गोवा के पूर्व मुख्यमंत्री मनोहर परिकर के निधन के बाद कयास लगाए जा रहे थे कि उनके सबसे बड़े बेटे उत्पल परिकर जल्द ही राजनीति के मैदान में उतर सकते हैं। हालांकि, उत्पल ने शुक्रवार को स्पष्ट किया कि अभी वह चुनाव लड़ने के बारे में नहीं सोच रहे हैं। बता दें कि भाजपा में यह चर्चा चल रही है कि उत्पल को अपने पिता की राजनीतिक विरासत को संभालना चाहिए।
बता दें कि पूर्व रक्षा मंत्री मनोहर परिकर की पैनक्रियाटिक कैंसर के चलते 17 मार्च को मृत्यु हो गई थी। पिछले साल फरवरी में परिकर को एडवांस स्तर का कैंसर होने की पुष्टि हुई थी जिसके बाद गोवा, मुंबई, नई दिल्ली और अमेरिका के अस्पताल में उनका इलाज चला था।
मीडिया से अपनी पहली बातचीत में उत्पल ने कहा कि पिछले कई दिन शोक और पीड़ा में गुजरे हैं जिस कारण वह अपने राजनीतिक भविष्य के बारे में नहीं सोच पाए हैं। उन्होंने कहा, 'दरअसल, मैं अभी दुख से उबर रहा हूं। मैंने इस बारे में अभी कुछ नहीं सोचा है। जब समय आएगा मैं इसके बारे में निर्णय लूंगा। अभी मैंने इस बारे में कुछ नहीं सोचा, मुझे इस ओर सोचना पड़ेगा।'
इससे पहले भाजपा की राज्य इकाई के अध्यक्ष विनय तेंदुलकर ने कहा था कि उत्पल पार्टी से जुड़ें इसके लिए भाजपा उनसे संपर्क कर चुकी है। तेंदुलकर ने कहा था, 'परिकर की मृत्यु के बाद उनके दोनों बेटों से मिलने पहुंचे भाजपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष अविनाश राय खन्ना ने भाजपा से जुड़ने का अनुरोध किया है।'
बता दें कि मनोहर परिकर की मौत के बाद खाली हुई पणजी विधानसभा सीट के चुनाव लोकसभा चुनावों के साथ नहीं होंगे। गुरुवार को जारी अधिसूचना में इसका कोई जिक्र नहीं है। इससे राजनीति में उतरने का निर्णय लेने के लिए उत्पल को समय मिलेगा।