पुलवामा में सीआरपीएफ के काफिले पर आत्मघाती आतंकी हमले के बाद पाक के बालाकोट में एयर स्ट्राइक से चाहे जिसे जितना कूटनीतिक और रणनीतिक लाभ हुआ हो, लेकिन अमेरिका ने दुनिया में अपनी चौधराहट फिर साबित कर दी। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के भारत और पाकिस्तान को लेकर एक के बाद एक संदेश ने भारतीय विदेश मंत्रालय को भी निरुत्तर कर दिया है।
कूटनीति के जानकारों का भी मानना है कि अमेरिका ने ताजा घटनाक्रम से रूस, चीन, ब्रिटेन, फ्रांस, जर्मनी जैसे संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के अलावा इस्राइल, ईरान, अरब, आसियान, एशियाई, दक्षिण एशियाई संदेशों को अपनी चौधराहट का संदेश दिया है।
अमेरिका ने तय की भारत-पाकिस्तान की विदेश नीति
पुलवामा पर हमले के बाद राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने आतंकी घटना की तीव्र भर्त्सना की थी। उन्होंने पाकिस्तान को अपनी जमीन से चलने वाले आतंकी संगठनों पर कार्रवाई के लिए भी कहा। बाद में 20 फरवरी 2019 को एक टीवी इंटरव्यू में ट्रंप ने इसे दोहराया, लेकिन कहा कि वह बाद में इस मुद्दे पर बयान जारी करेंगे। इसके कुछ दिन बाद 23 फरवरी 2019 को ट्रंप ने पुलवामा हमले के जवाब में भारत द्वारा कुछ बड़ा करने की बात कही। राष्ट्रपति ट्रंप की इस टिप्पणी के सामने आने के बाद ही भारत ने एयर स्ट्राइक को अंजाम दिया।
राष्ट्रपति ट्रंप के इस बयान और एयर स्ट्राइक ऑपरेशन के बाद करीब 28 घंटे तक भारत और पाकिस्तान के बीच जंग सामने खड़ी दिखाई दे रही थी। सूत्र बताते हैं कि इसके बाद अमेरिका फिर सक्रिय हुआ और नतीजा सामने है। दोनों देश (भारत और पाकिस्तान) अपने अपने स्तर पर फेस सेविंग की रणनीति पर चले आए। माना जा रहा है कि इसका भी रोड-मैप अमेरिका ने ही तैयार कराया।
इसके बाद 28 फरवरी को ट्रंप का संदेश आया कि आज भारत और पाकिस्तान की तरफ से अच्छी खबर आ सकती है। ट्रंप के इस बयान के सात-आठ घंटे बाद ही भारत व पाकिस्तान के बीच में दोस्ताना हलचल बढ़ गई। भारत ने पाकिस्तान से बातचीत का माहौल बनाने, प्रधानमंत्री इमरान खान से अपने वादे पर अमल करने तथा विंग कमांडर अभिनंदन वर्तमान को सुरक्षित रिहा करने की शर्त रख दी। इमरान खान ने पाकिस्तान की संसद से शुक्रवार को विंग कमांडर को भारत को सौंपने की घोषणा कर दी।
अमेरिका को सोची -समझी रणनीति
कूटनीति के जानकर इस तरह से राष्ट्रपति ट्रंप के सामने आने को अमेरिका की सोची, समझी रणनीति मान रहे हैं। नाम न छापने की शर्त पर एक वरिष्ठ सूत्र ने कहा कि वह चीन समेत दुनिया के देशों को अपनी चौधराहट बरकरार रहने का संदेश देना चाहते हैं। दरअसल, अमेरिका का दक्षिण एशिया में प्रभाव बढ़ रहा है। अफगानिस्तान में अभी उसके हित हैं। ईरान के साथ नीतियों का टकराव है। रूस के साथ रिश्ते बहुत सामान्य नहीं है और चीन की प्रतिस्पर्धा उसे अखर रही है।
अमेरिका का दक्षिण एशिया में बढ़ रहा दखल रूस और चीन को अखरता है। अंतरराष्ट्रीय व्यापार की दृष्टि से यूरोपीय देशों को अपना नुकसान दिखाई पड़ता है। खास बात यह है कि भारत और पाकिस्तान दक्षिण एशिया के दो मजबूत देश हैं। दक्षिण एशिया की पूरी क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय राजनीति, अर्थनीति इनके इर्द-गिर्द घूमती है। ऐसे में अमेरिका ने यह दर्शाने की कोशिश की है कि भारत और पाकिस्तान की विदेश नीति, कूटनीति सब उनके राष्ट्रपति की हथेलियों में खिलती है।
कारगिल के समय में बिल क्लिंटन ने खींची थी लक्ष्मण रेखा
सेना के एक पूर्व लेफ्टिनेंट जनरल (डायरेक्टर जनरल ऑफ मिलिट्री इंटेलीजेंस) का कहना है कि इस बार थोड़ा ज्यादा हो गया। सूत्र का कहना है कि राष्ट्रपति ट्रंप के इस तरह से सामने आने के कारण पूरा पर्दा ही उठ गया। पूर्व जिम्मेदार सैन्य अधिकारी के अनुसार कारगिल युद्ध के समय में भी अमेरिका के तत्कालीन राष्ट्रपति बिल क्लिंटन ने भारत, पाकिस्तान के बीच में लक्ष्मण रेखा ही खींच दी थी।
हालांकि पूर्व अफसर का मानना है कि पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की समझ और सशक्त कूटनीति के जानकारों की टीम ने इसे बहुत सम्मानजनक तरीके से आगे बढ़ाया था। भारत का पूरे अभियान में दबदबा बना रहा और भारत ने इसे बाद में भी भुनाया।