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गुलाम अली के कार्यक्रम से पहले वाराणसी में तेज हुआ विरोध प्रदर्शन

Fri, 22 Apr 2016 03:27 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, वाराणसी

सार

  • शिवसेना ने किया विरोध प्रदर्शन
  • सुरों से पिघलेगी भारत-पाक रिश्तों पर जमी बर्फ
  • पाकिस्तानी गायक के नाम होगी संकट मोचन संगीत समारोह की पहली रात
  • भारत-पाक के सांस्कृतिक रिश्तों में फूटेंगी प्यार की नई कोपलें
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गुलाम अली
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विस्तार
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भारत-पाकिस्तान के रिश्तों में कड़वाहट के बीच गीतों-गजलों के जरिए प्यार के नए पैगाम की सौगात लेकर वाराणसी पहुंच रहे गुलाम अली का पहले ही विरोध शुरू हो गया है। शुक्रवार को शिवसेना ने शहर में कई जगहों पर विरोध प्रदर्शन किया। इसके अलावा शहर में पोस्टर भी चिपकाए गए। यह विरोध प्रदर्शन गुलाम अली के संकट मोचन संगीत समारोह कार्यक्रम में शिरकत करने पहुंचने की पुष्टि होने के बाद शुरू हुआ।
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गुलाम अली ने गुरुवार की दोपहर बनारस आने के न्यौते को अपनी स्वीकृति दे दी। इस बीत यह भी अटकलें लगाई जा रही हैं कि उनके साथ भारत में पाकिस्तान के उच्चायुक्त अब्दुल बासित भी समारोह में शिरकत करने पहुंच सकते हैं। गुरुवार की दोपहर एक बजे उस्ताद ने संकट मोचन मंदिर के महंत विश्वंभरनाथ मिश्र को फोन कर संगीत समारोह में हाजिरी लगाने की जैसे ही स्वीकृति दी, इसके तत्काल बाद तुलसी घाट पर इस खुशखबरी को साझा किया गया। महंत प्रो. विश्वंभर नाथ ने कहा कि सुर ही दिलों को जोड़ सकता है। संगीत के लिए न कोई सरहद होती है न कोई मजहबी दीवार।

संकट मोचन के दरबार में उस्ताद के हाजिरी लगाने से दिलों की दूरियां ही नहीं घटेंगी, आपसी सद्भाव भी बढ़ेगा। बता दें कि दो दिन पहले दिल्ली के अशोक होटल में एक शादी समारोह के दौरान गुलाम अली से महंत प्रो. विश्वंभर नाथ की मुलाकात हुई थी। महंत ने बताया कि 26 की शाम डॉ. विश्वनाथ के गायन से संगीत समारोह का आगाज होगा। इसके बाद गुलाम अली मंच संभालेंगे।
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गुलाम अली को लेकर फिर विरोध के स्वर

गुलाम अली
उस्ताद गुलाम अली बीते साल अपनी चर्चित गजल-हंगामा है क्यों बरपा, थोड़ी सी जो पी ली है... को संकट मोचन के दरबार में सुरों से सजाया था। इसे लेकर वह विवादों में भी घिरे। हिंदूवादी संगठनों ने उनका कड़ा विरोध किया था। अब एकबारगी फिर उनके आगमन की सूचना से कुछ हिंदूवादी संगठनों के बीच विरोध के स्वर उठने लगे हैं।

गुर्जर छात्र सहायक समिति के अध्यक्ष अनिल शास्त्री ने गुरुवार को कहा कि संकट मोचन मंदिर हिंदुओं की अगाध आस्था का केंद्र है। वहां गुलाम अली और अब्दुल बासित का क्या काम है। महंत जी को ऐसे लोगों से दूरी रखनी चाहिए। इनके अलावा हिंदू युवा वाहिनी के कार्यकर्ताओं ने भी गुलाम अली के बनारस दौरे पर विष वमन शुरू कर दिया है।

विरोध के उठते स्वरों को लेकर महंत से जब सवाल पूछा गया तब उनका कहना था कि गुलाम अली ने बीते साल सूफी गजल गाई थी। उसका अर्थ ही लोग नहीं लगा सके थे और शोर मचाने लगे। अब अगर किसी को गुलाम अली के संकट मोचन संगीत समारोह में आने पर एतराज है तो मैं कुछ नहीं कह सकता।

तुलसी घाट को अपना घर मानते हैं गुलाम अली
सनातनी आस्था के लिए जग विख्यात संकट मोचन मंदिर में उस्ताद गुलाम अली की यह दूसरी हाजिरी होगी। गुजरे वर्ष जब उस्ताद पहली बार आए थे तब उनकी शान में कोई कमी न रह जाए, इसका आयोजकों ने खास ख्याल रखा था। तब उस्ताद के ठहरने की व्यवस्था शहर के एक पांच सितारा होटल में की गई थी, लेकिन एयरपोर्ट से होटल पहुंचने के बाद उन्होंने वहां रहने से इनकार कर दिया था।

गुलाम अली का कहना था कि वे होटल में नहीं, बल्कि अपने घर (महंत के घर में) में रहना पसंद करेंगे। यह बात जब संकट मोचन के महंत प्रो. विश्वंभर नाथ मिश्र को बताई गई, तब उन्होंने तत्काल उस्ताद को घर बुलवा लिया था।
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