यह बैठक साफ इशारा करती है कि भारत का न्यूक्लियर सेक्टर अब वैश्विक निवेशकों के लिए पूरी तरह तैयार है। अमेरिकी कंपनियों की यह दिलचस्पी भारत को आने वाले समय में स्वच्छ ऊर्जा का एक बड़ा ग्लोबल हब बना सकती है।
भारत के परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में बड़ी विदेशी पूंजी आने की सुगबुगाहट तेज हो गई है। अमेरिका के परमाणु ऊर्जा उद्योग का एक उच्च-स्तरीय प्रतिनिधिमंडल इन दिनों भारत दौरे पर है। इस प्रतिनिधिमंडल ने नई दिल्ली में भारत के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह से मुलाकात की। इस महत्वपूर्ण बैठक में भारत के परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में निजी निवेश को बढ़ावा देने पर विस्तार से चर्चा हुई। दोनों पक्षों ने अंतरराष्ट्रीय सहयोग के नए अवसरों पर भी अपनी सहमति जताई।
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विदेशी कंपनियों की भागीदारी पर मंथन
अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल ने भारत सरकार के साथ बातचीत में निवेश की इच्छा जताई। उन्होंने यह जानने की कोशिश की कि देश के न्यूक्लियर सेक्टर में निजी और विदेशी कंपनियों की भागीदारी को कैसे बढ़ाया जा सकता है। बैठक में खास तौर पर परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में निजी निवेश के अवसरों को तलाशने पर जोर दिया गया। इसके साथ ही दोनों देशों ने स्मॉल मॉड्यूलर रिएक्टर (एसएमआरएस) जैसी आधुनिक तकनीकों को अपनाने पर विचार साझा किए।
आपूर्ति श्रृंखला मजबूत करने पर जोर
इस रणनीतिक बैठक में केवल तकनीक ही नहीं, बल्कि बड़े पैमाने पर मैन्युफैक्चरिंग साझेदारी पर भी बात हुई। परमाणु परियोजनाओं की सप्लाई चेन को दुरुस्त करने के लिए दोनों देशों ने आपसी सहयोग की जरूरत बताई। इसके अलावा स्वच्छ ऊर्जा और एडवांस न्यूक्लियर टेक्नोलॉजी को भविष्य की जरूरत बताया गया। भारत सरकार अब धीरे-धीरे इस संवेदनशील क्षेत्र को अधिक खुला और निवेश-हितैषी बना रही है। हाल के नीतिगत सुधार इसी दिशा में उठाए गए बड़े कदम हैं।
वर्ष 2047 तक का महाप्लान
भारत सरकार ने देश की ऊर्जा सुरक्षा को लेकर एक बड़ा और स्पष्ट लक्ष्य तय किया है। सरकार का इरादा वर्ष 2047 तक देश की परमाणु ऊर्जा क्षमता को लगभग 100 गीगावॉट तक पहुंचाना है। इस विशाल लक्ष्य को हासिल करने के लिए निजी क्षेत्र और विदेशी कंपनियों को सक्रिय भूमिका निभाने का मौका दिया जा रहा है। परमाणु ऊर्जा को एक बेहद स्थिर और कम-कार्बन उत्सर्जित करने वाला ऊर्जा स्रोत माना जाता है। इसी वजह से भारत और अमेरिका इस साझेदारी को रणनीतिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण मान रहे हैं।