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Spy Balloon: चीनी गुब्बारे के मामले में US ने भारत से की बात, कहा- हवाई क्षेत्र में सेंधमारी चिंता का विषय

Mon, 10 Apr 2023 10:37 PM IST
जलज मिश्रा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

अमेरिकी अधिकारी ने बताया कि दक्षिण कैरोलिना के समुद्री तट से गुब्बारे को गिराने के लिए लड़ाकू विमानों का इस्तेमाल किया गया था। जिसके बाद चीन की एक निर्धारित यात्रा रद्द कर दी गई थी। बता दें, एक साल पहले अंडमान और निकोबार द्वीप समूह में भी कुछ अज्ञात चीज के उड़ने की उड़ने की खबर आई थी।
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चाइनीज गुब्बारा - फोटो : Social Media
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विस्तार
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अमेरिका सेना ने फरवरी में चीनी गुब्बारे को मार गिराया था। इसके बाद सोमवार को अमेरिका के एक वरिष्ठ अधिकारी ने भारत सहित अन्य देशों के साथ मामले को साझा करते हुए जानकारी दी। अमेरिकी प्रशांत वायु सेना के कमांडर जनरल केनेथ एस विल्सबैक ने कहा कि अमेरिका ने क्षेत्र के अधिकांश वायु सेना प्रमुखों के साथ बात की है। विल्सबैक ने कहा कि फरवरी में हमने चाइना के बड़े गुब्बारे को मार गिराया था। गुब्बारा पूरे अमेरिका में प्रमुख सैन्य स्थलों की जासूसी कर रहा था।

भारतीय भूमि में भी दिखा था संदिग्ध गुब्बारा

अधिकारी ने बताया कि दक्षिण कैरोलिना के समुद्री तट से गुब्बारे को गिराने के लिए लड़ाकू विमानों का इस्तेमाल किया गया। जिसके बाद चीन की एक निर्धारित यात्रा रद्द कर दी गई थी। बता दें, एक साल पहले अंडमान और निकोबार द्वीप समूह में भी कुछ अज्ञात चीज के उड़ने की उड़ने की खबर आई थी। हालांकि, विल्सबैक ने गुब्बारे के टुकड़ों से मिली जानकारी को साझा करने के लिए मना कर दिया। अमेरिकी सैन्य अधिकारी एक हवाई मेगा अभ्यास के कारण भारत में ही हैं। उन्होंने कहा कि देशों के हवाई क्षेत्र की संप्रभुता की रक्षा करना महत्वपूर्ण है।

हवाई क्षेत्र देश की संप्रभुता

भारत का हवाई क्षेत्र पर भारत के संप्रभुता का क्षेत्र, यहां कौन उड़ान भरे यह आपको तय करना होगा। विल्सबैक ने चीन पर निशाना साधते हुए कहा कि ऐसे भी कई देश हैं, जो संप्रभुता का खंडन करते हैं, उन्हें सिर्फ उड़ान भरने से मतलब है, फिर चाहे वह भारतीय वायु क्षेत्र हो, अमेरिकी हो या कनाडाई। बता दें, जिस चीनी गुब्बारे को अमेरिका ने गिराया, वह कनाडा के रास्ते से ही घुसा था। अधिकारी ने कहा कि किसी देश के हवाई क्षेत्रों का उल्लंघन अंतरराष्ट्रीय कानूनों का उल्लंघन है। यह एक वैश्विक चिंता का भविष्य है।

दोनों देशों के प्रमुख सैन्य हस्ताक्षर

अमेरिका और भारत ने पिछले कुछ सालों में प्रमुख रक्षा और सुरक्षा समझौते किए हैं। इसमें 2016 में किया गया लॉजिस्टिक्स एक्सचेंज मेमोरेंडम ऑफ एग्रीमेंट भी शामिल है। इसके तहत एक-दूसरे की सेनाओं की आपूर्ति और मरम्मत के लिए एक-दूसरे के ठिकानों का इस्तेमाल करना शामिल है। 2018 में संचार संगतता और सुरक्षा समझौते पर भी दोनों देशों ने हस्ताक्षर किए हैं, जो अमेरिका से भारत को उच्च तकनीक की बिक्री प्रदान करता है। अक्टूबर 2020 में भारत और अमेरिका ने द्विपक्षीय रक्षा संबंधों को और बढ़ावा देने के लिए भी मुहर लगाई थी।

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भारत में हो रहा है युद्धाभ्यास
अमेरिका भारत में युद्ध अभ्यास कर रहा है। क्षेत्रीय सुरक्षा और चीन की बढ़ती सैन्य ताकत के बीच पहली बार अमेरिकी वायु सेना ने के-दो बी का इस्तेमाल किया। के दो बी एक एक भारी बमवर्षक विमान है। कलाईकुंडा से शुरू हुए युद्धाभ्यास कोप इंडिया में अमेरिकी F-15E फाइटर जेट्स, C-130 और C-17 ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट का बेड़ा भी शामिल होगा। आकाश में सेंधमारी को लेकर उन्होंने कहा कि अमेरिका और भारत की वायु सेनाएं इस पर कड़ी नजर रख रही हैं। जनरल विल्सबैक ने रक्षा सचिव गिरिधर अरमाने से भी मुलाकात की। वायु सेना स्टेशनों अर्जन सिंह (पानागढ़), कलाईकुंडा और आगरा में युद्धाभ्यास किया जा रहा है।
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