भारतीय लोकतंत्र की महत्वपूर्ण धरोहर में शामिल संसद भवन के विभिन्न कक्षों, दीवारों और अन्य निर्माण को वाष्प तकनीक, तरल अमोनिया एवं प्राकृतिक पद्धति के उपयोग से उसके मूल रूप में बहाल किया गया है। संसद भवन के संरक्षण की पहल 2014 में शुरू की गई थी।
संसद भवन के संरक्षण की शैली अनूठी है जिसका उपयोग गिने-चुने कैथोलिक रोमन चर्च के संरक्षण में ही किया गया है। दरअसल 2014 में उसकी बाहरी दीवारों पर लगे पत्थरों पर प्रदूषण और धूप का प्रभाव स्पष्ट रूप से देखा जा रहा था। इसके तहत इस ऐतिहासिक इमारत के पत्थरों एवं उस पर बनी कलाकृतियों को क्षति पहुंचाए बिना पुराने स्वरूप में बरकरार रखने पर जोर दिया गया।
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इनमें स्वागत कक्ष, संसद भवन के आंगन से लगे इलाके, केंद्रीय कक्ष, प्रथम तल, लोकसभा चैम्बर शामिल हैं। लोकसभा सचिवालय के सूत्रों ने बताया कि मंगलवार सुबह लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन ने संसद भवन के संरक्षण कार्य का अवलोकन किया और इस कार्य से जुड़े केंद्रीय लोक निर्माण विभाग (सीपीडब्ल्यूडी) के इंजीनियरों एवं कर्मचारियों के कार्य की सराहना की।