अमेरिका में स्कूलों पर होने वाली गोलीबारी के बीच ओरेगन के एक स्कूल में ऐसा मामला सामने आया, जहां एक पिता ने अपनी बेटियों के स्कूल में घुसे बंदूकधारी किशोर का सामना किया। इस हमले में तीन छात्रों और एक शिक्षक की मौत हो गई। घटना के दौरान पिता ने अपनी बंदूक से हमलावर पर गोली चलाई। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी शुक्रवार को पिता के इस कदम की तारीफ की।
अमेरिका के ओरेगन राज्य के बेंड शहर स्थित सिल्वर रेल एलीमेंट्री स्कूल में गोलीबारी के दौरान 36 वर्षीय केलुब जियामैंको ने हस्तक्षेप किया। वह पेशे से बढ़ई हैं और दो बेटियों के पिता हैं। उनकी मां केंडा फ्रीमैन ने बताया कि गोलीबारी शुरू होने के बाद उनके बेटे ने हमलावर का सामना किया। पुलिस प्रमुख माइक क्रांट्ज के मुताबिक, जियामैंको की .40-कैलिबर पिस्तौल कानूनी रूप से उनके वाहन में रखी थी। वह स्कूल के अंदर गए, गोलियों की आवाज सुनी और एक शिक्षक को हमलावर से जूझते देखा। इसके बाद उन्होंने अपनी बंदूक से गोली चलाई।
ट्रंप ने पिता के कदम पर क्या कहा?
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने व्हाइट हाउस में पत्रकारों से बातचीत के दौरान जियामैंको की तारीफ की। उन्होंने कहा, “यह एक भयानक घटना है, लेकिन शुक्र है कि वहां एक ऐसा व्यक्ति था, जिसके पास बंदूक थी और वह उसका इस्तेमाल करना जानता था।” हमले में तीन छात्रों और एक शिक्षक की मौत हुई। ऐसी घटनाओं में किसी आम नागरिक का हथियार लेकर हमलावर का सामना करना अमेरिका में दुर्लभ माना जाता है। हालांकि, इस घटना ने फिर बहस छेड़ दी है कि पुलिस के पहुंचने से पहले आम नागरिक की भूमिका कितनी अहम हो सकती है।
क्या आम नागरिकों के हस्तक्षेप से हमले रुक जाते हैं?
2000 से 2025 के बीच अमेरिका में हमलों की 634 घटनाओं का अध्ययन किया गया। इसमें बंदूक, धारदार हथियार या वाहनों का इस्तेमाल करने वाले हमले शामिल थे। इनमें से 374 घटनाएं पुलिस के पहुंचने से पहले ही खत्म हो गईं। 29 मामलों में हथियारबंद आम नागरिकों ने हमलावर को गोली मारकर रोका। वहीं, 31 घटनाओं में नागरिकों ने दूसरे तरीकों से हमलावर को काबू किया, जैसे उसे जमीन पर गिराना या उसका हथियार छीनना। अध्ययन केंद्र के प्रवक्ता जेम्स कीथ के मुताबिक, ऐसे लोग समझते हैं कि पुलिस के पहुंचने से पहले हमले को रोकने का एकमात्र रास्ता शायद वही हों।
अमेरिका में हथियार रखने के पक्ष में क्या तर्क दिए जाते हैं?
अमेरिका में बंदूक रखने के अधिकार का समर्थन करने वाले लोग अक्सर कहते हैं कि हथियार रखने वाला जिम्मेदार नागरिक हमले के दौरान अपनी और दूसरों की रक्षा कर सकता है। कुछ मामलों में हस्तक्षेप करने वाले व्यक्ति को पुलिस या सेना में काम करने का अनुभव होता है, जबकि कई बार आम लोग भी अचानक पैदा हुए खतरे के बीच फैसला लेते हैं। कुछ राज्यों में सार्वजनिक जगहों पर हथियारबंद नागरिकों की भूमिका बढ़ाने की कोशिश की गई है। टेक्सास ने 2013 में स्कूल मार्शल कार्यक्रम शुरू किया था, जिसके तहत प्रशिक्षित शिक्षकों और कर्मचारियों को स्कूल परिसर में छिपाकर बंदूक रखने की अनुमति दी गई। 2018 में ह्यूस्टन के पास एक हाईस्कूल और 2022 में उवाल्डे के रॉब एलीमेंट्री स्कूल में गोलीबारी के बाद सुरक्षा कार्यक्रमों और सशस्त्र सुरक्षा कर्मियों से जुड़ी व्यवस्थाओं का विस्तार किया गया। गिफर्ड्स लॉ सेंटर के अनुसार, टेक्सास में बंदूक नियंत्रण कानून अपेक्षाकृत कम सख्त हैं, जबकि ओरेगन में नियम ज्यादा सख्त हैं।
पहले भी कब आम नागरिकों ने बंदूकधारियों का सामना किया?
अमेरिका में ऐसे कई मामले सामने आए हैं, जिनमें आम नागरिकों ने हमलावरों को रोकने की कोशिश की। इनमें तीन प्रमुख घटनाएं शामिल हैं।
- ट्विन फॉल्स, इडाहो: तीन अगस्त को इन-एन-आउट बर्गर रेस्तरां में गोलीबारी में तीन लोगों की मौत हुई और सात घायल हुए। वहां मौजूद एक ड्यूटी से बाहर पुलिस अधिकारी और हथियारबंद नागरिक जॉर्डन सलीनास ने हमलावर का सामना किया। जवाबी गोलीबारी के बाद हमलावर पीछे हट गया और अंततः उसने खुदकुशी कर ली।
- व्हाइट सेटलमेंट, टेक्सास: दिसंबर 2019 में वेस्ट फ्रीवे चर्च ऑफ क्राइस्ट में रविवार की प्रार्थना के दौरान एक व्यक्ति ने शॉटगन से दो लोगों की हत्या कर दी। इसके बाद 71 वर्षीय जैक विल्सन ने उसे गोली मार दी। विल्सन हथियार चलाने के प्रशिक्षक और रिजर्व शेरिफ डिप्टी रह चुके थे।
- सदरलैंड स्प्रिंग्स, टेक्सास: 2017 में एक चर्च में गोलीबारी में 26 लोगों की मौत हुई। पूर्व नेशनल राइफल एसोसिएशन प्रशिक्षक स्टीफन विलफोर्ड अपनी राइफल लेकर हमलावर के सामने पहुंचे और उसे घायल कर दिया। इसके बाद उन्होंने एक गुजर रहे वाहन चालक के साथ उसका पीछा किया। आखिरकार हमलावर ने खुदकुशी कर ली।