एम्स में न्यूरोसर्जरी के प्रोफेसर डॉ, पी शरत चंद्र ने ब्लैक फंगस को लेकर बात की। बता दें कि कोविड-19 महामारी की दूसरी लहर के बीच देश में ब्लैक फंगस का खतरा भी गहरा रहा है। कई राज्य इसे महामारी घोषित कर चुके हैं। डॉ. चंद्रा ने बताया कि इसके लक्षण क्या हैं, किन्हें इससे ज्यादा खतरा है और इसके इलाज के लिए क्या दवा दी जा सकती है।
डॉ. पी शरत चंद्र ने कहा कि कोरोना वायरस के मरीजों को सिलिंडर से सीधे ठंडा ऑक्सीजन देना बहुत खतरनाक है। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि दो से तीन सप्ताह के लिए एक ही मास्क का इस्तेमाल करने से भी काली कवक या ब्लैक फंगस (म्यूकरमाइकोसिस) संक्रमण का खतरा उत्पन्न हो सकता है।
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उन्होंने कहा कि ब्लैक फंगस के मामले कम करने के लिए ऐसे मरीजों को एंटी-फंगल दवा पोसाकोनाजोल दी जा सकती है, जिन्हें अधिक खतरा है। फंगल संक्रमण नए नहीं हैं, लेकिन ये महामारी के अनुपात में कभी नहीं हुए। हम सटीक कारण नहीं जानते कि यह महामारी के अनुपात में क्यों पहुंच रहा है।
डॉ. चंद्र ने कहा कि इसके सबसे बड़े महत्वपूर्ण कारण अनियंत्रित मधुमेह और टोसिलिजुमैब के साथ स्टेरॉयड का इस्तेमाल है। वेंटीलेटर पर मौजूद ऑक्सीजन पर निर्भर मरीजों को अधिक खतरा है। अगर कोरोना से ठीक होने के छह सप्ताह तक ऐसे लक्षण हैं तो उन्हें ब्लैक फंगस का सबसे ज्यादा खतरा है।