अल-कायदा का खूंखार आतंकी ओसामा बिन लादेन मरने से कुछ महीने पहले आतंकी समूह ईस्लामिक स्टेट के उतावलेपन के साथ अलकायदा के घटते और इस्लामिक स्टेट के बढ़ते कद को लेकर काफी चिंतित था। उसे इस बात का डर सता रहा था कि कहीं इस्लामिक स्टेट, अलकायदा से आगे न निकल जाए।
इस बात का जिक्र सीआईए द्वारा जारी बिन लादेन की मौत से जुड़े आखिरी दस्तावेजों में किया गया है। ये दस्तावेज उस सीक्रेट ऑपरेशन से जुड़े हुए हैं जिसके तहत वर्ष 2011 में अमेरिका के नेवी सील कमांडो द्वारा पाकिस्तान के एबटाबाद में एक ऑपरेशन के दौरान बिन लादेन को मार गिराया गया था। इस ऑपरेशन के बाद नेवी सील के कमांडो अपने साथ बिन लादेन का शव भी ले गए थे।
इन दस्तावेजों में इस बात का भी जिक्र किया गया है कि लादेन अपने अंतिम समय में भी पूरे विश्व में अपने समर्थकों की संख्या को बढ़ाकर अमेरिका के खिलाफ जेहाद छेड़ना चाहता था। इन दस्तावेजों में इस बात का भी जिक्र है कि अपनी मौत से पहले ही उसने अपने बेटे को अपने डर के बारे में बताया था। उसने अपने बेटे को अपने शरीर में एक इलेक्ट्रानिक चिप प्लांट कराने को भी कहा था जिसकी मदद से उसे हर वक्त ट्रैक किया जा सके।
इसके अलावा वह आईएस द्वारा अगवा किए गए विदेशी लोगों के लिए भी उनसे बात करना चाहता था। वहीं पर, उसका पूरा फोकस अपनी जन्मभूमि यमन में आतंकियों की मजबूत फौज खड़ी करने पर भी था। हालांकि, यमन में अलकायदा अरेबिययन पेनिनसुला (अकाप) की एक बड़ी ब्रांच पहले से ही है।