफल रही है। 

इसके बाद जजों ने कहा कि वह निर्माताओं की याचिका पर कोई आदेश जारी करने से पहले खुद फिल्म देखेंगे और रिवाइजिंग कमेटी के आदेश के खिलाफ आपत्तियों पर गौर करेंगे।

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