फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Trump Tariffs: दुनिया में कितने दिन चलेगी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की दादागिरी, देशों को कब तक धमकाएंगे?

सार

Trump Tariffs: दुनिया के तमाम देशों पर टैरिफ लगाने के बाद से अमेरिका और राष्ट्रपति ट्रंप को फायदा हो रहा है। इसके साथ ही जापान, कोरिया समेत तमाम देशों के अमेरिकी हित बढ़े हैं। वहीं अब सवाल ये है कि क्या ट्रंप चीन के साथ जारी व्यापार युद्ध को संतुलित कर पाएंगे?
विज्ञापन
Donald Trump - फोटो : PTI
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पहले कार्यकाल से ज्यादा दूसरे कार्यकाल में उथल-पुथल मचा रहे हैं। विदेश सेवा के अधिकारी रहे एसके शर्मा कहते हैं कि ट्रंप ऐसा बिना किसी देश के विरुद्ध सैन्य शक्ति का इस्तेमाल किए कर रहे हैं, लेकिन यह अधिक समय तक नहीं चलेगा। भारतीय विदेश मंत्रालय भी अमेरिका के साथ रिश्तों को लेकर बहुत संवेदनशील है।
विज्ञापन


राष्ट्रपति ट्रंप आए दिन कोई न कोई धमाका करते रहते हैं। उन्होंने कहा है कि उनके पास चीन की अर्थव्यवस्था बर्बाद कर देने की तरकीब है। विदेश मंत्रालय के जानकार वरिष्ठ पत्रकार रंजीत कुमार कहते हैं कि दुनिया में यह भाषा केवल ट्रंप बोल सकते हैं। वह इसी तरह का बयान देकर लोगों उलझाए रखते हैं। अंतरराष्ट्रीय मामलों पर काम कर रहे अमित मिश्रा कहते हैं कि यह राष्ट्रपति ट्रंप की टीआरपी है। इससे बहुत घबराने की जरूरत नहीं है।

यह भी पढ़ें - Tariff: कल से अमेरिका भेजे जाने वाले भारतीय सामान पर 50% बेतुका टैरिफ, इसका श्रम आधारित उद्योगों पर क्या असर?
विज्ञापन


कब तक धमकाएंगे राष्ट्रपति ट्रंप?
वाणिज्य मंत्रालय के वरिष्ठ अफसर ने इस सवाल को सुना, मुस्कराए और धीरे से कहा कि अभी तो धमका रहे हैं। दरअसल यह राष्ट्रपति ट्रंप को भी नहीं पता कि वह किसको कब तक धमकाएंगे। सूचना है कि भारत अभी अमेरिका के साथ समीकरण साधने में जुटा है। सितंबर महीने तक इसके सकारात्मक परिणाम आने की उम्मीद है।  
हालांकि भारत अभी भी अमेरिका के साथ समीकरण साधने में लगा है। इसके लिए भारतीय विदेश मंत्रालय, अमेरिका स्थिति भारतीय दूतावास अपने स्तर से कड़ी मेहनत कर रहा है। समझा जा रहा है कि संयुक्त राष्ट्र महासभा की बैठक तक कई चीजें सामने आएंगी।

ऐसे ही चलेगा भारत और अमेरिका...
पूर्व विदेश सचिव शशांक आज रात अमेरिका जा रहे हैं। उन्हें भारत और अमेरिका के रिश्तों में फिलवक्त सुधार की गुंजाइश कम नजर आ रही है। शशांक कहते हैं कि भारत ने भी कदम आगे बढ़ा दिया है। पीछे खींचना थोड़ा मुश्किल होगा। भारत ने चीन और रूस के साथ ब्रिक्स के फोरम को मजबूत बनाया, रूस से तेल खरीद रहा है। हथियार खरीदने का प्रयास जारी है। ट्रंप प्रशासन इससे चिढ़ा है। राष्ट्रपति ट्रंप के सलाहकारों की भाषा भी यही इशारा कर रही है। जबकि राष्ट्रपति ट्रंप से पहले का अमेरिका इन बातों को पीछे छोड़कर रिश्तों में आगे बढ़ जाता था। इस समय स्थिति थोड़ा जटिल हो रही है।

चीन के मामले में क्या रहने वाला है ट्रंप का रुख?
ट्रंप को चीन जाना है। उन्हें राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने आमंत्रित किया है। लेकिन वह चीन को उसकी अर्थव्यवस्था को बर्बाद करने की धमकी दे रहे हैं। भारतीय रणनीतिकारों का कहना है कि राष्ट्रपति ट्रंप इसी तरह से अमेरिका का हित साधने के रास्ते पर चल रहे हैं। वह चीन को धमकाएं या रूस को, उनकी धमकियों का रूस पर कोई असर नहीं पड़ता। यहां तक कि भारत ने  जुलाई 2025 तक राष्ट्रपति राष्ट्रपति ट्रंप और अमेरिका का बहुत लिहाज किया। लेकिन अब भारत भी अंतरराष्ट्रीय पटल पर अपनी बात रख रहा है। अमेरिका के रणनीतिकार भी समझ रहे हैं कि इसी तरह की स्थिति बनी रही तो भारत और अमेरिका के रिश्ते में दूरी आती चली जाएगी। वहां के राजनयिकों, नेताओं का बड़ा वर्ग इसको लेकर चिंतित भी है।
विज्ञापन

 
यह भी पढ़ें - US Tariffs: बढ़े टैरिफ के कारण तिरुपुर, नोएडा, सूरत की निर्यात इकाइयों ने उत्पादन रोका, फियो ने जताई चिंता

क्या दुनिया में चलती रहेगी अमेरिका की दादागिरी?
पूर्व विदेश सचिव शशांक कहते हैं कि जापान, कोरिया समेत तमाम देशों से अमेरिका को खूब आर्थिक लाभ हो रहा है। ट्रंप प्रशासन के लोग यही दावा कर रहे हैं। कंपनिया भी अमेरिका की तरफ झुकाव रख रही हैं। ट्रंप परिवार की कंपनी को भी फायदा हो रहा है। यूरोप के देशों का समीकरण देखिए। शशांक कहते हैं कि अभी यह नहीं कहा जा सकता कि रूस और यूक्रेन शांति की तरफ कब आएंगे? इसमें किसकी कितनी भूमिका होगी। जब तक यह पिक्चर स्पष्ट नहीं होगी, तब तक नहीं लगता कि ट्रंप प्रशासन भी अपने रुख में कोई बदलाव लाने वाला है।

विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें